Friday, 24 April 2026

जाट रे जाट! तेरे सिर पे खाट!!

 *जाट रे जाट! तेरे सिर पे खाट!!*


_महाबला महावीर्या, महासत्य पराक्रमाः ।_

_सर्वाग्रे क्षत्रिया जट्‌टा देवकल्‍पा दृढ़-व्रता: ||_


अर्थ- शिवजी बोले कि जाट महाबली हैं, महा वीर्यवान और बड़े पराक्रमी हैं क्षत्रिय प्रभृति क्षितिपालों के पूर्व काल में यह जाति ही पृथ्वी पर राजे-महाराजे रहीं। जाट जाति देव-जाति से श्रेष्ठ है, और  ये दृढ़-प्रतिज्ञा वाले हैं।


*जाट एक जाति नहीं है, बल्कि एक नस्ल है जो प्रमुखतः हिन्दू, मुसलमान और सिख धर्मो में पाई जाती है। यद्यपि जाट लोग विश्व के लगभग हर देश में मिलतें हैं क्योंकि ये परिश्रमी, ईमानदार और नेतृत्व प्रदान करने में सक्षम होतें हैं। जहाँ कोई नहीं जाना चाहता, जाट लोग वहाँ जाकर, खेती करके, उधम करके समृद्ध हो जातें हैं और स्थापित हो जातें हैं। खेल का मैदान हो या रणक्षेत्र का, खेत हो या देश की सीमा हो, ये हर जगह अपनी विशिष्ट पहचान बनाते हैं!*


■ जाट प्रारभ से ही निडर समाज में पले बढ़े होते हैं, जहां कायरता को एक अवगुण के रूप में देखा जाता है।


■ दूध, दही और घी सात्विक भोजन करने से जाट लोग बलवान हृष्टपुष्ट, सुडौल और सुन्दर होने के कारण अपनी अलग पहचान रखते हैं।


■ जाटों को सेना व पुलिस विभाग में वरीयता देने के पीछे शरीर गठन ही नहीं मानसिक रूप से भी मज़बूत होना भी है। यह गुण उन में जाति गत होता है। इनका डीएनए इसी प्रकार का होता है।


■ परिवार की महिलाओं में चरित्र को लेकर जाटों में बहुत जागरूकता होती है। वह सब कुछ सहन कर लेती है पर चरित्रहीन होना सहन नहीं होता।


■ जाट स्पष्टवादी होने के कारण बिना आगा-पीछा सोचे मन की बात कह देतें हैं। कुछ लोग इसको जाट होने की पहचान मानते हैं। बहादुर कौम तो यह है ही !


■ जिससे भी मन मिलता है तो उसके लिए तन मन धन न्योछावर करने के लिए तत्पर रहतें है।


■ सामाजिक प्रतिष्ठा को किसी भी प्रकार से आँच नही आने देते, चाहे उसके लिए प्राणो की आहुति भी क्यूँ न देनी पड़े!


■ जाट भाइयों के लिये बहन-बेटी, माँ-बहू की इज्जत सर्वोपरि होती है।


■ इंसानियत की भरमार होती है। मानवतावादी लोग हैं ये।


जाटों के बारे में इतिहासकारों, बुद्धिजीवियों, और विशिष्ट लोगों ने अपने मत प्रगट किये हैं, जिनका संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार प्रस्तुत है, जिसे पढ़कर जाटों के बारे में काफ़ी कुछ जाना जा सकता है:


■ यात्री अल बेरूनी - इतिहासकार: "मथुरा में वासुदेव से कंस की बहन से कृष्ण का जन्म हुआ। यह परिवार *जाट* था और गाय पालने का कार्य करता था।" आज भी मथुरा के आसपास का पूरा क्षेत्र जाट बाहुल्य है।


■ इतिहासकार डॉ० रणजीतसिंह: "जाट तो उन योद्धाओं के वंशज हैं जो एक हाथ में रोटी और दूसरे हाथ में शत्रु का खून से सना हुआ मुण्ड थामते रहे हैं।"


■ स्वामी दयानन्द, आर्यसमाज के संस्थापक ने इनको *जाट देवता* कहकर अपने प्रसिद्ध ग्रंथ *सत्यार्थप्रकाश* में सम्बोधन किया है। देवता का अर्थ है देनेवाला। उन्होंने कहा था *संसार में जाट जैसे पुरुष हों तो ठग रोने लग जाएं।*


■ प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ तथा हिन्दू विश्वविद्यालय बनारस के संस्थापक भारत रत्न महामहिम मदन मोहन मालवीय: 

_"जाट जाति हमारे राष्ट्र की रीढ़ है । भारत माता को इस वीरजाति से बड़ी आशाएँ हैं। भारत का भविष्य जाट जाति पर निर्भर है।"_


■दीनबन्धु सर छोटूराम: 

"हे ईश्वर! जब भी कभी मुझे दोबारा से इंसान जाति में जन्म दे तो मुझे इसी महान् जाट जाति के जाट के घर जन्म देना।"


■ कर्नल जेम्स टॉड, इतिहासकार:

(i)  उत्तरी भारत में आज जो जाट किसान खेती करते पाये जाते हैं, ये उन्हीं जाटों के वंशज हैं जिन्होंने एक समय मध्य एशिया और यूरोप को हिलाकर रख दिया था।

(ii)  राजस्थान में राजपूतों का राज आने से पहले जाटों का राज था।

 (iii) युद्ध के मैदान में जाटों को अंग्रेज पराजित नहीं कर सके।

 (iv) ईसा से 500 वर्ष पूर्व जाटों के नेता ओडिन ने स्कैण्डेनेविया में प्रवेश किया। 

(v) एक समय राजपूत जाटों को खिराज (टैक्स) देते थे ।


■ यूनानी इतिहासकार हैरोडोटस: 

*"There was no one in the world equal to the jats in bravery provided they had unity."*


■ महान् सम्राट् सिकन्दर जब जाटों के बार-बार आक्रमणों से तंग आकर वापिस लौटने लगे तो कहा: *" इन खतरनाक जाटों से बचो।"*


■ तैमूरलंग:  

'जाट एक बहुत ही ताकतवर जाति है, शत्रु पर टिड्डियों की तरह टूट पड़ती है, इन्होंने मुसलमानों के हृदय में भय उत्पन्न कर दिया।"


■ अहमदशाह अब्दाली:

 "जितनी बार मैंने भारत पर आक्रमण किया, पंजाब में खतरनाक जाटों ने मेरा मुकाबला किया। आगरा, मथुरा व भरतपुर के जाट तो नुकीले काटों की तरह हैं।"


■ मि. नेशफील्ड:

"जाट एक बुद्धिमान् और ईमानदार जाति है।"


■ इतिहासकार सी.वी. वैद:

"जाट जाति ने अपनी लड़ाकू प्रवृत्ति को अभी तक कायम रखा है।"


■ इतिहासकार शिवदास गुप्ता:

"जाटों ने तिब्बत,यूनान, अरब, ईरान, तुर्कीस्तान, जर्मनी, साईबेरिया, स्कैण्डिनोविया, इंग्लैंड, ग्रीक, रोम व मिश्र आदि में कुशलता, दृढ़ता और साहस के साथ राज किया और वहाँ की भूमि को विकासवादी उत्पादन के योग्य बनाया था।"


■ हर्षि पाणिनि के धातुपाठ (अष्टाध्यायी) में:

 *जट झट संघाते* - अर्थात् जाट जल्दी से संघ बनाते हैं।


■ महर्षि यास्क, निरुक्त में - 

*जागर्ति इति जाट्यम्* - जो जागरूक होते हैं वे जाट कहलाते हैं। *जटायते इति जाट्यम्* - जो जटांए रखते हैं वे जाट कहलाते हैं!


■ जर्मन जनरल रोमेल:

 "काश! जाट सेना मेरे साथ होती!"


■ सुप्रसिद्ध अंग्रेज योद्धा जनरल एफ.एस. यांग:

"जाट सच्चे क्षत्रिय हैं। ये बहादुरी के साथ-साथ सच्चे, ईमानदार और बात के धनी हैं।"


■ महाराजा कृष्णसिंह, भरतपुर नरेश, 1925 में पुष्कर में: 

"मुझे इस बात पर अभिमान है कि मेरा जन्म संसार की एक महान् और बहादुर जाति में हुआ।"


■ डॉ. विटरेशन:

"जाटों में चालाकी और धूर्तता, योग्यता की अपेक्षा बहुत कम होती है।"


■ मेजर जनरल सर जॉन स्टॉन:

"ये जाट लोग पता नहीं किस मिट्टी से बने हैं, थकना तो जानते ही नहीं!"


■ लार्ड लेकेक:

"हमारी स्थिति यह है कि मार करने वाली सभी तोपें बेकार हो गई हैं और भारी गोलियाँ पूर्णतः समाप्त हो गई हैं। हमारे एक तिहाई अधिकारी व सैनिक मारे जा चुके हैं। जाटों से जीतना असम्भव लगता है।"

उस समय जनता में यह दोहा गाया जाता था: 

*यही भरतपुर दुर्ग है, दूसह दीह भयंकार।*

*जहाँ जटन के छोकरे, दीह सुभट पछार।।*


■ इतिहासकार डी.सी. वर्मा:

" महाराजा सूरजमल जाटों के प्लेटो थे।"


■ बादशाह आलमगीर द्वितीय ने महाराजा सूरजमल के बारे में अब्दाली को लिखा था:

"जाट जाति जो भारत में रहती है, वह और उसका राजा इतना शक्तिशाली हो गया है कि उसकी खुली खुलती है और बंधी बंधती है।"


■ कर्नल अल्कोट:

"हमें यह कहने का अधिकार है कि 4000 ईसा पूर्व भारत से आने वाले जाटों ने ही मिश्र (इजिप्ट) का निर्माण किया।"


■ यूरोपीयन इतिहासकार मि० टसीटस:

"जर्मन लोगों को प्रातः उठकर स्नान करने की आदत जाटों ने डाली। घोड़ों की पूजा भी जाटों ने स्थानीय जर्मन लोगों को सिखलाई। घोड़ों की सवारी जाटों की मनपसंद सवारी है।"


■ तैमूर लंग:

"घोड़े के बगैर जाट, बगैर शक्ति का हो जाता है।"


■ भारतीय सेना के ले० जनरल के. पी. कैण्डेथने सन् 1971 के युद्ध के बाद कहा था :

"अगर जाट न होते तो फाजिल्का का भारत के मानचित्र में नामोनिशान न रहता।"


■ 1971के युद्ध के बाद एक पाकिस्तानी मेजर जनरल मुकीम खानने कहा था:

"चौथी जाट बटालियन का आक्रमण भयंकर था जिसे रोकना उसकी सेना के बस की बात नहीं रही।"


■ राष्ट्रपति जाकिर हुसैन:

"जाटों का इतिहास भारत का इतिहास है और जाट रेजिमेंट का इतिहास भारतीय सेना का इतिहास है।"


■ जाट रेजिमेंट का रणघोष: 

*‘जाट बलवान्-जय भगवान्!!’*


■ पत्रकार खुशवन्तसिंह:

(i) *"The Jat was born worker and warrior. He tilled his land with his sword girded round his waist. He fought more battles for the defence for his homestead than other Khashtriyas."* 

(ii) "पंचायती संस्था जाटों की देन है और हर जाटों का गांव एक छोटा गणतन्त्र है।"


■ जब 25 दिसम्बर 1763 को जाट प्रतापी राजा सूरजमल शाहदरा में धोखे से मारे गये तो मुगलों को विश्वास ही नहीं हुआ और बादशाह शाहआलम द्वितीय ने कहा:

*"जाट मरा तब जानिये जब तेरहवीं हो जाये।"*


■ अलाउद्दीन खिलजी: 

"इन जाटों को नहीं छेड़ना चाहिए । ये बहादुर लोग ततैये के छत्ते की तरह हैं, एक बार छिड़ने पर पीछा नहीं छोड़ते हैं।"


■  इतिहासकार मो० इलियट:

*"जाट वीर जाति सदैव से एकतंत्री शासन सत्ता की विरोधी रही है तथा ये प्रजातंत्री हैं।"*


■ संत कवि गरीबदास :

*जाट सोई पांचों झटकै, खासी मन ज्यों निशदिन अटकै।*

जो पाँचों इन्द्रियों का दमन करके, बुरे संकल्पों से दूर रहकर भक्ति करे, वास्तव में वह जाट है।


■ इतिहासकार कालिकारंजन कानूनगो :

(क) एक जाट वही करता है जो वह ठीक समझता है।

(ख) जाट एक ऐसी जाति है जो इतनी अधिक व्यापक और संख्या की दृष्टि से इतनी अधिक है कि उसे एक राष्ट्र की संज्ञा प्रदान की जा सकती है। 

(ग) ऐतिहासिक काल से जाट बिरादरी हिन्दू समाज के अत्याचारों से भागकर निकलने वाले लोगों को शरण देती आई, उसने दलितों और अछूतों को ऊपर उठाया है। उनको समाज में सम्मानित स्थान प्रदान कराया है।

(घ) हिन्दुओं की तीनों बड़ी जातियों में जाट कौम वर्तमान में सबसे बेहतर पुराने आर्य हैं।


■ महान् इतिहासकार ठाकुर देशराज:

" जाटों को मुगलों ने परखा, पठानों ने इनकी चासनी ली, अंग्रेजों ने पैंतरे देखे और इन्होंने फ्रांस एवं जर्मनी की भूमि पर बाहदुरी दिखाकर सिद्ध किया कि जाट महान् क्षत्रिय हैं।"


■ पं० इन्द्र विद्यावाचस्पति:

"जाटों को प्रेम से वश में करना जैसा सरल है, आँख दिखाकर दबाना उतना ही कठिन है।"


■कवि शिवकुमार प्रेमी :

*जाट को जाट मारे या मारे करतार!*


■ विद्वान् विलियम क्रूक:

(i) जाट विभिन्न धार्मिक संगठनों व मतों के अनुयायी होने पर भी जातीय अभिमान से ओतप्रोत हैं। भूमि के सफल जोता, क्रान्तिकारी, मेहनती जमीदार तथा युद्ध योद्धा हैं।"

(ii) स्पेन, गाल, जटलैण्ड, स्काटलैण्ड और रोम पर जाटों ने फतेह कर बस्तियां बसाई।


■ विद्वान् ए.एच. बिगले:

"जाट शब्द की व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है। यह ऋग्वेद, पुराण और मनुस्मृति आदि अत्यन्त प्राचीन ग्रन्थों से स्वतः सिद्ध है। यह तो वह वृक्ष है जिससे समय-समय पर जातियों की उत्पत्ति हुई।"


■ विद्वान् कनिंघम:

"प्रायः देखा गया है कि जाट के मुकाबले राजपूत विलासप्रिय, भूस्वामी गुजर और मीणा सुस्त अथवा गरीब, कास्तकार तथा पशुपालन के स्वाभाविक शौकीन, पशु चराने में सिद्धहस्त हैं, जबकि जाट मेहनती जमीदार तथा पशुपालक हैं।"


■ इतिहासकार यदुनाथ सरकार:

"जाट समाज में जाटनियां परिश्रम करना अपना राष्ट्रीय धर्म समझती हैं, इसलिए वे सदैव जाटों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर कार्य करती हैं। वे आलसी जीवन के प्रति मोह नहीं रखती।"


■ प्राचीन इतिहासकार मनूची:

"जाटनियां राजनैतिक रंगमंच पर समान रूप से उत्तरदायित्व निभाती हैं। खेत में व रणक्षेत्र में अपने पति का साथ देती हैं और आपातकाल के समय अपने धर्म की रक्षा में प्रोणोर्त्सग करना अपना पवित्र धर्म समझती हैं!"


 ■ इतिहासकार उपेन्द्रनाथ शर्मा:

" जाट जाति करोड़ों की संख्या में प्रगितिशील उत्पादक और राष्ट्ररक्षक सैनिक के रूप में विशाल भूखण्ड पर बसी हुई है। इनकी उत्पदाक भूमि स्वयं एक विशाल राष्ट्र का प्रतीक है।"


■ विद्वान् सर डारलिंग:

‘‘सारे भारत में जाटों से अच्छी ऐसी कोई जाति नहीं है जिसके सदस्य एक साथ कर्मठ किसान और जीवंत जवान हों।’’


■ इतिहासकार सर हर्बट रिसले:

" जाट और राजपूत ही वैदिक आर्यों के वास्तविक उत्तराधिकारी हैं।"


■ फील्ड मार्शल माउंटगुमरी :

 *“Jat is true soldier. I will be happy to die with dignity amongst Jats. My soul will be bless with peace.”*


■ अंग्रेज जनरल ओचिनलैक (बाद में फील्ड मार्शल) :

‘‘If things looked back and danger threatened I would ask nothing better than to have *Jats* beside me in the face of the enemy” 


■ राजा महेन्द्रप्रताप सिंह:

 “हमारी जाति बहादुर है। देश के लिए समर्पित कौम है। चाहे खेत हो या सीमा। धरतीपुत्र जाटों पर मुझे नाज़ है।”


■ पं. जवाहरलाल नेहरू:

 *‘‘दिल्ली के आसपास चारों ओर जाट  एक ऐसी महान् बहादुर कौम बसती है, वह यदि आपस में मिल जाये और चाहे तो दिल्ली पर कब्जा कर सकती है।”*


■ स्वामी ओमानन्द सरस्वती:

*‘‘ईरान से लेकर इलाहाबाद तक जाटों के वीरत्व व बलिदानों का इतिहास चप्पे-चप्पे पर बिखरा पड़ा है। क्या कभी कोई माई का लाल इनका संग्रह कर पाएगा ? काश ! जाट तलवार की तरह कलम का भी धनी होता।”*


■ डॉ० बी.एस. दहिया, अपनी पुस्तक Jats- The Ancient Rulers:

_‘‘There is no battle worth its name in the World History where the Jat Blood did not irrigate The Mother Earth.’’_


■ प्रो० मैक्समूलर:

“सारे भूमण्डल पर जाट रहते हैं और जर्मनी इन्हीं आर्य वीरों की भूमि है।”


■ इतिहासकार बलिदबिन अब्दुल मलिक:

 “अरब की हिफाजत के लिए हमने जाटों का सहारा लिया।”


■ सुल्तान मोहम्मद:

 “जाट कौम का डर मेरे ख्वाब में भी रहता है। इन्होंने मुझे कभी खिराज नहीं दिया।”


■ प्रो० बी. एस. ढिल्लों:

“मोहम्मद गजनी ने जाटों को खुश करने के लिए साहू जाटों से अपनी बहिन का विवाह किया था!" (‘हिस्ट्री एण्ड स्टडी ऑफ दी जाट’- सर ए. कनिंघम)


■ प्रो० पी.टी. ग्रीव:

 *“जाट केवल भगवान के सामने ही अपने घुटनों को झुकाता है क्योंकि वह नेता होता है, अनुयायी नहीं।”*


■ विद्वान् टॉलबोट राईस :

“याद रहे चीन ने 1500 मील लम्बी और 35 फिट ऊंची दीवार जाटों से बचने के लिए ही बनाई थी।”


■ इतिहासकार जे.सी. मोर:

“जाट वास्तव में हिन्दुओं की जाति नहीं है, यह एक नस्ल है।”


■ विद्वान् डॉ० वाडिल:

 “गुट, गोट, गुट्टी, गुट्टा, गोटी और गोथ आदि जाटों के नाम के ही शाब्दिक उच्चारण के विभिन्न रूप हैं, जो मध्यपूर्व में महान् शासक हुए हैं।”


■ जनरल सर मैकमन:

(i) "जाट बहुत ताकतवर और कठिन परिश्रमी किसान हैं जो हाथ में हल लेकर पैदा होता है।"

(ii) 'जाटों ने हमेशा अपनी लड़ने की योग्यता को कायम रखा, इसी कारण प्रथम विश्वयुद्ध में केवल जाटों की छटी रेजीमेंट को रॉयल की उपाधि मिली।"


■ विद्वान् मेजर बरस्टो :

“जाटों की विशेषता है कि वे अपने गोत्र में शादी नहीं करते चाहे वह हिन्दू जाट हो या पंजाबी। क्योंकि जाट इसे व्यभिचार मानते हैं।”


■ डॉ० रिस्ले:

_“When Jat runs wild it needs God to hold him back."_  अर्थात् "यदि जाट बिगड़ जाए तो उसे भगवान ही काबू कर सकता है।”


■ रूसी इतिहासकार के.एम. सेफकुदरात ने अगस्त 1964 में मास्को में एक भाषण दिया जो भारतीय समाचार पत्रों में भी छपा था:

_“I studied the histories of various sects before I visited India in 1957. It was found that Jats live in an area extending from India to Central Asia and Central Europe. They are known by different names in different countries and they speak different languages but they are all one as regards their origin.”_ 


*एक जाट जाट*

*दो जाट मौज!*

*तीन जाट कम्पनी*

*चार जाट फ़ौज!*


✊🏾🤝💪🏾🦚🎋🌱💚🇮🇳

*शुभ अंतरराष्ट्रीय जाट दिवस!!*

*शुभ बैसाखी!!!*

Thursday, 23 April 2026

किसान कबीलाई पूरखो ने जब गाँव बसाये थे तो उन्हे सिर्फ खेती करनी आती थी पशुपालन की नालेज थी सो डाँगर पालते थे ।

जब कबीलाई किसानो ने गाँव आबाद किये अपने पूरखो के आशीर्वाद स्वरूप एक दादा खेडा बनाया मिट्टी और ईटो से

फिर उन्हे जरूरत हुई कुए से पानी निकालने की और कुए खोदने की तो वो अपने गांवो मे ओढ लेकर आये जो तालाब बनाते थे बावडी बनाते थे और चिणाई का काम किया करते थे ।
फिर इन्हे जरूरत हुई मिट्टी के बर्तनो की फिर ये उन्हे गाँव मे लेकर आये जिन्हे मिट्टी से बर्तन बनाने आते थे तो कुम्हारो को गाँवो मे बसाया।
फिर इन्हे जरूरत हुई खेत मे काम करने के लिए हल कस्सी जेली गंडासे हथोडी की तो ये उन्हे ले आये जिन्हे लोहे का काम आता था तो ऐसे इनके गाँव मे लोहार आबाद हो गये ।
फिर इन्हे जरूरत पडी खेतो मे मजदूरो के रूप मे काम करने की सीजन के समय क्योकि उस समय काम ज्यादा था माणस कम थे तो ये मेहनती कौम कश्यपो को गाँव मे लेकर आये
फेर इन्हे बुग्गी खाट खटोले दरबाजे खिडकी की जरूरत हुई तो ये बाडीयो को ले आये
फिर बिमारी के कारण इनके पशु मर रहे थे तो इन्हे पता नही था की इन पशुओ को कैसे ठिकाने लगाये तो ये उन्हे गाँव मे लेकर आये जिन्हे चमडे से जूते चप्पल बनाने आते थे जिन्हे चमडे की अच्छी जानकारी थी । जो चमडे का व्यापार करते थे ।
इस समय भी पुरी दुनिया मे सबसे महंगे ब्रेन्ड जेसै डेयोर के बैग भी चमडे से बनते है ये काम छोटा नही था मगर पंडो ने इस काम को शुद्रो की श्रेणी मे रखा तो इन्हे शुद्र कहा जाने लगा और ये भी गाँवो मे आबाद हो गये ।
फिर जैसे जैसे अनाज के बदले समान लेने के स्थान पर सोने के सिक्के चले तो ये अपने गांवो मे सुनारो को ले आये जिन्हे सोने की नालेज थी । जिससे ये समान खरीद व बेच सकते थे ।
इसी तरह से नाथ सम्प्रदाय का प्रचार अपने जोरो पर था 14-18 वी शताब्दी तक तो गाँवो मे एक दो परिवार जोगी बन गये भक्तिकाल मे ।
ऐसे ही जिन्हे बाल काटने दाढी बनाने की नालेज थी उन्हे भी गाँव मे बसाना जरूरी था तो उन्हे भी गाँवो मे लाकर आबाद किया गया
ऊपर जितने भी नाम लिखे है किसान कबीलाई लोग इन्हे साल मे हर फसल के बाद अनाज देते थे ताकी इनका भी गुजारा हो सके इनके बच्चे पेट भरके सौ सके ।
2005 तक भी हरियाणवी देहात मे ऐसा ही कल्चर चलता रहा
ये हरियाणे की सरंचना थी हर जाति का इतिहास कुछ ऐसा ही है ।
अब आता हूँ मुद्दे की बातो पर । आज ये लोग किसान कबीलाई कौम के खेतो के काम पर निर्भर नही है । क्योकि जमाना पिछले 20-30 साल मे हद से ज्यादा बदल चुका है । अब लोगो को अनाज की इतनी जरूरत नही रही । क्योकि लोगो ने नौकरी करना शुरू कर दिया । लोग पढ लिख गये । अब लोगो को ऐसा फील होता है मै किसी के नीचे क्यो काम करू ।
ठीक जमीदारो के बच्चो का भी यही हाल है मै खेती क्यो करू
तो हरियाणवी देहात मे कबीलाई किसान व अन्य वर्ग खेती से दूर हो चुके है । अब दोनो के पास आगे बढने का बराबर मौका है ।
जो सालो से आपके नीचे काम करते रहे हो और वो कल को आपसे आगे निकल जाए तो किसी को भी अच्छा नही लगता ठीक ऐसे ही हरियाणा मे बडे बडे किसान कबीलाई लोगो को
इनका आगे बढना अच्छा नही लगता।
ऊपर से सोशल मीडिया आ चुकी है । जिनके मुठीभर पूरखे सदियो से शोषण करते थे महिला वर्ग का अब उन्ही शोषण करने वालो की लडकिया इन्सटाग्राम पर मूजरे करके दिखा रही है ।
ये खाई कैसे भरेगी उनको तुम्हारी जरूरत नही
तुम्हे उनकी जरूरत नही है । तभी शहरो मे पलायन हो रहे है ।
क्योकि गाँवो मे गाँव जेसा कुछ बचा ही नही है ।
जिस काम के लिए गाम आबाद हुए थे वो काम अब बिहारी सस्ते रेटो पर करने आते है । तो ये पुरा स्ट्रक्चर ढहने वाला है ।
जो जरूरत के पिलरो पर टीका हुआ था ।
जरूरत खत्म तो भाईचारा खत्म ।
न्यू वर्ल्ड ओर्डर ऐसे ही थोडी आया है 19 वी शताब्दी मे बहुत सोच समझकर इसे डिजाईन किया गया था । लोगो को शहरो मे बडे बडे कबूतरखाने रूपी फ्लेटो मे कैद किया जाएगा
देखते जाओ अगले 15-20 सालो मे ज्यादातर गाँव के लोग शहरो मे आबाद हो चुके होगे । ये जाति के नाम पर लडाई झगडे हद से ज्यादा बढने वाले है क्योकि लोगो के पास बराबर का हक नही है ।
बडे बडे किसान कबीलाई जातियो को आप जितना मर्जी गाली दो उल्टा बोलो उनकी जाति को आपको कुछ नही होगा
मगर वो आपको बोलेगे तो आपके पास उन्हे भीतर करने का कानून है । ये समानता नही है । ये उस खाई को बढावा देता है जो इंसानियत को रोन्द देती है ।
हरियाणा मे हर किसान जाति को उल्टे शब्दो से बोला जाता है हर जाति के उल्टे नाम निकाल रखे है मगर संविधान मे इनके पास हक नही है कोई इन्हे कुछ भी बोले ये चाहकर भी कुछ नी कर सकते
इसी वजह से ये लोग संविधान का सम्मान नही करते इसी वजह से ये लोग संविधान से खुश नही है।
देश मे बराबरी हो सबका सम्मान हो उसका एक ही तरीका से स्कूल कालेजो से जाति व्यवस्था को हटाना जाति के नाम पर स्पेशल फील कराना। अगर 100 बच्चो मे 20 को VIP फील दी जाएगी तो 80 खुद ही उनके खिलाफ रहेगे। ये समानता कभी नही आयेगी । जब वो बच्चे बडे होगे तो उनके दिमाग मे जातिवाद कभी खत्म नही होगा ।
जाति व धर्म के नाम पर एक दूसरे को कोसना बंद करो मिलकर रहो जैसे पहले रहते थे ।

Amit Rod

Sunday, 19 April 2026

जाटो का इतिहास राजपूतो ने कैसे अपना बनाया!

 Note--जाटो अगर ये पोस्ट मिस करदी तो सब कुछ मिस कर दोगे, फेसबुक के इतिहास में सबसे बड़ी सच्चाई खोज कर लाया हूँ सबूत समेत,

देखो जाटो का इतिहास राजपूतो ने कैसे अपना बनाया,असली #हेले जाटो को #भाटी या #भट्टी कहा जाता था आज से 300 साल पहले तक पंजाब में, ये भाठी उपाधि 2 हज़ार साल पहले जाट सम्राट शालिवाहन ने शुरू करी ,भाठी या भठ्ठी का मतलब होता है वो जाट जो अपने इतिहास को लिखवाने के लिए #भाठ जाती को रखते थे,ये बात संसार का सबसे बड़ा इतिहासकार j.d.cunnigham जिसने सिखों का इतिहास बुक लिखी जो फ्रांस आदि यूरोप के देशों में पढ़ाई जाती है,वही cunnigham गाँव गाँव में गया और सच्चा जाट इतिहास लिखा वो कहता है कि भाटी जाट थे,खुद वो नही सभी बड़े इतिहासकार कहते थे कि भाटी जाट थे,इस से बड़ा कोई सबूत नही हो सकता,क्योंकि ज्यादातर जाट राजाओ के वंश भाटी थे तो राजपूतो ने एक गेम खेला ओर colonol tod को पैसे देकर भाटियों को राजपूत लिखवा दिया ये घटना cunnigham के बहोत बाद कि है,ये झूठ राजस्थान के कुछ हिस्सों में तो चल गया पर सच्चाई सामने आ ही जाती है,ये घठिया हरकत महाराजा रणजीत सिंह जट्ट ओर पटियाला समेत कई जाट राजाओ को भाटी राजपूतो से निकले हुए बताने की एक नीच कोशिश थी,हाँ ये भाटी थे पर #भाटी असली जाटो का टाइटल था जिसमे ज्यादातर जाट राजाओ के गोत्त शामिल है,दूसरी तरफ मालवा के वीर जाट थे जिन्होंने मुल्तान,मालवा आदि क्षेत्र बसाए ये वीर जाट सिकंदर से लडे थे और जब ये कमजोर हो गए तो इन्होंने भारत मे भीतर की तरफ अपने राज्य बसाए ये सब आप इस किताब के पेज में पढ़ सकते हो,पंजाब जाटो का था और जाटो का है और जाटो का रहेगा,
जाट भाइयो जागो कैसे तुम्हारे इतिहास को चुराकर ये लोग अपना बना रहे है






Wednesday, 15 April 2026

गीता प्रेस गोरखपुर के द्वारा छापी गई रामचरित मानस के दोहे

 गीता प्रेस गोरखपुर के द्वारा छापी गई रामचरित मानस के दोहे

"शुद्र ग्वार ढोल और नारी

ये सब ताड़ना के अधिकारी "  

के ताड़ना शब्द का अर्थ 1925 में 'दण्ड"  व 2025 में "शिक्षा " क्यों और कैसे हो गया? 





Monday, 13 April 2026

यहूदी कयामत तक भटकते ही रहेंगे!

यहूदी कयामत तक भटकते ही रहेंगे इनको कोई अपनी जमीन में रहने नही देगा ये इतने नाशुर हे जहा भी रहे हे इन्होंने उत्पात ही मचाया है!! 

  "चलीये देखते है यहूदियों ने 1000 वर्षों कितनी जंग जीती है ?? "

1080 में फ्रांस से भाग गए 

1098 में चेक रिपब्लिक से भाग गए 

1113 में क्यूवान रूस से बाग निकले ,

1113 ही में इनका कतले आम हुआ ,

1147 में एक बार फिर फ्रांस से निकल दिया गया ,

1171 में इटली से भाग गए ,

1188 में इंग्लैंड से निकल दिया गया 

1198 में इंग्लैंड से भाग निकले ,

1290 इंग्लैंड से भाग निकले ,

1298 में स्विट्जरलैंड से भाग निकले जब 100 यहूदियों को फांसी दी गई ,

1306 में एक बार फिर फ्रांस से दे दखल किए गए ,300 यहूदियों को जिंदा जलाया गया ,

1360 में हंगरी से भाग निकले ,

1391 में स्पेन से निकाला गया 3000को फांसी 5000 को जिंदा जलाया गया ,

1394 में फ्रांस से एक बार फिर भाग निकले ,

1407 पोलैंड से भाग निकले ,

1492 में एक बार फिर स्पेन से भगाया गए इनके लिए हमेशा की पाबंदी लगाई गई ,

1492 में सिसली से बे दखल किया गया ,

1495 में लिथुआनिया से निकाले गए 

1496 पुर्तगाल से भाग निकले ,

1510 में इंग्लैंड से भाग निकले ,

1516 में दुबारा पुर्तगाल सै निकल गए ,

1516 में सिसली में कानून बनाया गया यहूदी केवल यहूदी बस्तियों में ही रहेंगे ,

1524 में ऑस्ट्रिया से भाग निकले ,

1555 में फिर पुर्तगाल से भगाया गया ,

155 में रोम में कानून बना जिसमें इनको अपनी ही बस्तीयों में रहने की इजाजत मिली ,

1556 में इटली से निकले गए ,

1570 में जर्मनी से निकाल दिया गया ,

1629 में स्पेन और पुर्तगाल से भगाया गया ,

1634 में स्विट्जरलैंड से फिर भगाया गया ,

1655 में एक बार फिर स्विट्जरलैंड से भगाया ,1660 में कीफ से निकाला गया ,

1701 में स्विट्जरलैंड हमेशा के लिए निकाल दिया गया,

1806 में नेपोलियन का अल्टिमेटम,

1828 में कीफ से भाग निकले ,

1933 में जर्मनी से निकले वहां नस्ल कसी की गई इनकी ,

14 मई 1948 को फिलिस्तीन ने अपने मुल्क में यहूदियों को पनाह दी ,

इसके अलावा सबसे पहले रसूल अल्लाह ने खुद यहूदियों को शहर से निकाल दिया ,ये यहूदी की तारीख है जिसे आप खुद भी पढ़िए और दूसरों को भी शेयर कीजिए ,,ये दुनिया की अकेली ऐसी कौम है जो जमीन पर आलम ए इन्सानियत के नाम पर कलंक है !

Sunday, 12 April 2026

कणकां दी मुक गई वाखी, के ओ जट्टा आई वैसाखी!

इस कहावत में 'जट्ट' शब्द ही क्यों है, जानने हेतु अंत तक पढ़ें!


हरयाणी भाषा में 'मेख' व् पंजाबी भाषा में 'वैसाखी' की आप सभी को लख-लख बधाईयाँ!

जलियांवाला बाग़ शहीदी दिवस भी आज ही है - प्रणाम शहीदां नूं!

खालसा पंथ स्थापना दिवस आज भी ही है, अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस भी आज ही है - बधाई हो दोनों की!

13 अप्रैल 1917 को चौधरी छोटूराम का अखबार 'जाट गजट' पहली बार प्रकाशित हुआ।

थम मात्र किसान नहीं सो, उदारवादी जमींदार सो; और इसी से सम्बोधन दिया करो अपने लिए - खासकर अगर पूर्वोत्तर व् पश्चिम-दक्षिण के सामंती-जमींदार से अपने-आपको अलग दिखाना है तो! और यह अलग दिखाना इसलिए जरूरी नहीं है कि इसमें कोई अहम्-बहम-भरम-घमंड का प्रदर्शन करना है, अपितु इसलिए ताकि खुद को सामंतियों की नस्लीय-हेय व् वर्णीय उच्च-नीचता से पृथक रख के, अपने सीरियों-साझियों को संदेश दे सको कि हमने आपके साथ जो बरतेवा किया वह भाईचारे का किया, बंधुवा का नहीं! और यह दिखाना इसलिए भी जरूरी है ताकि सर छोटूराम की भाषा वाला फंडी आपको 'जोहड़-लेट में सन के आई म्हास की तरह अपने में ना लबेड के दिखा पाए'| यहीं से ऐसा करके ही वह आप पर पोलिटिकल माइलेज लेने की कोशिश करता है; इसको यहीं रोक दो तो 35 बनाम 1 से 90% बचाव तो इतने भर से हो जाए! कहो कि होंगी कमियां उदारवादी जमींदारी में भी परन्तु सामंतियों से दिन-रात के अंतर् जितने बेहतर रहे हैं आप अपने सीरी-साझियों से बरतेवे को ले के!

और यही वजह है कि इस शीर्षक की कहावत में 'जट्ट' शब्द है; क्योंकि आपके मिसललैंड व् खापलैंड से बाहर जाते ही उदारवादी जमींदारा नहीं है; व् क्योंकि आपके पुरखे इस कांसेप्ट के संस्थापक-पोषक रहे; इससे उनकी 'आर्गेनिक-मार्केटिंग' हुई व् उससे उनकी यह आर्गेनिक ब्रांड बनी व् वह ऐसी कहावतों में ऑर्गेनिक्ली स्वीकृत हुए! आर्गेनिक यानि स्वत: गुण से सर्व द्वारा स्वीकार्य; कृत्रिम यानि manipulated नहीं कि जिसको खड़ा करने को propagandas लगें!

जय यौधेय! - फूल मलिक

जो अन्तर्जातीय विवाह को ये कहकर बेहतर बताते है कि ये diversity बढ़ा कर better genes देता है वो facts को manipulate कर रहे है

जो अन्तर्जातीय विवाह को ये कहकर बेहतर बताते है कि ये diversity बढ़ा कर better genes देता है वो facts को manipulate कर रहे है। genetic depression 2 तरह के होते है 1. ज्यादा नजदीक शादी करने से होने वाला inbreeding depression जिस से बचने के लिए हम गोत छोड़कर शादी करने की

प्रथा already है। 2. ज्यादा दूर शादी करने से होने वाला outbreeding depression जिस से बचने के लिए हम दूसरे समूह या जाति में शादी नहीं करते।
अगर interracial या intercaste शादी करने से बेहतर बच्चे होते तो bantus आज european या चाइनीज लोगों से बेहतर होते क्योंकि उनके जितनी genetic डाइवर्सिटी किसी में नहीं।
Bantus में Han Chinese और North-Western Europeans की तुलना में कहीं ज्यादा heterozygosity (यानी genetic diversity) होती है, फिर भी Han Chinese और NW Europeans के genes बेहतर माने जाते हैं। उन्होंने अधिक उन्नत सभ्यताएँ बनाई हैं, विकसित समाज खड़े किए हैं, उनका IQ ज्यादा माना जाता है, और वे engineering तथा warfare में भी आगे रहे हैं।
जिस "DNA upgrade" की बात की जाती है, वह असल में outbreeding depression की ओर ले जाता है। यह बताने की जरूरत नहीं कि European-African hybrids का प्रदर्शन pure Europeans से कमजोर होता है, बल्कि North East Asian x European hybrids भी उतने स्वस्थ नहीं होते।
अगर hybrid संतान सच में बेहतर होती, तो यह सब सच नहीं होता:
1. Biracial Asian Americans are twice as likely as monoracial Asian Americans to have been diagnosed with a psychological disorder, UC Davis researchers report.
https://archive.is/nKEFO#selection-509.0-509.157 2. Some malformation phenotypes appear to vary in their risk based on mixed racial-ethnic groupings. https://archive.is/5kPn1
3. Mixed couples face higher odds of prematurity and low birth weight, which appear to contributeto the substantially higher demonstrated risk for stillbirth. https://archive.is/gyKM6
4. Mixed adolescents showed higher risk when compared with single-race adolescents on general health questions, school experience, smoking and drinking, and other risk variables.
5. Mixed patients struggle to find marrow donors. https://archive.is/ItFpE
6. Mixed couples face distinct pregnancy risks, Stanford/Packard study finds med.stanford.edu
Post credit by jat_sarvkhap






Wednesday, 1 April 2026

नख-वख कुछ नहीं होता है; राजपूत राजाओं के इशारों पर, भाटों ने तुम्हारे अनपढ़ पुरखों का faddu काट दिया।

नख-वख कुछ नहीं होता है; राजपूत राजाओं के इशारों पर, भाटों ने तुम्हारे अनपढ़ पुरखों का faddu काट दिया।

वैसे तुम तो तुम्हारे अनपढ़ पुरखों से भी अधिक अनपढ़ हो, इसीलिए तुमने नखों की कहानियों के आधार पर अपनी झूठी कुलदेवियाँ खोजनी शुरू कर दी।

वैसे “नख” क्या होता है?

राजपूत जाति की सामाजिक सरंचना सात पदानुक्रमों में बंटी हुई है:

१) *जाति* : राजपूत

२) *वंश* : सूर्यवंश, चंद्रवंश, ऋषिवंश, अग्निवंश, नागवंश

३) *कुल* : छत्तीस कुल, जिनकी वास्तविक संख्या अठतरह से ऊपर है (बिंगले)

४) *साख* : प्रत्येक राजपूत कुल कई साखों में बँटा हुआ है

५) *गोत्र* : प्रत्येक राजपूत साख का एक ऋषिगोत्र होता है

६) *खाँप* : प्रत्येक राजपूत साख कई खाँपों में बँटा हुआ है

७) *नख* : प्रत्येक राजपूत खाँप कई नखों में बँटी हुई है

अब आपको एक उदाहरण देता हूँ:

जयमल मेड़तिया का पूरा नाम इस प्रकार लिखा गया: जयमल, राजपूत (जाति), सूर्यवंशी (वंश), राठौड़ (कुल), कामधज (साख), गोतम (गोत्र), मेड़तिया (खाँप), विरमदेवोत (नख)।

तो फिर अन्य जातियों के नख कैसे हुए? - भाट की बही में कहानी इस प्रकार के टेम्पलेट में लिखी हुई है: एक बार एक राजपूत था, उसने किसी पराई जाति की महिला का डोला लूट लिया। उस महिला से होने वाली संतानें अपनी माता की जाति में शामिल हो गए। माता की जाति में क्यों? क्योंकि हिन्दू शास्त्रों में प्रतिलोम विवाह अमान्य है, इसीलिए वो राजपूत उस महिला को पत्नी का दर्ज़ा नहीं दे सकता था, इसीलिए वो महिला उसकी रखैल मात्र थी। रखैल की संतानें अपनी माता की जाति में ही शामिल हो सकती हैं।

कभी नॉर्मन ज़िगलर, रिचर्ड सरन इत्यादि को पढ़ो। कभी नैणसी की ख्यात और विगत पढ़ो। कुञ्जियों को पढ़ने से कुछ नहीं समझ आएगा। - Shivatva Beniwal