Note--जाटो अगर ये पोस्ट मिस करदी तो सब कुछ मिस कर दोगे, फेसबुक के इतिहास में सबसे बड़ी सच्चाई खोज कर लाया हूँ सबूत समेत,
Sanjrann (सांजरण)
अपने कल्चर के मूल्यांकन का अधिकार दूसरों को मत लेने दो अर्थात अपने आईडिया, अपनी सभ्यता और अपने कल्चर के खसम बनो, जमाई नहीं!
Sunday, 19 April 2026
जाटो का इतिहास राजपूतो ने कैसे अपना बनाया!
Wednesday, 15 April 2026
गीता प्रेस गोरखपुर के द्वारा छापी गई रामचरित मानस के दोहे
गीता प्रेस गोरखपुर के द्वारा छापी गई रामचरित मानस के दोहे
"शुद्र ग्वार ढोल और नारी
ये सब ताड़ना के अधिकारी "
के ताड़ना शब्द का अर्थ 1925 में 'दण्ड" व 2025 में "शिक्षा " क्यों और कैसे हो गया?
Monday, 13 April 2026
यहूदी कयामत तक भटकते ही रहेंगे!
यहूदी कयामत तक भटकते ही रहेंगे इनको कोई अपनी जमीन में रहने नही देगा ये इतने नाशुर हे जहा भी रहे हे इन्होंने उत्पात ही मचाया है!!
"चलीये देखते है यहूदियों ने 1000 वर्षों कितनी जंग जीती है ?? "
1080 में फ्रांस से भाग गए
1098 में चेक रिपब्लिक से भाग गए
1113 में क्यूवान रूस से बाग निकले ,
1113 ही में इनका कतले आम हुआ ,
1147 में एक बार फिर फ्रांस से निकल दिया गया ,
1171 में इटली से भाग गए ,
1188 में इंग्लैंड से निकल दिया गया
1198 में इंग्लैंड से भाग निकले ,
1290 इंग्लैंड से भाग निकले ,
1298 में स्विट्जरलैंड से भाग निकले जब 100 यहूदियों को फांसी दी गई ,
1306 में एक बार फिर फ्रांस से दे दखल किए गए ,300 यहूदियों को जिंदा जलाया गया ,
1360 में हंगरी से भाग निकले ,
1391 में स्पेन से निकाला गया 3000को फांसी 5000 को जिंदा जलाया गया ,
1394 में फ्रांस से एक बार फिर भाग निकले ,
1407 पोलैंड से भाग निकले ,
1492 में एक बार फिर स्पेन से भगाया गए इनके लिए हमेशा की पाबंदी लगाई गई ,
1492 में सिसली से बे दखल किया गया ,
1495 में लिथुआनिया से निकाले गए
1496 पुर्तगाल से भाग निकले ,
1510 में इंग्लैंड से भाग निकले ,
1516 में दुबारा पुर्तगाल सै निकल गए ,
1516 में सिसली में कानून बनाया गया यहूदी केवल यहूदी बस्तियों में ही रहेंगे ,
1524 में ऑस्ट्रिया से भाग निकले ,
1555 में फिर पुर्तगाल से भगाया गया ,
155 में रोम में कानून बना जिसमें इनको अपनी ही बस्तीयों में रहने की इजाजत मिली ,
1556 में इटली से निकले गए ,
1570 में जर्मनी से निकाल दिया गया ,
1629 में स्पेन और पुर्तगाल से भगाया गया ,
1634 में स्विट्जरलैंड से फिर भगाया गया ,
1655 में एक बार फिर स्विट्जरलैंड से भगाया ,1660 में कीफ से निकाला गया ,
1701 में स्विट्जरलैंड हमेशा के लिए निकाल दिया गया,
1806 में नेपोलियन का अल्टिमेटम,
1828 में कीफ से भाग निकले ,
1933 में जर्मनी से निकले वहां नस्ल कसी की गई इनकी ,
14 मई 1948 को फिलिस्तीन ने अपने मुल्क में यहूदियों को पनाह दी ,
इसके अलावा सबसे पहले रसूल अल्लाह ने खुद यहूदियों को शहर से निकाल दिया ,ये यहूदी की तारीख है जिसे आप खुद भी पढ़िए और दूसरों को भी शेयर कीजिए ,,ये दुनिया की अकेली ऐसी कौम है जो जमीन पर आलम ए इन्सानियत के नाम पर कलंक है !
Sunday, 12 April 2026
कणकां दी मुक गई वाखी, के ओ जट्टा आई वैसाखी!
इस कहावत में 'जट्ट' शब्द ही क्यों है, जानने हेतु अंत तक पढ़ें!
हरयाणी भाषा में 'मेख' व् पंजाबी भाषा में 'वैसाखी' की आप सभी को लख-लख बधाईयाँ!
जलियांवाला बाग़ शहीदी दिवस भी आज ही है - प्रणाम शहीदां नूं!
खालसा पंथ स्थापना दिवस आज भी ही है, अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस भी आज ही है - बधाई हो दोनों की!
और यही वजह है कि इस शीर्षक की कहावत में 'जट्ट' शब्द है; क्योंकि आपके मिसललैंड व् खापलैंड से बाहर जाते ही उदारवादी जमींदारा नहीं है; व् क्योंकि आपके पुरखे इस कांसेप्ट के संस्थापक-पोषक रहे; इससे उनकी 'आर्गेनिक-मार्केटिंग' हुई व् उससे उनकी यह आर्गेनिक ब्रांड बनी व् वह ऐसी कहावतों में ऑर्गेनिक्ली स्वीकृत हुए! आर्गेनिक यानि स्वत: गुण से सर्व द्वारा स्वीकार्य; कृत्रिम यानि manipulated नहीं कि जिसको खड़ा करने को propagandas लगें!
जय यौधेय! - फूल मलिक
जो अन्तर्जातीय विवाह को ये कहकर बेहतर बताते है कि ये diversity बढ़ा कर better genes देता है वो facts को manipulate कर रहे है
जो अन्तर्जातीय विवाह को ये कहकर बेहतर बताते है कि ये diversity बढ़ा कर better genes देता है वो facts को manipulate कर रहे है। genetic depression 2 तरह के होते है 1. ज्यादा नजदीक शादी करने से होने वाला inbreeding depression जिस से बचने के लिए हम गोत छोड़कर शादी करने की
Wednesday, 1 April 2026
नख-वख कुछ नहीं होता है; राजपूत राजाओं के इशारों पर, भाटों ने तुम्हारे अनपढ़ पुरखों का faddu काट दिया।
नख-वख कुछ नहीं होता है; राजपूत राजाओं के इशारों पर, भाटों ने तुम्हारे अनपढ़ पुरखों का faddu काट दिया।
वैसे तुम तो तुम्हारे अनपढ़ पुरखों से भी अधिक अनपढ़ हो, इसीलिए तुमने नखों की कहानियों के आधार पर अपनी झूठी कुलदेवियाँ खोजनी शुरू कर दी।
वैसे “नख” क्या होता है?
राजपूत जाति की सामाजिक सरंचना सात पदानुक्रमों में बंटी हुई है:
१) *जाति* : राजपूत
२) *वंश* : सूर्यवंश, चंद्रवंश, ऋषिवंश, अग्निवंश, नागवंश
३) *कुल* : छत्तीस कुल, जिनकी वास्तविक संख्या अठतरह से ऊपर है (बिंगले)
४) *साख* : प्रत्येक राजपूत कुल कई साखों में बँटा हुआ है
५) *गोत्र* : प्रत्येक राजपूत साख का एक ऋषिगोत्र होता है
६) *खाँप* : प्रत्येक राजपूत साख कई खाँपों में बँटा हुआ है
७) *नख* : प्रत्येक राजपूत खाँप कई नखों में बँटी हुई है
अब आपको एक उदाहरण देता हूँ:
जयमल मेड़तिया का पूरा नाम इस प्रकार लिखा गया: जयमल, राजपूत (जाति), सूर्यवंशी (वंश), राठौड़ (कुल), कामधज (साख), गोतम (गोत्र), मेड़तिया (खाँप), विरमदेवोत (नख)।
तो फिर अन्य जातियों के नख कैसे हुए? - भाट की बही में कहानी इस प्रकार के टेम्पलेट में लिखी हुई है: एक बार एक राजपूत था, उसने किसी पराई जाति की महिला का डोला लूट लिया। उस महिला से होने वाली संतानें अपनी माता की जाति में शामिल हो गए। माता की जाति में क्यों? क्योंकि हिन्दू शास्त्रों में प्रतिलोम विवाह अमान्य है, इसीलिए वो राजपूत उस महिला को पत्नी का दर्ज़ा नहीं दे सकता था, इसीलिए वो महिला उसकी रखैल मात्र थी। रखैल की संतानें अपनी माता की जाति में ही शामिल हो सकती हैं।
कभी नॉर्मन ज़िगलर, रिचर्ड सरन इत्यादि को पढ़ो। कभी नैणसी की ख्यात और विगत पढ़ो। कुञ्जियों को पढ़ने से कुछ नहीं समझ आएगा। - Shivatva Beniwal
Friday, 20 March 2026
हरियाणा की पहली विदेशी बहू महारानी ओलिव!
हरियाणा की पहली विदेशी बहू महारानी ओलिव
साल 1900 की साल थी। नाभा रेलवे स्टेशन पर स्कर्ट में एक विदेशी लडकी अपनी मां के साथ चहलकदमी कर रही थी और देखने वाले हर आंख उस पर टिक जाती थी। उस दौर में स्कर्ट पहने विदेश लडकी का यूं घुमना कम हैरानी वाला नहीं था और ऊपर से वो बला की खूबसूरती वाली विदेशी लडकी जो ठहरी।
उस लडकी का नाम था ओलिव और रेलवे स्टेशन पर वह अपनी मां मिसेज हॉर्डिंग और भाई ह्यूगेन मोनलिस्कय के साथ घूम रही थी। वो एक सर्कस कंपनी में काम करती थी जो देश दर देश अपना खेल दिखाते चले आ रहे थे।
उसी समय स्टेशन पर एक गाडी पहुंची और उसी गाडी में जींद स्पेशल के डिब्बे भी जुडे हुए थे। जींद स्पेशल मसूरी से आ रही थी और उसमें बैठे थे जींद के राजा रणबीर सिंह जो अपनी विशेष गाडी में राजधानी संगरूर लौट रहे थे।
राजा की नजर ओलिव पर पडी तो उन्होंने अपने कर्मचारियों को उनकी मौजूदगी के बारे में जानकारी लेने को कहा। सर्कस की जानकारी मिलने पर राजा ने सर्कस को संगरूर आकर अपने करतब दिखाने का मौका दिया।
जल्द ही सर्कस पार्टी संगरूर पहुंची और सर्कस ने एक अनोखा करतब दिखाया जो उस समय किसी ने ना देखा था और ना सुना था। आजकल को हॉट एयर बैलून सबने देखे हैं लेकिन 1900 में ऐसे करतब भला किसने देखे होंगे। गुब्बारा आसान में उठा और उसमें खडी ओलिव को हाथ हिलाते देख न केवल पूरे संगरूर की जनता बल्कि राजा रणबीर सिंह का मन भी हवा भी उड चला।
पांच छह मील दूर जंगल में वह गुब्बारा गिरा तो महाराजा के घुडसवारों ने जमीन पर गिरने से पहले ही ओलिव को थाम लिया। राजा ने बहुत सारे इनाम दिए और इसके साथ ही ओलिव की मां को एक पेशकश भी कर दी कि उस लडकी का विवाह उनसे कर दिया जाए। एक इकरारनामा लिखा गया और वो ओलिव के पास ही रखा गया।
शादी की रस्म अदा की जा रही थी जब मुख्यमंत्री मिर्जा उमराव बेग और सरदार शमशेर सिंह जैसे अधिकारियों ने इससे दूर रहना ही उचित समझा। रात को सिक्ख रीति रिवाजों से विवाह संपन्न हुआ और रानी का नाम रखा गया ओलिव जसवंत कौर। शादी तोपों ने दुनिया को बता दिया कि राजा रणवीर सिंह ने शादी कर ली है।
ओलिव की मां और भाई ने सर्कस की नौकरी छोड दी ओर राजमहल की ऐशोआराम की जिंदगी जीना शुरू कर दी। ओलिव के भाई को राजा ने अपना निजी सचिव बना लिया। ओलिव से 5 सितंबर 1901 को एक बेटा भी हुआ था जो छह महीने का होकर चल बसा। एक फरवरी 1904 को रानी ओलिव ने एक पुत्री को जन्म दिया और उसका नाम रखा गया डौरोथी। इसी के नाम पर दादरी में एक राजकीय इमारत का नाम डौरोथी विला रखा गया जो आजकल शायद गेस्ट हाउस है दादरी में।
राजा ओलिव को दिलोजान से चाहते थे और इस दौरान अंग्रेस सरकार ने 1918 में युद्ध में राजा के योगदान को देखते हुए उनको राजेंद्र बहादुर का खिताब दिया दो तोप निजी और दो तोप पुश्तैनी में बढोतरी की गई। राजा रणबीर सिंह अब महाराजा बन चुके थे ओर औलिव महारानी।
हर दरबार के षडयंत्र महाराजा जींद के दरबार में भी चल रहे थे लेकिन किसी ने महाराजा को यह खबर पहुंचा दी कि महाराजा से विवाह होने से पहले ओलिव एक बार गर्भवती हुई थी और एक नाजायज बच्चे को भी जन्म दिया था। ये खबर जांच पडताल में सच निकली तो महाराजा का दिल टूट गया। वो इसको अपने अंदर पी गए लेकिन खिन्न रहने लगे और महारानी से जी उचाट हो गया।
इसी बीच उनकी मुलाकात कुमाऊं की एक पंद्रह साल की बाला से करवाई गई जो बहुत बुद्धिमान और व्यवहारकुशल थी। पांच फरवरी 1917 को महाराजा रणबीर सिंह ने उससे विवाह कर लिया और उसे नाम दिया गुरचरण कौर। शादी की रस्म रात को दादरी में नवाब बहादुरजंग खां के किले के दीवानखाने में हुई। उस समय महारानी ओलिव अपनी पुत्री डौरोथी के संग डौरोथी विले के ड्राइंगरू में बैठी थी और अपने बेटी को बता रही थी आज एक नई महारानी आ रही है। इसी के साथ दोनों के दिलों में दूरियां भी बठती रही।
1921 की गर्मियों में महाराजा दोनों महारानियों व बच्चों के साथ विदेश में छुट्टियां मनाने गए। छोटी महारानी तब तब दो राजकुमारियों और एक राजकुमार को जन्म दे चुकी थी। कुछ अंग्रेज महाराजा से मिलने आए तो उन्होंने ओलिव से दूसरी महारानी के बारे में पूछा तो ओलिव ने कहा कि वह महाराजा की रखैल है। बस ये लडाई इतनी बढी कि महाराजा और महारानी को हमेशा के लिए विदा होना पडा।
ओलिव इंग्लैंड में ही रही उसके खर्च (प्रिवी पर्स) का हिस्से उसे इंग्लैंड के एक बैंक में हर महीने मिलता रहा। जब तक वह जीवित रही वह उसे निकलवाती रही और बहुत आराम की जिंदगी 1954 में आखिरी सांस तक उसने जी।
डारौथी को महाराज अपने साथ भारत ले आए थे। समय आने पर उसका विवाह कर दिया लेकिन डारौथी ने जो गुल खिलाए उनका जिक्र करेंगे राजा रणबीर सिंह की रूह को भी अशांति प्राप्त होगी।
खैर ये थी महाराजा रणबीर सिंह और महारानी ओलिव की प्रेम और अलगाव की कहानी। चूंकि जींद रियासत की बहू थी महारानी ओलिव तो उनको पहली विदेशी बहू का दर्जा भी दिया जा सकता है, आजकल एक सीरियल भी चल रहा है विदेशी बहू।
अप्रैल 1997 के हरियाणा संवाद में यह लेख राव विजय प्रकाश सिंह ने प्रकाशि करवाया था
Tuesday, 3 March 2026
Feb 2016 Haryana Riots: इस केस के कुछ तथ्य है जिन्हें आज तक छुपाया जा रहा है। कुछ तथ्य इस प्रकार है
- ये कोई नहीं बताता 35+1 का नारा किसने दिया। ये किसकी दिमाग़ की पैदावार है। 35 कौन थे और 1 कौन?
- धारा 144 लगी होने के बावजूद भिवानी स्टैंड पर सैंकड़ों प्रदशनकारियों को जिन के हाथों में 35+1 ki तख्ती थी और एक रेहड़ी जिसमे पत्थर थे क्यों इकट्ठे होने दिए।
- वो प्रदर्शनकारी पुलिस के संरक्षण जिसमे DSP भी था कोर्ट तक आए। किसलिए।
- बाहर JNU की माँग पर वकील धरने पर बैठे थे उन पर पुलिस की हाज़री के हमला किया। पुलिस चुप क्यों रही।
- NRS कॉलेज और जाट कॉलेज के हॉस्टल से बच्चों को निकाल कर क्यों पूता गया और उनको इलाज देने से भी मना कर दिया।
- सबसे पहली गोली आईजी की कोठी पर चली और बच्चे की मौत हुई। उसको क्यों छुपाया गया।
- कैप्टन अभिमन्यु की कोठी पर 22 पुलिस कर्मियों की सशस्त्र टुकड़ी भेजी गई थी उसको कोठी पर हमले से एन पहले किसके आदेश पर वापिस बुलाया गया और आग लगाने वालों को सुविधा और संरक्षण किसने दिलवाया।
- सुदीप कलकल को इस केस में अभियुक्त बनाया गया जबकि वो कैप्टेन अभिमन्यु की कोठी को बचाने में था और उसके साथ वहाँ मार पिटाई भी हुई। सुदीप ने इस वक्त के DC को लगातार फ़ोन करके पुलिस और फायर ब्रिगेड भेजने की गुहार लगायी लेकिन डीसी बहेरा ने कहा तो क्या “गोली मरवा दे क्या” ये कॉल रिकॉर्डेड है। ऐसा एक DC ने क्यों कहा?
- हरियाणा में सरकारी तौर पर कॉल रिकॉर्डिंग की एक कंपनी है जो तीन साल तक की कॉल रिकॉर्डिंग्स रख सकती है। उस समय के IG CID Rao ने January 2016 से June 2016 तक की रिकॉर्डिंग्स क्यों नष्ट करवायी जबकि हाई कोर्ट तक में केस चल रहे थे। ये झा कमीशन की गवाही में दर्ज है और Rao इस का उत्तर नही दे पाये।
- पुलिस ने तथाकथित संदिग्धों की कॉल रिकॉर्डिंग फ़रवरी में करनी शुरू कर दी थी। हर रिकॉर्डिंग के लिए ग्रह मंत्रालय भारत से अनुमति लेनी होती है।हरियाणा में रिकॉर्डिंग तो हुई जनवरी में और अनुमति आई मार्च में। ये धांधली किस लिए।
- भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर जब एक उंगली उठती है तो तीन उंगली के साथ अंगूठा सरकार की तरफ़ उठता है।
- झा कमीशन की कार्यवाही समाप्त हुए पाँच साल से ज़्यादा हो चुके। क्यों अपना फ़ैसला नहीं सुना रहा। कुछ सवाल उठे है वहाँ जिनका जवाब नहीं है और इसीलिए उस रिपोर्ट पर बैठे हैं और सरकारी पैसे पर ऐश कर रहे हैं।
- पुर्व डीजीपी प्रकाश सिंह आयोग कि रिपोर्ट सार्वजनिक करने से क्यों डर रहीं हैं भाजपा सरकार, जबकि ये आयोग खुद सरकार ने बनाया था ।।
Monday, 9 February 2026
दादा घासीराम मलिक और चौधरी छोटूराम!
गठवाला खाप एकता का सबूत !!दादा घासीराम मलिक और चौधरी छोटूराम के आपस में घनिष्ठ संबंध थे।19 फरवरी 1868 को दादा घासीराम हुए,1881 में चौधरी छोटूराम पैदा हुए थे दादा घासीराम 13 साल बड़े थे ,उम्र में बड़े सर फजले हुसैन,सेठ छाजुराम लांबा,दादा घासीराम मलिक को चौधरी छोटूराम काका जी(चाचा जी) कहा करते थे। चौधरी साहब को नेता बनाने दादा घासी का बड़ा सहयोग था,वो सोनीपत में आयोजित लाख की भीड़ वाली धन्यवादी पंचायत थी जब पंजाब सूबे में यूनियनिस्ट पार्टी भारी बहुमत से विजई घोषित हुई थी चौधरी छोटूराम भी चुनाव जीत गए थे इस अवसर पर गठवाला खाप ने सोनीपत जिले में किसानों की ओर सम्मानित करने के लिए लगभग सभी जीते हुए उम्मीदवारों को बुलाया था,लाहौर से प्रधानमंत्री सर चौ फ़जले हुसैन (तिवाना मलिक)मुख्य अतिथि के रूप में पधारे।वे पंचायत में आ तो गए थे लेकिन उनका मन आशंकित,संशय, पसोपोस में था कहीं कोई ऐसी वैसी बात ना हो जाए जिससे नई नई यूनियनिस्ट पार्टी या उनकी छवि को नुकसान हो,ऊपर से कुछ कोस पर दिल्ली अंग्रेज वायसराय भी बैठा पंचायत पर अपनी पैनी नजर गड़ाए हुए था उसने डीसी सहित प्रशासन को हाई अलर्ट मोड पर रख दिया था ऐसे में खुशी के साथ साथ आयोजन की सफलता को ले कर तनाव की स्थिति बन चुकी थी मानो पूरे देश की निगाह इस पंचायत पर टिकी थी।जैसे जैसे आयोजन तिथि का समय नजदीक आता गया सरगर्मियां तेज हो गई सबमें यही कौतूहल था कि देखो अब क्या होता है,दादा घासीराम मलिक बेशक कम पढ़े लिखे थे मगर वे बहुत ही कढ़े हुए व्यक्तित्व थे।उन्होंने धैर्य से काम लिया और सबसे पहले सोनीपत पुराने रोहतक की सभी खापों को भी शामिल होने का आह्वान किया,नतीजे में दहिया,खत्री,अंतिल,हुड्डा सहित छोटी बड़ी सभी खापों के चौधरी भी सक्रिय हो चले। गठवालो ने भी अपनी अपनी ड्यूटियां बांट ली,हजारों बिछाने वाले खरड़,दरीयां,शामियाने इकट्ठा किए गए।लाखों आदमियों के भोजन के लिए क्विंटलों अनाज,दूध,घी इकट्ठा किया गया लगभग हर कुढ़ी,हर ढोले ,हर घर ने स्वेच्छा से अपना सहयोग किया। हजारों हुक्का पानी पात सहित जमा किए गए।लगभग 500 हलवाई,दस हजार कार्यकर्ता रहे होंगे जिन्होंने युद्ध स्तर की तैयारियों के बीच दिन रात कड़ी मेहनत से मोर्चा संभाला।आने वाले हर दस व्यक्तियों पर सेवा पानी के लिए एक आदमी तैनात था। गठवाला खाप की समस्त सरदारी, तपे, थांबे का आर्थिक ब्योंत इतना था कि बाहर वाले से किसी से कोई मदद नहीं ली गई।पंचायत का दिन आया तो सबको खाना खिला कर पंचायत शुरू हुई अध्यक्षता खुद दादा घासीराम कर रहे थे उनका निर्देश लेने के लिए सैकड़ों युवा करबद्ध खड़े थे जो दादा के आंख के इशारे को तुरंत पढ़ लेते और जो भी कमी रहती पूरा कर देते।आम पंचायत की जगह मंच को D की तरह बनाया गया था जो लगभग 12/15 फुट ऊंचा था सैकड़ों बड़े बड़े धुत्तू लाउडस्पीकर लगे हुए थे पंचायत की भीड़ बिल्कुल शांत,एकचित,अनुशासित थी क्योंकि दादा जी ने कह दिया था कि यह पंचायत आप लोगों की है आपके लिए ही है इसीलिए अनुशासन की जिम्मेवारी भी आप सभी की है।पूरे मान सम्मान के साथ दोपहर बाद तक सभी वक्ता बोले,प्रधानमंत्री फजले हुसैन व चौधरी छोटूराम सहित सभी गणमान्यों को ऊंट घोड़े हाथियों ढोल नगाड़ों के साथ खुले रथ पर बैठा कर लाया गया मांग व प्रस्ताव दिए गए,शांति से पंचायत चली अब *अंत में बोलने की बारी वयोवृद्ध फजले हुसैन की आई जिनका रुतबा की शहंशाह से कम नहीं था,जब वे बोलने लगे तो बोला नहीं गया गला रुंध गया,भावनाएं उमड़ पड़ी और उनकी आंखों से झर झर नीर बहने लगा तभी उनको पानी दिया गया और संयमित हो कर बोले मैं तो पूरे पंजाब में अपनी दाढ़ी को बड़ी मानता था लेकिन महानता के काम में लगी हुई मेरे से बड़ी एक नहीं तीन तीन दाढ़ियां यह पंचायत में बैठी हैं पहली दाढ़ी दादा घासीराम की दूसरी कप्तान टोडर सिंह मलिक की जिसने ये व्यवस्था संभाली तीसरी भगत फूल सिंह मलिक की जिन्होंने इस पंचायत को इतिहास में अमर कर दिया वास्तव में जैसा सुना था उससे कई गुना पाया।लोगों बोलो मैं तुम्हारा क्या काम करूं?तब दादा घासी राम ने कहा था कि म्हारे छोटू को मंत्री बना दे फेर काम तो हम आप ही इससे कढ़वा लेंगे,फजले हुसैन ने तब पहले चौधरी छोटूराम को कश्मीर का प्रधानमंत्री बनाने की बात कही इस पर लोगों की भावनाएं देख चौ छोटूराम ने हाथ हिला कर इनकार कर दिया इसके बाद उन्होंने चौधरी छोटूराम को पंजाब का माल मंत्री घोषित कर दिया और बोले लाहौर आ कर शपथ ले कर अपना काम संभाल ले और फटाफट इन किसानों की सारी मांगे मान कर अपना किया वायदा पूरा कर।मलिकों की अगुवाई की इस पंचायत ने ही चौधरी छोटूराम को नया आयाम स्थापित करने में मदद की।मेरे प्रिय साथियों आज देश आजाद है किसानों की कितनी मांगे आजाद भारत की सरकारें पूरा कर रही हैं यह आपको अच्छी तरह पता है ऐसी बेकद्री कभी नहीं देखी लेकिन इतिहास गवाह है चौधरी छोटूराम के समय में किसी किसान ने भूख हड़ताल, अनशन, आंदोलन, मार्च तो दूर मांगपत्र भी नहीं दिया यहां तक कि किसान अपने खेत खलिहान घर से बाहर भी नहीं निकला था सिर्फ अपनी अंतर्रात्मा की आवाज पर किसान का बेटा होने के नाते दर्द समझ कर एक नहीं पूरे 29 कानून बना डाले उसको पूरा हक दे दिया। यहां तक कि किसान के गेहूं का दाम बढ़वाने को ले कर वायसराय तक से भिड़ गया।ऐसी सोच के पीछे उनके साथ सहयोगी रहे दादा घासीराम मलिक का परामर्श बड़ा काम आया था।इसीलिए तो आज हम कहते हैं इस धरती पे फेर दुबारा पैदा चौधरी छोटूराम घासी राम करदे। इतिहास से जुड़ी पोस्ट अच्छी लगे तो ना जानने वाले भाइयों को जरूर शेयर करना मत भूलना।
आपका प्रिय जसबीर सिंह मलिक
Tuesday, 20 January 2026
मारवाड़ आँचल में जाट के बिना ब्राह्मण, राजपुरोहित और राजपूत लड़कियों का विवाह अधूरा हैं!
बहुत सारे लोगों को इस बात की शायद ही जानकारी हो कि मारवाड़ आँचल में जाट के बिना ब्राह्मण, राजपुरोहित और राजपूत लड़कियों का विवाह अधूरा हैं।
Thursday, 8 January 2026
मात्र किसान शब्द सोच-समझ के इस्तेमाल किया करो!
मात्र किसान शब्द सोच-समझ के इस्तेमाल किया करो:
आज सर छोटूराम निर्वाण दिवस विशेष:
*सर छोटूराम को भी 'किसान मसीहा' नहीं अपितु 'दीनबंधु' व् 'जमींदारी-उत्थानक' तरीके से शब्द ज्यादा सूट करेंगे; वह कैसे यह नीचे समझें:*
क्योंकि एक तो आप जो वेस्ट-यूपी-हरयाणा-पंजाब-उत्तरी राजस्थान में जो खेती-बाड़ी वाले हो; आप सिर्फ किसान नहीं अपितु उसके साथ साथ जमींदार भी हो!
दूसरा इसलिए क्योंकि बिहार-बंगाल-उड़ीसा साइड 'किसान' उसको कहते हैं जो जमींदार के यहाँ हल चलाता है, उसकी बेगारी करता है| यानि वहां दोनों शब्द के अर्थ भिन्न हैं|
इसलिए वहां के जो प्रवासी यहाँ आ रहे हैं वह आपकी पूरी व् सही तस्वीर ले ही नहीं पा रहे हैं व् आपको सिर्फ किसान मान के, उनके वहां के सिस्टम-कल्चर वाला किसान मानते हैं|
और वहां ऐसा इसलिए है क्योंकि वहां है 'सामंती-जमींदारी' जो वर्णवाद पर आधारित होती है, जिसमें जमींदार सामंत होता है, जो अमूमन खुद खेत में काम नहीं करता अपितु उसके लिए किसान करता है व् वह डोळे/मैन्ड पे खड़ा हो के आदेश देता है बस|
जबकि आपके यहाँ ऐसा सिस्टम रहा ही नहीं अपितु आपके यहाँ आपके खाप-खेड़े-खेत के दर्शनशास्त्र में "उदारवादी जमींदारी" कल्चर रहा है; इसलिए आप सिर्फ किसान नहीं हो, उसके साथ साथ आप खुद ही जमींदार भी रहे हो!
अत: अपनी पहचान व् परिभाषा को सही-सही शब्द दीजिये!
वेस्ट-यूपी-हरयाणा-पंजाब-उत्तरी राजस्थान इस क्षेत्र को एकमुश्त शब्द में विनेश राणा भाई वाले शब्द सप्ताब से भी सम्बोधित कर सकते हो; यानि पांच आब पंजाब की व् दो आब गंगा-जमना यानि कुल सप्ताब!
जय यौधेय! - फूल मलिक
Saturday, 3 January 2026
वीर गोकुला का वास्तविक ग्राम: ब्रज क्षेत्र का तिलपत (तिल्हू) या हरियाणा का तिलपत?
वीर गोकुला का वास्तविक ग्राम: ब्रज क्षेत्र का तिलपत (तिल्हू) या हरियाणा का तिलपत?








