गठवाला खाप एकता का सबूत !!दादा घासीराम मलिक और चौधरी छोटूराम के आपस में घनिष्ठ संबंध थे।19 फरवरी 1868 को दादा घासीराम हुए,1881 में चौधरी छोटूराम पैदा हुए थे दादा घासीराम 13 साल बड़े थे ,उम्र में बड़े सर फजले हुसैन,सेठ छाजुराम लांबा,दादा घासीराम मलिक को चौधरी छोटूराम काका जी(चाचा जी) कहा करते थे। चौधरी साहब को नेता बनाने दादा घासी का बड़ा सहयोग था,वो सोनीपत में आयोजित लाख की भीड़ वाली धन्यवादी पंचायत थी जब पंजाब सूबे में यूनियनिस्ट पार्टी भारी बहुमत से विजई घोषित हुई थी चौधरी छोटूराम भी चुनाव जीत गए थे इस अवसर पर गठवाला खाप ने सोनीपत जिले में किसानों की ओर सम्मानित करने के लिए लगभग सभी जीते हुए उम्मीदवारों को बुलाया था,लाहौर से प्रधानमंत्री सर चौ फ़जले हुसैन (तिवाना मलिक)मुख्य अतिथि के रूप में पधारे।वे पंचायत में आ तो गए थे लेकिन उनका मन आशंकित,संशय, पसोपोस में था कहीं कोई ऐसी वैसी बात ना हो जाए जिससे नई नई यूनियनिस्ट पार्टी या उनकी छवि को नुकसान हो,ऊपर से कुछ कोस पर दिल्ली अंग्रेज वायसराय भी बैठा पंचायत पर अपनी पैनी नजर गड़ाए हुए था उसने डीसी सहित प्रशासन को हाई अलर्ट मोड पर रख दिया था ऐसे में खुशी के साथ साथ आयोजन की सफलता को ले कर तनाव की स्थिति बन चुकी थी मानो पूरे देश की निगाह इस पंचायत पर टिकी थी।जैसे जैसे आयोजन तिथि का समय नजदीक आता गया सरगर्मियां तेज हो गई सबमें यही कौतूहल था कि देखो अब क्या होता है,दादा घासीराम मलिक बेशक कम पढ़े लिखे थे मगर वे बहुत ही कढ़े हुए व्यक्तित्व थे।उन्होंने धैर्य से काम लिया और सबसे पहले सोनीपत पुराने रोहतक की सभी खापों को भी शामिल होने का आह्वान किया,नतीजे में दहिया,खत्री,अंतिल,हुड्डा सहित छोटी बड़ी सभी खापों के चौधरी भी सक्रिय हो चले। गठवालो ने भी अपनी अपनी ड्यूटियां बांट ली,हजारों बिछाने वाले खरड़,दरीयां,शामियाने इकट्ठा किए गए।लाखों आदमियों के भोजन के लिए क्विंटलों अनाज,दूध,घी इकट्ठा किया गया लगभग हर कुढ़ी,हर ढोले ,हर घर ने स्वेच्छा से अपना सहयोग किया। हजारों हुक्का पानी पात सहित जमा किए गए।लगभग 500 हलवाई,दस हजार कार्यकर्ता रहे होंगे जिन्होंने युद्ध स्तर की तैयारियों के बीच दिन रात कड़ी मेहनत से मोर्चा संभाला।आने वाले हर दस व्यक्तियों पर सेवा पानी के लिए एक आदमी तैनात था। गठवाला खाप की समस्त सरदारी, तपे, थांबे का आर्थिक ब्योंत इतना था कि बाहर वाले से किसी से कोई मदद नहीं ली गई।पंचायत का दिन आया तो सबको खाना खिला कर पंचायत शुरू हुई अध्यक्षता खुद दादा घासीराम कर रहे थे उनका निर्देश लेने के लिए सैकड़ों युवा करबद्ध खड़े थे जो दादा के आंख के इशारे को तुरंत पढ़ लेते और जो भी कमी रहती पूरा कर देते।आम पंचायत की जगह मंच को D की तरह बनाया गया था जो लगभग 12/15 फुट ऊंचा था सैकड़ों बड़े बड़े धुत्तू लाउडस्पीकर लगे हुए थे पंचायत की भीड़ बिल्कुल शांत,एकचित,अनुशासित थी क्योंकि दादा जी ने कह दिया था कि यह पंचायत आप लोगों की है आपके लिए ही है इसीलिए अनुशासन की जिम्मेवारी भी आप सभी की है।पूरे मान सम्मान के साथ दोपहर बाद तक सभी वक्ता बोले,प्रधानमंत्री फजले हुसैन व चौधरी छोटूराम सहित सभी गणमान्यों को ऊंट घोड़े हाथियों ढोल नगाड़ों के साथ खुले रथ पर बैठा कर लाया गया मांग व प्रस्ताव दिए गए,शांति से पंचायत चली अब *अंत में बोलने की बारी वयोवृद्ध फजले हुसैन की आई जिनका रुतबा की शहंशाह से कम नहीं था,जब वे बोलने लगे तो बोला नहीं गया गला रुंध गया,भावनाएं उमड़ पड़ी और उनकी आंखों से झर झर नीर बहने लगा तभी उनको पानी दिया गया और संयमित हो कर बोले मैं तो पूरे पंजाब में अपनी दाढ़ी को बड़ी मानता था लेकिन महानता के काम में लगी हुई मेरे से बड़ी एक नहीं तीन तीन दाढ़ियां यह पंचायत में बैठी हैं पहली दाढ़ी दादा घासीराम की दूसरी कप्तान टोडर सिंह मलिक की जिसने ये व्यवस्था संभाली तीसरी भगत फूल सिंह मलिक की जिन्होंने इस पंचायत को इतिहास में अमर कर दिया वास्तव में जैसा सुना था उससे कई गुना पाया।लोगों बोलो मैं तुम्हारा क्या काम करूं?तब दादा घासी राम ने कहा था कि म्हारे छोटू को मंत्री बना दे फेर काम तो हम आप ही इससे कढ़वा लेंगे,फजले हुसैन ने तब पहले चौधरी छोटूराम को कश्मीर का प्रधानमंत्री बनाने की बात कही इस पर लोगों की भावनाएं देख चौ छोटूराम ने हाथ हिला कर इनकार कर दिया इसके बाद उन्होंने चौधरी छोटूराम को पंजाब का माल मंत्री घोषित कर दिया और बोले लाहौर आ कर शपथ ले कर अपना काम संभाल ले और फटाफट इन किसानों की सारी मांगे मान कर अपना किया वायदा पूरा कर।मलिकों की अगुवाई की इस पंचायत ने ही चौधरी छोटूराम को नया आयाम स्थापित करने में मदद की।मेरे प्रिय साथियों आज देश आजाद है किसानों की कितनी मांगे आजाद भारत की सरकारें पूरा कर रही हैं यह आपको अच्छी तरह पता है ऐसी बेकद्री कभी नहीं देखी लेकिन इतिहास गवाह है चौधरी छोटूराम के समय में किसी किसान ने भूख हड़ताल, अनशन, आंदोलन, मार्च तो दूर मांगपत्र भी नहीं दिया यहां तक कि किसान अपने खेत खलिहान घर से बाहर भी नहीं निकला था सिर्फ अपनी अंतर्रात्मा की आवाज पर किसान का बेटा होने के नाते दर्द समझ कर एक नहीं पूरे 29 कानून बना डाले उसको पूरा हक दे दिया। यहां तक कि किसान के गेहूं का दाम बढ़वाने को ले कर वायसराय तक से भिड़ गया।ऐसी सोच के पीछे उनके साथ सहयोगी रहे दादा घासीराम मलिक का परामर्श बड़ा काम आया था।इसीलिए तो आज हम कहते हैं इस धरती पे फेर दुबारा पैदा चौधरी छोटूराम घासी राम करदे। इतिहास से जुड़ी पोस्ट अच्छी लगे तो ना जानने वाले भाइयों को जरूर शेयर करना मत भूलना।
आपका प्रिय जसबीर सिंह मलिक