Wednesday, 21 August 2024

मामा की पुत्री से विवाह के उदाहरण!

 अर्जुन ने अपने मामा की लड़की सुभद्रा से विवाह किया जिससे उसका पुत्र अभिमन्यु पैदा हुआ। कुन्ती और सुभद्रा के पिता सगे भाई-बहन थे, दोनों शूरसेन की सन्तान थे। कुन्ती का वास्तविक नाम पृथा था, राजा कुन्तीभोज ने पिता शूरसेन से गोद लेने के कारण कुन्ती पड़ा। इसलिए तो अर्जुन को पार्थ कहा जाता है।

वासुदेव की दो पत्नियाँ थीं . रोहिणी और देवकी। रोहिणी की सन्तान बलराम और सुभद्रा थे जबकि देवकी की सन्तान कृष्ण थे।
अभिमन्यु ने अपनी माता सुभद्रा के सगे भाई अर्थात अपने सगे मामा बलराम की पुत्री वत्सला से विवाह किया। सुभद्रा और बलराम एक ही माँ रोहिणी और वासुदेव की सन्तान थे। अभिमन्यु की दो पत्नियाँ थीं - 1. उत्तरा(विराट नरेश की पुत्री) 2. वत्सला (बलराम की पुत्री)
श्रीकृष्ण के लड़के प्रद्युम्न का विवाह भी अपने मामा की लड़की रुक्मावती के साथ हुआ था।
श्रीकृष्ण के पोते अनिरुद्ध ने अपने मामा की लड़की रोचना से विवाह किया।
परीक्षत ने अपने सगे मामा राजा उत्तर(विराट नरेश के पुत्र) की लड़की इरावती से विवाह किया था।
सहदेव ने अपने सगे मामा द्युतिमान(शल्य के भाई) की बेटी विजया से विवाह किया।
बुद्ध धर्म के स्थापक,सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) का विवाह अपने सगे मामा सुप्पबुद्ध की लड़की यशोधरा से हुआ था।
बौद्ध राजा अजातशत्रु ने अपने सगे मामा प्रसेनजित को युद्ध में हराकर उनके बेटी वज्जिरा से जोर जबरदस्ती विवाह किया।
महावीर स्वामी ने अपनी पुत्री अनोज्जा(प्रियदर्शिनी) का विवाह सगी बहन सुदर्शना के पुत्र जमालि से किया।
महावीर स्वामी के सगे बड़े भाई नन्दिवर्धन का विवाह सगे मामा राजा चेटक की पुत्री ज्येष्ठा से हुआ। महावीर की माता त्रिशला और चेटक भाई बहन थे।
मौखरि वंश के राजा आदित्यवर्मा के पुत्र ईश्वरवर्मा का विवाह सगे मामा उत्तरगुप्त वंश के राजा हर्षगुप्त की पुत्री उपगुप्ता से हुआ।

Monday, 19 August 2024

विनेश सिर्फ वह खिलाडी नहीं है जो पेरिस में मैडल से चूकी हो!

किसी के भीतर का तथाकथित राष्ट्रवाद तो इसी बात के साथ खत्म हो जाता है, जब वह पेरिस ओलिंपिक जैसे स्टेज पे जा के देश का देश के झंडे का प्रतिनिधित्व करने वाली बेटी के भी विरुद्ध बोलने का जज्बा ढूंढ लाते हैं| क्या यह बात राष्ट्रवाद की परिभाषा में निहित नहीं होती कि कोई अगर आपके देश को एक इंटरनेशनल स्टेज पर रिप्रेजेंट कर रहा है तो वह आप समेत, हर एक देशवासी को रिप्रेजेंट कर रहा है? उसकी जीत में ख़ुशी व् उसकी हार में दुःख समेत उस खिलाडी को पुचाकरना-संभालना खुद को राष्ट्रवादी कहने का दम्भ भरने वाले की पहली भावना होनी चाहिए? अगर नहीं है तो ऐसे 'राष्ट्रवाद शब्द' को हाईजैक करके इसका अपने प्रोपेगंडा में इस्तेमाल करने वाले तमामों को फांसी पर टांग देना चाहिए| फांसी इसलिए कि पहले तो राष्ट्रवाद शब्द से चिपके क्यों और चिपकने के बाद उसी शब्द की परिभाषा के विरुद्ध व्यवहार करते हो? यह तक नहीं समझते कि जीते हुए से ज्यादा आपके हारे हुए भाई-बहन के साथ खड़ा होना होता है? इसको सीखने को कहीं आस्मां पे जाने की जरूरत नहीं है, बस सप्ताब (वेस्ट-यूपी, दिल्ली, हरयाणा, पंजाब, नार्थ-राजस्थान) के हर गाम-गली का कल्चर देख आओ जा के; शर्म करने लगोगे खुद को राष्ट्रवादी कहने पर| म्हारे पुरखे ऐसे नौसिखियों के लिए जो "उघाड़े" शब्द दे के गए हैं, वह गलत नहीं दे के गए| 


और विनेश सिर्फ वह खिलाडी नहीं है जो पेरिस में मैडल से चूकी हो, अपितु वह वो खिलाडी है जिसने स्पोर्ट्स-सिस्टम को सुधारने हेतु, दिल्ली के जंतर-मंत्र पर ठीक वैसे ही आवाजें उठाई जैसे इसके पुरखे उठाते आए| विनेश के कौम-कल्चर-किनशिप का इतिहास उठा के देख लो, सन 714 वाले मुहम्मद-बिन-कासिम से ले आज वाले मोदी-शाह के राज तक; कोई शताब्दी ऐसी नहीं मिलेगी, जब इस कौम-कल्चर-किनशिप ने तमाम शासकों को उनकी गलतियां ना दिखाई हो, व् ज्यादा अड़ियल को ना झुकाया हो| और यह जज्बा जा नहीं सकता, क्योंकि यह कौम-कल्चर-किनशिप से ले जेनेटिक्स तक से आता है| 


फूल मलिक

हमें गर्व हैं कि हमने हमारी पहलवान बेटी के लिए आन्दोलन किया

हमें गर्व हैं कि हमने हमारी पहलवान बेटी के लिए आन्दोलन किया, जिसने ओलंपिक्स में एक ही दिन में संसार की तीन धुरंधर पहलवानों को धूल चटाई। भले ही वो किसी कारण मेडल नहीं जीत पाई, पर उसने हमारा दिल जीता।

इसीलिए हमने उसका एक विजेता की तरह विराट स्वागत कर, उसको अहसास दिलाया कि मेडल तो मात्र टोकनिज़्म हैं। पर यदि किसी को लगता हैं कि विनेश का इतना भव्य स्वागत करना एक अपराध हैं, तो उसको मानसिक इलाज की आवश्यकता हैं।
अब मैं आपको बताता हूं कि सकारात्मक और नकारात्मक "जातिवाद" में क्या अंतर हैं:
गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां, डेरा सच्चा सौदा का प्रधान, श्री गंगानगर का जाट हैं, पर जब इस पर अपराधों—हत्या और ब्लातकार—में संलिप्त होने का आरोप लगा, तो किसी जाट ने इसका पक्ष नहीं लिया। उल्टे अन्य हिन्दुओं ने इसका पक्ष लिया, पर किसी जाट ने नहीं।
दूसरी ओर, वर्ष 2018 में जम्मू-कश्मीर राज्य के कठुआ में एक नन्हीं मुस्लिम लड़की का अपहरण, ब्लातकार और हत्या हुई, तो उन अपराधियों के पक्ष में जम्मू के राजपूतों और अन्य हिन्दुओं ने बड़े स्तर पर रैलियां निकाली।
इसी वर्ष में उत्तर प्रदेश के उन्नाव के कुलदीप सिंह सेंगर नामक एक एमएलए को एक नाबालिग लड़की का ब्लातकार करने के आरोप में जेल भेजा गया, तो उत्तर प्रदेश के राजपूतों ने कुलदीप सिंह सेंगर के पक्ष में रैलियां निकाली।
वर्ष 2020 में उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक दलित लड़की का ब्लातकार और हत्या हुई, तो राजपूतों ने आरोपियों के पक्ष में बड़े स्तर पर रैलियां आयोजित की, क्योंकि सारे आरोपी राजपूत जाति के थे।
इसके पश्चात् कुछ अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवानों ने कुश्ती संघ के प्रधान बृजभूषण शरण सिंह पर छेड़खानी का आरोप लगाया, तो लाखों राजपूतों ने बृजभूषण शरण सिंह के लिए आसमान ऊपर उठा दिया। हालांकि एक नाबालिग पहलवान तो स्वयं ही राजपूत थी, जिसने बृजभूषण पर छेड़खानी का आरोप लगाया।
यह ही अन्तर हैं जाटों के "जातिवाद" में और अन्य हिन्दुओं के "जातिवाद" में।

Shivatva Beniwal

सलुमण का मतलब

 सलुमण का मतलब आज 90साल से ऊपर एक बुजुर्ग ताई से पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि इसका मतलब है सावन का त्योहार जो रिश्तेदारियों में तीज पर सिंधारा,कोथली के बाद मनाया जाता था,बेटी बहन कभी भी शादी के तुरंत बाद आने वाले सामन में अपनी ससुराल न रुक कर अपने मायके रुका करती थी और अपनी पहचान बना सारा घर लीपा करती और एक तागा या ज्योत घर के आंगन,दहलीज,देहल,पशुओं के ठान या खेत में बने दो ईंटों के बीच बने दादा खेड़ा को पूजा करती और कहती हे मालिक आगे सुख राखिए,इस घर बार जहां मैने जन्म लिया उसकी मेर बनाए राखिए और बाबू,भाई घर के बड़े के एक तागा बांध दिया करती। कहीं कहीं आपस में इकट्ठी हो पिंग झूल लेती और देशी गीत गा लिया करती। चमासे में गुड तेल के गुलगुले,सुहाली खाने का अलग ही मजा था जो तीज वाले दिन या आगे पीछे बारिश आने में ज्यादा मात्रा में बना लिए जाते थे।कुल मिला कर सामन में सलूमण बहन भाई के संयुक्त परिवार के आनंद रंगचाह का दिन हुआ करता जो किसान परिवारों में हजारों वर्षों से इसके रीति रिवाज परंपराओं सभ्यता संस्कृति का प्रतीक रहता आया है,गांव में रक्षा बंधन आजादी के बाद ही आया है।भाई बहन का प्यार इसकी सबसे बड़ी खूबी है तो वहीं बहन बेटी के ससुराल के परिजनों द्वारा यह पूछा जाना कि बता थारे घर से रक्षा बंधन पर तुझे क्या क्या मिला?यह बुराई भी है जबकि एक बहन भाई से अपेक्षा तो रखती है मगर कभी भी लालच नहीं करती,भाई की आर्थिक स्थिति को वह सदा समझती है।अपने घर पर अपने मां बाप के जिंदा रहते पूरा अधिकार समझती है मगर मां बाप के चले जाने के बाद यह अधिकार भाभी की वजह से कम या ज्यादा हो जाता है।कुल मिला कर यह त्यौहार परिवारों को प्यार सहित जोड़े रखने का है इसका महत्व सावन माह से ही है,लेकिन आप सभी को पता है असल में नकल तो घुस ही पड़ी है।आप सभी भाई बहनों बड़े छोटों को यह त्यौहार मुबारक हो।


Thursday, 15 August 2024

कितना भाग्यवान व् शुभकारक है विनेश खेलों के सिस्टम व् देश के लिए कि देश में ना सही परन्तु ओलिंपिक के नियमों में बदलाव करवाने का कारक बनी!

विनेश को किस्मत की मारी, बेचारी आदि कहने बारे, थोड़ा ठीक-ठीक तोल के बोलेन, कहीं आपकी यह इतनी भावुकता आपकी बेटी को मूर्ख साबित ना कर दे! दुःख होना स्वाभाविक है, परन्तु उसको बुद्धि पे हावी करके भावुक हो के हताश होना कतई सही नहीं; वह क्यों नीचे पढ़ें| 


क्योंकि जो लड़की अप्रैल-2024 में बाक़ायदा ट्वीट करती है कि मेरे साथ धोखा हो सकता है, तो उसको इतनी तो नादाँ व् मूर्ख तो नहीं ही समझो कि किसी ऐसे व्यक्ति के हाथों कुछ भी खाने-पीने का ले लेगी, जिसपे उसको शक रहा होगा| व् ऐसे बना के प्रतीत करने लगे हो कि जैसे साजिशकर्ता इंडिया से ही पीछे पड़ लिए होंगे, व् उसने उनको स्पेस दे भी दिया होगा? इतनी नादाँ या मूर्ख मान रहे हो क्या अपनी बेटी को? ठीक-ठीक लगा लो| 


और ना ही मोदी एंड कंपनी को इतना ज्यादा शातिर व् तेज मानो कि सब उसकी स्क्रिप्ट से ही हो गया होगा| कहीं ना डंका बज रहा उसका कि उस लेवल पे जा के कोई ओलिंपिक का विदेशी अधिकारी उसके कहे से ऐसी साजिश कर देगा, हाँ देश वालों की गारंटी नहीं| तो कहीं तो अपने बालकों की अक्ल का भी हाथ ऊपर रखो| क्योंकि फाइनल में पहुंचने तक तो उसके साथ कोई गड़बड़ हुई नहीं, या कहो वह इतनी सतर्क थी कि होने नहीं दी| कितने ही तो डोप-टेस्ट्स से गुजरी होगी, स्क्रीनिंग से गुजरी होगी; तो इंडिया वाले उसको वहां तो किसी लेवल पर रोकने में कामयाब हुए नहीं, और ओलिंपिक में हो जाएंगे?


कई कह रहे हैं कि प्री-क्वार्टरफईनल में ही जापान वाली सबसे ताकतवर से भिड़वाना भी साजिश थी; इन कयासों को नकारात्मक डायरेक्शन में किस स्तर तक ले जाओगे; आप तो किसी ऐसी माँ की भांति व्यवहार करने लगे कि जैसे उसकी लाड़ली औलाद के लाड़ में वह इतना डूब जाती है कि उसके बच्चे को कुदरती तौर पर भी खरोंच आ जाए तो उसमें भी दिमाग में सिर्फ साजिशों के अम्बार बना बैठती है| 


प्री-क्वार्टरफईनल में सुसाकी भी तो किसी के बांटें आनी थी या वर्ल्ड-टॉप थी तो इसका मतलब यह तो नहीं था कि उसको सीधा फाइनल में ही भिड़ने आना था; या मोदी वहीँ से साजिश करवा चुका होगा, इतना भी डंका नहीं है या है? क्यास के अलावा इस बात का कोई तथ्यात्मक ठहराव है? नेगेटिव-पॉजिटिव का बैलेंस कीजिए किसी बिंदु पे तो| राऊटर-सिस्टम जैसा कुछ होता है उसके तहत आ गई वो विनेश के बांटे, पहली भिड़ंत में| 


दूसरा, ऊपर बता ही दिया; जिस तरीके से सचेत हो कर वह चल रही थी, तो क्या लगता है उसने ऐसे ही किसी के भी हाथ से कुछ भी ले के खा लिया होगा? या उसके विदेशी कोच ने कोई खाने की चीज उसके पास ऐसे ही फटकने दी होगी; एक बार को इंडियन-स्टाफ पे भरोसा नहीं भी करो तो? उसका पति तक साए की तरह उसके साथ था, तो इतना तो इर्दगिर्द का ध्यान उसने भी रखा होगा कि कम-से-कम खाने के जरिए कोई उसको गलत ना खिला जाए| 


हाँ, जहाँ मोदी, नीता अम्बानी व् पीटी ऊषा व् IAO को दोष देना है तो वह यह इंसिडेंट होने के बाद से शुरू होता है; वह चाहे उनके ब्यान रहे हों, मोदी का ट्वीट आने का वक्त व् मौका रहा हो, केस को कोर्ट में डालने में उनका गायब रहना रहा हो; वहां दोष रखो| इतना मत सब इनके ही पल्ले जड़ दो कि यह तो पता नहीं धरती के ऐसे कौनसे षड्यंत्रकारी हो गए कि एक भी दांव छोरी का कामयाब ना हुआ हो| ऐसा करके जाने कहो या अनजाने में आप विनेश को, उसके कोच को मंदबुद्धि मानने की दिशा में जा रहे हो; थाम्बो इसको यहीं, कण्ट्रोल करो अपनी भावनाओं को| और लड़की की बदकिस्मती की लकीर भी इतनी मत बढ़ाओ कि जैसे वह पहली भुग्तभोगी थी इस नियम की; वह जो 4-5 और पहले के भुग्तभोगी पहलवानों के भी तो ट्वीट्स व् मेसेज आए थे, जूरी उनसे भी तो डरी होगी कि इसको मैडल दिया तो फिर वो मोर्चा खोल के बैठेंगे, उनको भी मैडल देने होंगे| 


बल्कि विनेश को इस मामले में भाग्यशाली कहो कि इंडिया में जैसे वह सिस्टम ठीक करने को लड़ी, उसी भांति ओलिंपिक का भी सिस्टम ठीक करने का कारक बनी; जूरी ने कहा कि आगे कोई ऐसा केस आवे, उससे पहले ही यह नियम बदल लिए जावें| यह क्रेडिट दो अपनी बेटी को कि नेशनल हो या इंटरनेशनल स्तर वह दोनों जगह सिस्टम की खामियां उजागर करने का कारक तो बनी ही, इंटरनेशनल वाले को तो उसकी वजह से सुधारा भी जाने वाला है| हाँ यहाँ नेशनल वाले यानि मोदी गवर्नमेंट को कोस सकते हो कि ओलिंपिक बॉडी व् CAS से सीखे मोदी सरकार व् WFI हमारी पहलवान वहां के कानून बदलवाने में कामयाब हुई परन्तु अपने देश के ही ना बदलवा सकी; और वह भी 40 दिन धरने पे बैठ के ही नहीं अपितु तब से अब तक डेड साल होने को आया तब भी नहीं, जबकि CAS ने 7 दिन में ही किसी 'खाप-पंचायतों वाली एक ही सिटींग में न्याय कर देने की परम्परा' जैसे 7 दिन में ही केस का फैसला भी कर दिया, डेड साल के आगे 7 दिन तो एक ही सिटींग जितना ही मान सकते हैं? 


अत: मायूसी जरूर है; परन्तु उसको हताशा के स्तर तक बढ़ाने से बचें; 17 अगस्त को बेटी आ रही है इंडिया, उस दिन इतना हजूम खड़ा कर दो कि अगर कोई साजिशकर्ता वाकई में कामयाब हुआ भी होगा, तो उसको भी झटका लगे कि कैसा यह समाज है व् कैसा इनका कल्चर कि हम साजिश कर-कर थक गए परन्तु इनके हैं कि हौंसले डाउन के बजाए ऊपर-ही-ऊपर और ऊपर जाए-जाते हैं!


जय यौधेय! - फूल मलिक

Tuesday, 13 August 2024

Vinesh medal and IOA chief P T Usha stand

इस भाषण 👆का मतलब तो यही हुआ, कि जो राष्ट्रभक्ति का ठेका सिर्फ वचनों में उठाने वाले हैं; इनके कहे का उल्टा समझना चाहिए! कहाँ, इस आदमी का यह भाषण और कहाँ आज घर-आए-उए मेडल्स तक बचाने की बजाए; इन्हीं के शासन तले IOA की चीफ पीटी उषा यह कह के पल्ला झाड़ लेती है कि वजन बढ़ने-घटने की जिम्मेदारी खुद खिलाडी व् उसके कोच की होती है? और कोई उससे प्रतिउत्तर लेने वाला नहीं कि अगर ऐसा है तो फिर डाइटीशियन, फिसिओथिरेपिस्ट किसलिए भेजे जाते हैं, खिलाडियों के साथ?


खिलाडी का काम खेलना होता है व् कोच का काम उसको संबंधित खेल जैसे कि विनेश के मामले में कुश्ती; उसके दांव-पेंच सिखाने होते हैं| कोच का काम खिलाड़ी की डाइट में इतना तक ही हो सकता होगा कि वह अपने उस खेल बारे लाइफटाइम अनुभव से यह बता दे कि इसको यह खिलाओ, वह खिलाओ; परन्तु कितना व् कब खिलाओ; आखिर यह एक कोच की जिम्मेदारी कैसे हो सकती है? और हो सकती है तो फिर वही बात, यह डाइटीशियन व् फिसिओथिरेपिस्ट किसलिए भेजे जाते हैं साथ?


इन IOA वालों की रूल्स एंड रेगुलेशंस की बुक उठवा के एनालाइज की जाए, क्या-क्या क्लॉज हैं इनके व् क्या-क्या ड्यूटी हैं; ऐसे थोड़े ही कि झाड़ के पल्ला हुई एक तरफ खड़ी| वह भी राष्ट्रभक्ति का डंका पीटने वालों की सरकार में; यही राष्ट्रभक्ति है क्या कि देश का नाम बदनाम हो रहा है पेरिस जैसी इंटरनेशनल जगह पर व् यह लोग एक मिनट नहीं लगाते पल्ला-झाड़ने में?


जय यौधेय! - फूल मलिक




Thursday, 8 August 2024

आपकी सामलात की जमीनों के कानून पहले ही बदल चुके हैं, गामों के लाल-डोरे तोड़ दिए हैं; आप तो नहीं चुस्के, परन्तु मुस्लिम समाज चुस्का व् बचा ली अपनी जमीनें; आप पड़े रहो फंडियों की जागरण-कथाओं की अफीम सूंघ के! देखो नीचे कैसे:

 *आपकी सामलात की जमीनों के कानून पहले ही बदल चुके हैं, गामों के लाल-डोरे तोड़ दिए हैं; आप तो नहीं चुस्के, परन्तु मुस्लिम समाज चुस्का व् बचा ली अपनी जमीनें; आप पड़े रहो फंडियों की जागरण-कथाओं की अफीम सूंघ के! देखो नीचे कैसे:*


★ "वक़्फ़ संशोधन बिल" लोकसभा में पास नहीं हुआ... इस बिल का पास नहीं होना Pm नरेंद्र और आरएसएस गैंग की शिकस्त है..एक और शिकस्त..

◆ माहौल कुछ बनाया गया था कि "वक़्फ़ बोर्ड" ने ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर लिया है..तो फिर राज्य सरकारों और केंद्र सरकार में "वक़्फ़ मिनिस्टर" क्यों रखा है? वक़्फ़ तो सरकारी है..

👉 एक सवाल : अगर एक हिंदू अपनी ज़मीन किसी को हिंदू धर्म के लिए दान करता है तो क्या सरकार उस ज़मीन में "मुस्लिम ट्रस्टी" रखने देगी? 

👉 क्या सिखों की "गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (SGPC), बुद्ध/जैन मंदिर, पारसी मंदिरों में दूसरे धर्म के ट्रस्टी हो सकते हैं? 

👉 तो फिर एक मुस्लिम की धर्म के लिए दान की गई ज़मीन में "2 हिंदू ट्रस्टी" क्यों रहेंगे? कुछ तो शर्म रखनी चाहिए..

★ और वक़्फ़ की 9.4 लाख एकड़ के 70% हिस्से में मसाजिद, क़ब्रिस्तान, स्कूल, कॉलेज, मदरसे, यूनिवर्सिटी, लाइब्रेरी, यतीमख़ाने हैं..और ये ऑलरेडी सरकारी क़ब्ज़े में ही हैं..करना क्या चाहते थे?

◆ एक और सवाल : ये "2 हिंदू ट्रस्टी" कौन होंगे? RSS या अडानी-अम्बानी के लोग नहीं होंगे इस की क्या गारंटी है? और अगर RSS या अडानी-अम्बानी के लोग ट्रस्टी बनाए गए तो वक़्फ़ या'नि भारत की ज़मीनों का क्या होगा ये समझना बहुत आसान है!! आज के दिन अयोध्या में सेना की 13000 हजार एकड़ जमीन अडानी-रामदेव व् रविशंकर ढोलकापड़िये को पूज दी है, इसी से समझ जाईए इनकी मंशा

👉 और जिन्हें लगता है कि ये क़ानून सिर्फ़ वक़्फ़ के लिए है वो लोग "मा'सूम मूर्ख" हैं..ऐसा ही क़ानून दूसरे मज़हबों पर भी लागू कर देंगे..यही इन का रिकॉर्ड है.. कल को इसी कानून के तहत, तमाम *जाट शिक्षण संस्थाओं व् अन्य जातियों की भी ऐसी ही तमाम संस्थाओं की जमीन से ले आर्यसमाजी गुरुकुलों व् गौशालाओं की जमीन* RSS या अडानी-अम्बानी को चढ़ा देंगे तो कहाँ जाओगे?

● पहले रोज़ से मोदी की नज़र ज़मीन पर है..ज़मीन क़ानून, किसान क़ानून के बा'द यह मोदी की ज़मीनों पर क़ब्ज़ा करने की तीसरी कोशिश थी..आगे भी कोशिश जारी रहेगी..

● अगर विपक्ष मज़बूत रहा होता तो किसान कृषि बिल जैसे देश को बरबाद करने वाले क़ानून पास नहीं होते और नाही इतनी नफ़रत फैलती.. परन्तु आज विपक्ष मजबूत है तो रोक दिया है इस कानून को!

✋ भारत की 'अवाम का शुक्रिया कि मोदी की साज़िश को देर होने के बावजूद समझा और विपक्ष को मज़बूत बना दिया..देश में नफ़रत फैलाने और ज़मीन लूटने की सब से बड़ी साज़िश नाकामयाब हो गई..जय हिंद..


जय यौधेय! - फूल मलिक

Tuesday, 6 August 2024

बीजेपी सांसद रामचंद्र जांगड़ा को कोई यह आकंड़े दिखाओ!

 इस आदमी के नाम के आगे श्री या पीछे जी तो क्या ही लगाऊं, क्योंकि इसका काम नहीं ऐसा; जैसा इसने दो दिन पहले थर्ड-क्लास गंवारों वाला भाषण दिया है राज्यसभा में, वह भी अपनी ही होमस्टेट व् एथनिसिटी यानि हरयाणत का फूहड़ मजाक उठाते हुए|


एक मिथ का भी पर्दाफाश करता हुआ, यह आंकड़ा दिखाओ इस मोलड़ को| अक्सर फैलाया जाता है कि सबसे ज्यादा IAS बिहार-बंगाल से आते हैं, यहाँ तक कि गुजरात तक को यह माना जाता है कि वहां से भी ज्यादा IAS आते होंगे; परन्तु यहाँ तो आंकड़ा कुछ और ही कहता है; देखें सलंगित डाटा| सबसे ज्यादा जनसंख्या अनुपात में तो IAS दिल्ली-हरयाणा-पंजाब से आते हैं| बिहार से तो हरयाणा-पंजाब के आधे भी नहीं आते! बंगाल-गुजरात की हालत तो और खस्ता है| यानि स्पोर्ट्स-हब के साथ-साथ IAS हब भी हरयाणा-पंजाब ही हैं| यह ऐसा झूठ फैला के कोई मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जाता है क्या इन राज्यों वालों पे|

और इस दबाव बनवाने में खुद इन्हीं राज्यों के MP सबसे पहले ताल ठोंकते हैं; अभी दो दिन पहले BJP सांसद रामचंद्र जांगड़ा का हरयाणा बारे फूहड़ केटेगरी वाला थर्ड क्लास गँवारपणे से भरपूर भाषण तो सुना होगा? क्या मतलब इस जांगड़ा साहब में हरयाणवी-स्वाभिमान की ओंस भी कभी पास से नहीं निकली क्या; या इनको यह लगता है कि हरयाणवी का मतलब सिर्फ एक जाति है, हरयाणा का मजाक उड़ाओ तो उसको उड़ेगा; तुम्हारा कुछ नहीं उड़ेगा? समझाओ कोई ऐसे गंवारों को कि जन्मे-पले-बड़े तो तुम भी उसी स्टेट में हो; वह भी पीढ़ियों से! कोई शरणार्थी ऐसा गोबर फेंकता तो समझ भी आती; हरयाणा का मूल-निवासी होने के बाद; संसद जैसी जगह खड़ा हो के ऐसी बेहूदगी दिमाग में|

दो जोक्स सुनाए इसने, दोनों थर्ड क्लास, लगता है यह अपनी जिंदगी में ऐसी ही हरकतें करता रहा है|

जय यौधेय! - फूल मलिक




Saturday, 3 August 2024

Sports, Olympics, Medals and impact of DNA

 सुशील कुमार, विजेंद्र सिंह से ले मनू भाकर तक जाटों ने अपने डीएनए पर खुब गर्व करा , करें भी क्यों ना आखिर 150 करोड़ की जनसंख्या को इसी डीएनए ने मेडल दिलाये हैं।

बहुत सारे गैर जाट ये भी बोलते हैं,कि डीएनए वगैरह कुछ नहीं होता डीएनए से होता तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान में भी यही नस्ल रहती है ,वो भी मेडल जीत जानी चाहिए थी ।
पहला सवाल खङा होता है, क्या डीएनए से फर्क पड़ता है?
इस सवाल का जवाब देने से पहले मैं फिनलैंड के एक मशहूर ओलम्पियन ईरो मंत्यरांटा की बात करूंगा जो की स्कीयर थे , उन्होंने सात मेडल ओलम्पिक में जीते थे ।
उसके जीन की स्टडी में पाया गया की उसमें एक अलग ही Gene mutations पाया गया जो नोर्मल इंसान से 20% ज्यादा रेड ब्लड सेल्स प्रोड्यूस करता है और ये उसमें ही नहीं उसके कुणबे के 100-150 लोगों में पाया गया।
इससे होता क्या है, उसके बल्ड में ओक्सिजन कैरी करने की क्षमता डेढ़ गुणा बढ़ जाती है
आपने ‌उसेन बोल्ट वगैरह को देखा है,दौङते हुए तो....वो मुंह खोलकर उसकी सेप बदलते हुए दौङते हैं,इस प्रोसेस में वो एयर इनटेक बढ़ा देते हैं
सेल्युलर रेस्पिरेशन में ओक्सिजन ही है जो एनर्जी(ATP) प्रोड्यूस करती है l
मतलब ईरो मंत्यरांटा का शरीर आम एथलीट से ज्यादा एनर्जी प्रोड्यूस करता था, और इसका उसके मेडल जीतने में सबसे बड़ा योगदान रहा ।
इसलिए हां ,DNA से फर्क, बहुत फर्क पड़ता है,
आपका शरीर कितना absorb /डाइजेस्ट करेगा , कितने ग्लुकोज़ को ATP में कितना जल्दी कन्वर्ट करेगा इन सब चीजों में डीएनए का बहुत बड़ा योगदान रहता है ।
और गामङू कौमें लाईक जाट blessed हैं, इससे
अमेरिका, इंग्लैंड चीन बहुत मेडल जीतती हैं, मतलब उनका डीएनए जाटों से भी तकङा होगा फिर तो ?
तकङा होगा ये तो मैं नहीं कह सकता लेकिन इन देशों में genome editing नामकी टेक्नोलॉजी बहुत प्रचलित है, उससे ये बना जरूर सकते हैं, बहुत स्ट्रांग DNA ...
पीछले दो दशक में Genome doping भी इनके एथलीट्स में बहुत हुई है,और मेरा तो ये मानना है, ओलम्पिक का सो काल्ड लेजेंड माइकल फेल्प्स भी जीनोम डोपिंग का रिजल्ट था ।
पर पाकिस्तान अफगानिस्तान का ये डीएनए मेडल क्यों नहीं जीतता?
ओलंपिक के खेल ऐसे खेल हैंं, जिन्हें बहुत कम लोग देखते फोलो करते हैं, पाकिस्तान अफगानिस्तान में तो ना के बराबर ...बिना देखे ,बिना फोलो करे ,बिना खेले ...कभी मेडल आ सकते हैं?
इवन भारत में भी ऐसी ही हालत है, JIO cinema फोन करके मनू भाकर की मां को बोलता है,आप मैच देखो मनू का ... ताकि माहौल बने की देश ऐसे टकटकी लगाये था।
देश की 1% से भी कम जनसंख्या को इन ओलम्पिक को देखती है,और खेलने वाले तो और भी कम।
चाइना में आर्मी की स्नाइपर शुटिंग कम्पिटीशन हुई थी , पाकिस्तान एक नम्बर पर आया था वहां ...तो ऐसा नहीं है,कि वो लोग नहीं जीत सकते मेडल।
भारत में ओलम्पिक देखने खेलने वालों से ज्यादा पबजी की ओडियंस है,और ये हकीकत है,
मनू भाकर के दो दो ओलम्पिक मेडल जीतने के बाद भी एक मिलियन फोलोवर्स नहीं हो पाये जबकि पबजी ,फ्री फायर खेलने वाले प्लेयर्स के 10-10 ,20-20 मिलियन फोलोवर्स हैं।
क्या भारत में कभी ये खेल लोकप्रिय हो पायेंगे ?
मेरे को तो लगता नहीं , हां भविष्य के ओलम्पिक में eSports पबजी जैसे शामिल करने ही होंगे अगर बिजनेस लोबिज को भारत जैसा करोङों युवाओं के देश को एक्सपलोइट करना है,और ओलम्पिक का फेन बनाना है।
बहुत सारे परिवार आज ओलम्पिक के नाम पर बेची गयी इन कहानियों के सहारे अपने बच्चों का कैरियर भी इसमें देख रहे हैं,और मेहनत भी कर रहे हैं, अपनी जिंदगी की क़ीमती वस्तुएं ,समय सब इसके लिए दांव पर लगा दे रहे हैं ।
लगाना कोई बुरी बात नहीं है,आप कोई ग़लत काम नहीं कर रहे ,आप एक सच्चे जीवन के साथ ,सच्ची मेहनत कर रहे हो ...मेरा सेल्युट है,आपको ।
लेकिन क्या आपको मालूम है, ये खेल इंडिया जैसे देशों के लिए नहीं हैं,तुम जो आज मेहनत कर रहे हो वो तीस चालीस पहले उस फेज से गुजर चुके हैं , अब वो genetic screening , genome doping ना जाने कैसे टेक्नोलॉजी के साथ हैं,और तुम हो मात्र खुद के साथ ...
कार के साथ आदमी की रेस करवाने जैसा हो जायेगा भविष्य में ऐसै ही Genome sequencing, doping चलती रही तो ....
अब देख लो आपको किसके साथ फाइट करना है ।
हो सकता है ,भविष्य में इंडियन सरकार भी इन सब पर ध्यान दे और क्या पता बाहर की मेडिकल लोबिज इंडिया में भी ये टेक्नोलॉजी बेचें तो आप भी उनके साथ टक्कर में आ सकते हो वरना तो मुझे लगता नहीं ...
आज तुम देश से बाहर जाकर एक्सपर्ट्स की देख रेख में जो डोपिंग कर रहे हो ...वो वो‌ लोग काफी पहले कर चुके हैं, अब genome doping तक पहुंच चुके हैं ,और हो सकता है जब अपने पास ये Genome doping आये तो वो और कुछ इजाद कर लें ।
रशिया ने इंडिया को मिग दिया तो वो उससे कयी जेनरेशन आगे के लङाकू विमान प्रयोग कर रहा था,जब तक चीन की तरह हम खुद का कुछ नहीं करेंगे तब तक यही आउटडेटेड टेक्नोलोजी लेते रहेंगे और धूल में लठ मारते रहेंगे ।
बाकी भारत का इन सो कॉल्ड देशों से मेडल का डिफरेंस नहीं है,इस टेक्नोलॉजी का ही डिफरेंस है।
अल्जीरिया की बोक्सर जिस पर पुरुष होने के इल्ज़ाम लगा रहे थे, उसमें भी इस प्रकार की टेक्नोलॉजी का ही कमाल था , अब आप सोचो उन्होंने तो नोर्मल डोपिंग वगैरह से हार्मोनल चेंज लाया है, gene doping जिसे तो पकङा ही ना जा सकता उससे तो क्या क्या नहीं हो सकता ?
हो भी रहा है, विकसित देश कर भी रहे हैं।
हमारे पास ह्यूमन रिसोर्सेज बहुत हैं, लेकिन वैसे एथलीट्स नहीं निकल सकते कभी भी ... क्योंकि नोर्मल सिचुएशन होती तो हो जाता लेकिन अब दौङ इंसान को ही रोबोट बनाने की तरफ बढ़ चुकी है ‌।
बाकी आज जो कौमें अपने डीएनए पर गर्व कर रही हैं,उनका कल बहुत माङा है, डीएनए बदला जा सकता है , वर्ल्ड लेवल पर डीएनए प्रोफाइलिंग , डिजिटल हेल्थ आईडी ये सब उसके लिए ही आ रही हैं ।
गामङू कौमों के लिए गोरवान्वित होने से ज्यादा जरूरी है ,उसका खराब होता खान पान , उसके खराब होते खेत व उसकी मार्केट पर बढ़ती डिपेंडेंसी, उसकी विलुप्त होती नेचुरल खेती ...व उसके टुटते परिवार समाज ...पर ध्यान दे ...एक मौका चाहिए तुम्हें तुच्छ घोषित करने का , तुम्हारे कल्चर को घटिया दिखाने का ।
मनू भाकर की मां जैसों के बहाने ये सबसे पहले तुम्हारे कल्चर पर ही अटैक करते हैं, तुम्हें धर्म व बाज़ार का गुलाम बनाना ही इस ब्रांड एंबेसडराई का काम होता है ।
बाकी बहुत सारे लोग आदी किसान को इंडू किचान तो किसी और आइडियोलॉजी को कुछ और बोलते हैं,
आओ साथ बैठो सारी आइडियोलॉजीज में क्या गाम समाज के लिए सबसे सही है ,उसको ले आगे बढ़लो ...ऐसे आपस में ही ओछी हरकत करने से कुछ नहीं होगा।

By: Vikram Singh Jat

Thursday, 1 August 2024

About some unique flamboyant displays of Opening Ceremony at Paris Olympics 2024!

This was perhaps the first time in Olympics History that its French organizers articulated a combined display of their artistic cultural show, side by making it an opening of a Olympic season or perhaps the vice-versa; but whichever way it all sounds thrilling and creative full of enthusiasm and immense zeal of proud and affection towards root Kinship. Some of these displays depicted French Cultural Legacy as below (pictures attached):

The headless woman: She was Queen Marie Antoinette. She ruled over France and was found guilty of treason, conspiracy, and stealing from the country.
The Last Supper: It was a depiction of an ancient Greek Bacchanal, well linking roots of Olympics to ancient Greek, the orginator of Olympics. A Bacchanalia is an uncontrollably promiscuous, extravagant, and loud party which often span several days, beleived to honour the creator of wine, Bacchus (the blue guy covered in grape vine). He is also known as Dionysus, the Greek god of fertility, later known as the god of wine and pleasure.
The Death of a Pale Horse: It was Sequana, Goddess of the Seine, the River in which the boat precession took place. She was meant to be the representation of the Olympic spirit and of Sequana.
Sounds crazy and spurious, no?
Phool Kumar


Tuesday, 30 July 2024

हरयाणवी त्यौहार-कल्चर-कस्टम का हिन्दीकरण करते हरयाणवीयों के लिए संदेश!

हरयाणवियों को अपने कल्चर-कस्टम्स को mold करके दूसरों को भी एडजस्ट होने की उदारता छोड़नी होगी; क्योंकि इससे हमारी शुद्धता कत्ल हो रही है व् हमारे कल्चर-कस्टम्स का हरयाणवीकरण बरकरार रखने की बजाए उनका हिन्दीकरण और हो जा रहा है:


1000 किलोमीटर दूर से आ के बिहारी दिल्ली-एनसीआर में छट मनाते हैं, क्या वो कभी इस चक्कर में कि तुम दिल्ली में हो बिहार में नहीं; उनके त्यौहार का हिन्दीकरण करते हैं? बिल्कुल नहीं वही 100 फीसदी भोजपुरी भाषा व् रिवाज के साथ मनाते हैं|

1500 किलोमीटर दूर से आ के बंगाली दिल्ली-एनसीआर में दुर्गा-पूजा मनाते हैं, क्या वो कभी इस चक्कर में कि तुम दिल्ली में हो बंगाल में नहीं; उनके त्यौहार का हिन्दीकरण करते हैं? बिल्कुल नहीं वही 100 फीसदी बंगाली भाषा व् रिवाज के साथ मनाते हैं| 

2000 किलोमीटर दूर से आ के मराठी-गुजराती दिल्ली-एनसीआर में क्रमश: गणेश-चतुर्थी व् डांडिया मनाते हैं, क्या वो कभी इस चक्कर में कि तुम दिल्ली में हो महाराष्ट्र-गुजरात में नहीं; उनके त्यौहारों का हिन्दीकरण करते हैं? बिल्कुल नहीं वही 100 फीसदी मराठी-गुजराती भाषा व् रिवाज के साथ मनाते हैं|

3000 किलोमीटर दूर से आ के तमिल-तेलुगु-मलयाली आदि दिल्ली-एनसीआर में क्रमश: उनके त्यौहार मनाते हैं, क्या वो कभी इस चक्कर में कि तुम दिल्ली में हो दक्षिण भारत में नहीं; उनके त्यौहारों का हिन्दीकरण करते हैं? बिल्कुल नहीं वही 100 फीसदी उनकी भाषा व् रिवाज के साथ मनाते हैं|

1947 में पाकिस्तान से आ के खापलैंड व् मिसललैंड पर बसने वाले अरोड़ा-खत्री दिल्ली-एनसीआर में उनके नवरात्रे व् करवाचौथ मनाते हैं, क्या वो कभी इस चक्कर में कि तुम दिल्ली में हो पाकिस्तान में नहीं; उनके त्यौहारों का हिन्दीकरण करते हैं? बिल्कुल नहीं वही 100 फीसदी उनकी भाषा व् रिवाज के साथ मनाते हैं|


तो फिर यह दिल्ली-एनसीआर के इन सबसे पुराने बाशिंदे यानि यहाँ के मूलनिवासी हरयाणवी; किस दिन यह बात समझेंगे कि तुम तो प्रवासी धरती पे भी नहीं हो; फिर तुम क्यों अपने त्योहारों का हिन्दीकरण करके उनके मूलस्वरूप का कत्ल करने पे तुले हो? त्यौहार-कल्चर-कस्टम वह होता है जिसके अनुसार आगंतुकों को ढलना होता है, आपको अपने त्यौहार-कल्चर-कस्टम का स्वरूप नहीं बिगाड़ना होता| यह गलती कर रहे हो, इसीलिए खटटर जैसे नौसिखिए भी 2015 में गोहाना के एक प्रोग्राम में "हरयाणवीयों को कंधे से नीचे मजबूत व् ऊपर कमजोर" के तंज मारते हैं; बावजूद इसके कि आप उनको अपने में समाहित करने को उदारता की ही अति कर देते हो; अपने त्यौहार-कल्चर-कस्टम का हिन्दीकरण तक कर डालते हो; फर्क पड़ता है उनको इससे; क्या आप छाप छोड़ पाते हो, उन पर अपनी; नहीं बल्कि उल्टा कंधों से ऊपर कमजोर होने का तमगा और ले बैठते हो| 


इसीलिए तो कहा गया है कि अति हर चीज की स्वघाती होती है; और यह ऊपर बताया किस्सा इसका सटीक उदाहरण है| Guts दिखाओ, इनकी भांति, अपने त्यौहार-कल्चर-कस्टम की शुद्धता पे टिके रहने की; वरना आज "कंधे से ऊपर कमजोर" के तंज झेल रहे हो, 35 बनाम 1 झेल रहे हो; कल को आपकी पीढ़ियों के लिए इससे भी भयावह स्तिथि दे के जाने वाले हो| 


जय यौद्धेय! - फूल मलिक 

Thursday, 25 July 2024

निडाणा गाम जिला जिंद/जींद को बसते हुए, आज 18 पीढ़ियां हो गई!

उदाहरण के तौर पर मेरे बड़े भतीजे से शुरू करके, म्हारे गाम को बसाने वाली पहली पीढ़ी तक पहुँचने पर ऐसे 18 पीढ़ियां बनती हैं:


अभिमन्यु सिंह मलिक > मनोज सिंह मलिक > रामेहर सिंह मलिक > दादा फ़तेह सिंह मलिक > दादा लछ्मण सिंह मलिक > दादा शादी सिंह मलिक > दादा गरधाला सिंह मलिक > दादा बख्शा सिंह मलिक > दादा दशोंदा सिंह मलिक > दादा थाम्बू सिंह मलिक > दादा समाकौर सिंह मलिक > दादा डोडा सिंह मलिक > दादा इंद्राज सिंह मलिक > दादा रातास सिंह मलिक > दादा सांजरण सिंह मलिक > दादा करारा सिंह मलिक > दादा रैचंद सिंह मलिक > दादा मंगोल सिंह मलिक

दादा मंगोल सिंह मलिक व् उनके साथ आए उनके सीरी भाई दादा मीला सिंह खटीक, मोखरा, महम चौबीसी से चल सन 1600 में न्यडाणा पर अपना खेड़ा बसाते हैं| उस वक्त जिंद/जींद में 4 रियासतें होती थी, जिनमें एक न्यडाणा/निडाणा थी; जो उस वक्त उज्जड़-खेड़ा था; जिसको फिर से इन दो दादाओं व् इनके साथ आए इनके परवारों ने बसाया था| मोखरा में दादा मंगोल से 4 माणस बिगड़ गए थे; आज भी मोखरा में इनके खंडहर हैं, जिसको निडाणा ढूंग बोला जाता है| दादा मंगोल को हुए दादा रैचंद, दादा रूपचंद व् दादा लाधू| दादा रैचंद ने निडाणा में ही बस के आगे यह गाम बसाया, दादा रूपचंद ने सीम लागता खेलगाम निडाणी में मलिक गौत जा बसाया व् दादा लाधू ने जिंद-रोहतक रोड पे स्थित गतौली में मलिक गौत जा बसाया|

दादा मंगोल के नाम से ही गाम में मंगोल-आळा जोहड़ है| दादा करारा को हुए दादा लखमीर के बेटे दादा बग्गा के नाम से गाम में बग्गा (बागा) आळा जोहड़ है| दादा लाधू के नाम से गाम में लाधू-आळा जोहड़ है|

जय यौधेय! - फूल मलिक

Monday, 22 July 2024

हरियाणा की सभी विधानसभा क्षेत्रों की 5 सबसे बड़ी जातियों के क्रमवार नाम!

 लोकसभा चुनाव को एक साल से भी कम समय रह गया है | इसलिए चारों ओर राजनीतिक पारा बढ़ता जा रहा है |हरियाणा भी इससे अछूता नहीं है क्योंकि लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद विधानसभा चुनाव होने हैं | इसलिए हरियाणा के सभी राजनीतिक दलों के नेता भी चुनावी गुणा-भाग में लग गए हैं | लेकिन किसी भी व्यक्ति को नेताओं का चुनावी गुणा भाग तब तक समझ नहीं आता जब तक वह सामाजिक समीकरणों की समझ नहीं रखता हो | कई बार व्यक्ति सामाजिक समीकरणों के गलत आंकड़ों के कारण राजनीतिक दलों की तिकड़म बाजी को नहीं समझ पाता या उसका सही अनुमान नहीं लगा पाता क्योंकि हमारे चारों तरफ गलत सूचनाओं और आंकड़ों का ढेर है | इसके अलावा सही सूचनाओं का अभाव भी है | इसलिए मैंने मन बनाया कि हरियाणा विधानसभा सीटों के जातीय आंकड़ों से संबंधित एक लेख लिखूं ताकि राजनीति में रुचि रखने वाले एक सही समझ बना सके |  इस लेख में तीन तरह के आंकड़े लिख रहा हूं |

       पहला हरियाणा की सभी विधानसभा क्षेत्रों की 5 सबसे बड़ी जातियों के क्रमवार नाम | 

       दूसरा कौन सी जाति कितने विधानसभा क्षेत्रों में संख्यात्मक रूप से पहले तथा दूसरे नंबर पर है |

       तीसरा हर विधानसभा क्षेत्र में संख्यात्मक रूप से पहले तथा दूसरे स्थान पर आने वाली जातियों का अधिकतम प्रतिशत कितना और किस विधानसभा क्षेत्र में है |


        पहला हरियाणा सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों के नाम व पांच सबसे बड़ी जातियों के क्रमानुसार नाम:-

1.कालका विधानसभा:- गुर्जर,ब्राह्मण,राजपूत,बनिया, चमार 

2.पंचकूला विधानसभा :- बनिया ,अरोड़ा खत्री ,ब्राह्मण ,जट सिख व जाट 

3.नारायणगढ़  विधानसभा:- चमार, गुर्जर, सैनी , जाट‌  जटसिख ,राजपूत, ब्राह्मण 

4.अंबाला कैंट विधानसभा:- अरोड़ा खत्री ,जट सिख व जाट, ब्राह्मण , चमार ,बनिया 

5.अंबाला सिटी विधानसभा:- अरोड़ा खत्री , जटसिख व जाट, ब्राह्मण, बनिया, चमार

6.मुलाना विधानसभा:- चमार ,सैनी ,जाट व जटसिख, राजपूत, ब्राह्मण

7.साढौरा विधानसभा :- चमार ,जट सिख व जाट ,सैनी, मुस्लिम गुर्जर ,हिंदू गुर्जर ,काम्बोज,राजपूत

8.जगाधरी विधानसभा:- मुस्लिम गुर्जर ,हिंदू गुर्जर ,अरोड़ा खत्री, झींमर( कश्यप ), बनिया 

9.यमुनानगर विधानसभा :- अरोड़ा खत्री, मुस्लिम गुर्जर, जट सिख व जाट , काम्बोज, चमार, ब्राह्मण

10.रादौर विधानसभा :- चमार, कंबोज, सैनी, जाट व जटसिख, राजपूत ,ब्राह्मण

11.लाडवा विधानसभा :--जाट, सैनी, चमार, जट सिख ब्राह्मण, झींमर(कश्यप),काम्बोज

12.थानेसर विधानसभा :- रोड़, अरोड़ा खत्री ब्राह्मण ,जाट, चमार, सैनी 

13.शाहबाद विधानसभा  :-जटसिख, जाट ,ब्राह्मण, चमार,काम्बोज, राजपूत 

14.पिहोवा विधानसभा :-जटसिख,जाट, ब्राह्मण, चमार , गुर्जर, अरोड़ा खत्री , सैनी

15. गुहला चीका :-जट सिख ,जाट ,चमार, ब्राह्मण, काम्बोज,अरोड़ा खत्री ,बनिया 

16.कलायत विधानसभा :-जाट, ब्राह्मण , चमार ,राजपूत, बाल्मीकि 

17.कैथल विधानसभा :-जाट ,गुर्जर, अरोड़ा खत्री,बनिया, चमार 

18.पुंडरी विधानसभा :-रोड़ ,जाट, ब्राह्मण , चमार , जटसिख, गुर्जर

19.नीलोखेड़ी विधानसभा :- रोड़, राजपूत, जट सिख,चमार, अरोड़ा खत्री 

20.इंद्री विधानसभा:- कंबोज,झींमर(कश्यप), जट सिख ,जाट, चमार, राजपूत

21.करनाल विधानसभा:- अरोड़ा खत्री, बनिया, जाट व जटसिख, ब्राह्मण, रोड 

22.असंध विधानसभा :-रोड़ ,जट सिख , जाट,चमार, राजपूत, ब्राह्मण

23.घरौंडा विधानसभा :-रोड़, जटसिख, राजपूत, चमार, ब्राह्मण,झींमर(कश्यप)

24.पानीपत ग्रामीण विधानसभा :-जाट , चमार, अरोड़ा खत्री, ब्राह्मण, झींमर(कश्यप)

25.पानीपत शहर विधानसभा:- अरोड़ा खत्री, बनिया, ब्राह्मण, जाट, मुस्लिम 

26.इसराना विधानसभा:- जाट, रोड़, चमार,ब्राह्मण, बीसीए, सिख

 27.समालखा विधानसभा:- गुर्जर, जाट ,ब्राह्मण, मुस्लिम, चमार

28.गन्नौर विधानसभा:- जाट, त्यागी, ब्राह्मण , चमार, गुर्जर

29.राई विधानसभा :-जाट ,राजपूत ,ब्राह्मण, चमार ,त्यागी, प्रवासी 

30.खरखोदा विधानसभा:- जाट, चमार, ब्राह्मण ,बाल्मीकि, धानक ,सैनी 

31.सोनीपत विधानसभा :-अरोड़ा खत्री ,बनिया, जाट, ब्राह्मण, चमार 

32.गोहाना विधानसभा:- जाट , चमार ,ब्राह्मण, सैनी ,अरोड़ा खत्री ,बनिया

33.बरोदा विधानसभा:- जाट ,ब्राह्मण, चमार ,बाल्मीकि, धानक , सैनी

34.जुलाना विधानसभा:- जाट ,ब्राह्मण, चमार, बाल्मीकि, सैनी

 35.सफीदों विधानसभा:- जाट ,ब्राह्मण , चमार, रोड़,जट सिख, सैनी,गुर्जर,

36.जींद विधानसभा:- जाट ,अरोड़ा खत्री ,बनिया ,सैनी, चमार ,ब्राह्मण 

37.उचाना विधानसभा:- जाट, चमार, ब्राह्मण, बाल्मीकि, धानक

38.नरवाना विधानसभा:- जाट , चमार ,ब्राह्मण, बाल्मीकि धानक , जटसिख

39.टोहाना विधानसभा:- जाट, जट सिख, चमार, कंबोज, ब्राह्मण, अरोड़ा खत्री 

40.फतेहाबाद विधानसभा:- जाट ,बिश्नोई, अरोड़ा खत्री, चमार ,ब्राह्मण 

41.रतिया विधानसभा:- जट सिख ,जाट ,अरोड़ा खत्री , चमार ,कंबोज, ओढ

42.कालावाली विधानसभा:- जट सिख, चमार, जाट, काम्बोज,मजहबी सिख ,अरोड़ा खत्री 

43.डबवाली विधानसभा:- जाट ,जट सिख, चमार, मजहबी सिख, काम्बोज,विश्नोई 

44.रानिया विधान सभा:- जाट, जट सिख ,कंबोज, चमार, मजहबी सिख 

45.सिरसा विधानसभा:- अरोड़ा खत्री ,बनिया ,जाट , चमार, कंबोज

 46.ऐलनाबाद विधानसभा:- जाट, चमार ,जट सिख , कुम्हार, धानक 

47.आदमपुर विधानसभा:- जाट ,बिश्नोई , चमार ,कुम्हार, धानक ,खाती 

48.उकलाना विधानसभा:- जाट , चमार,ब्राह्मण ,ओढ़, कुम्हार

49.नारनौंद विधानसभा:- जाट,चमार, ब्राह्मण, बाल्मीकि धानक , अरोड़ा खत्री 

50.हांसी विधानसभा:- जाट, अरोड़ा खत्री, सैनी ,ब्राह्मण, चमार, कुम्हार

51. बरवाला विधानसभा:- जाट , कुम्हार, अरोड़ा खत्री, चमार, सैनी 

52.हिसार विधानसभा:- अरोड़ा खत्री, बनिया, सैनी, चमार, बिश्नोई, जाट 

53.नलवा विधानसभा:- जाट ,बिश्नोई ,कुम्हार, चमार, ब्राह्मण

54.लोहारू विधानसभा:- जाट , चमार ,ब्राह्मण ,कुम्हार, धानक 

55.बाढ़ड़ा विधानसभा:- जाट, चमार, यादव ,ब्राह्मण, खाती 56.दादरी विधानसभा:- जाट ,राजपूत , चमार, ब्राह्मण, यादव 

57.भिवानी विधानसभा:- ब्राह्मण, जाट, राजपूत, अरोड़ा खत्री, चमार 

58.तोशाम विधानसभा:- जाट, राजपूत, ब्राह्मण, चमार, कुम्हार

59.बवानीखेड़ा विधानसभा:- जाट, राजपूत, चमार, ब्राह्मण, धानक , बाल्मीकि

60.महम विधानसभा:- जाट , चमार ,ब्राह्मण, अरोड़ा खत्री, धानक 

61.गढ़ी-सांपला किलोई विधानसभा:- जाट, ब्राह्मण , चमार, धानक,कुम्हार,

62.रोहतक विधानसभा:- अरोड़ा खत्री ,जाट ,बनिया, चमार, ब्राह्मण, सैनी

63.कलानौर विधानसभा:- जाट, चमार, अरोड़ा खत्री, ब्राह्मण, धानक, बाल्मीकि

64.बहादुरगढ़ विधान सभा:- जाट, ब्राह्मण, चमार, प्रवासी, बनिया, अरोड़ा खत्री 

65.बादली विधानसभा:- जाट , चमार ,ब्राह्मण ,राजपूत, यादव 

66.झज्जर विधानसभा:- जाट ,यादव, चमार, ब्राह्मण, बाल्मीकि

67. बेरी विधान सभा:- जाट ,ब्राह्मण, चमार, धानक, यादव 

68.अटेली विधानसभा:- यादव ,राजपूत, चमार, ब्राह्मण, जाट 

69.महेंद्रगढ़ विधानसभा:- यादव ,राजपूत ,ब्राह्मण , चमार, जाट 

70.नारनौल विधानसभा:- यादव ,सैनी , चमार ,ब्राह्मण, जाट

71. नांगल चौधरी विधानसभा:- यादव ,गुर्जर, चमार, ब्राह्मण ,सैनी 

72.बावल विधानसभा:- यादव ,जाट , चमार, राजपूत, ब्राह्मण, गुर्जर 

73.कोसली विधानसभा:- यादव , चमार ,राजपूत, जाट, ब्राह्मण 

74.रेवाड़ी विधान सभा:- यादव, अरोड़ा खत्री, चमार,ब्राह्मण, जाट 

75.पटौदी विधानसभा:- यादव, राजपूत, जाट, चमार, ब्राह्मण 

76.बादशाहपुर विधानसभा:- यादव, जाट ,प्रवासी, राजपूत, चमार, ब्राह्मण 

77.गुड़गांव विधानसभा:- अरोड़ा खत्री, बनिया,जाट,यादव, प्रवासी 

78.सोहना विधानसभा:- मेव मुस्लिम,गुर्जर, यादव, चमार, ब्राह्मण 

79.नूंह विधानसभा:- मेव मुस्लिम, राजपूत , चमार ,जाट, बनिया

80.फिरोजपुर झिरका विधानसभा:- मेव मुस्लिम, चमार, बनिया, सैनी, कुम्हार 

81.पुनहाना विधानसभा:- मेव मुस्लिम,बनिया,जाट , चमार, कुम्हार 

82.हथीन विधानसभा:- मेव मुस्लिम, जाट, ब्राह्मण, चमार, गुर्जर 

83.होडल विधानसभा:- जाट, चमार,ब्राह्मण ,गुर्जर, मेव मुस्लिम 

84.पलवल विधान सभा:- जाट, गुर्जर, चमार, बनिया, ब्राह्मण, अरोड़ा खत्री 

85.पृथला विधानसभा:- जाट,राजपूत ,ब्राह्मण, चमार ,मेव व मुस्लिम

86.फरीदाबाद एनआईटी विधानसभा:- गुर्जर, प्रवासी, अरोड़ा खत्री, मुस्लिम, जाट, ब्राह्मण 

87.बड़खल विधानसभा:- अरोड़ा खत्री, गुर्जर, मुस्लिम, ब्राह्मण, प्रवासी 

88.बल्लभगढ़ विधानसभा:- अरोड़ा खत्री ,बनिया, प्रवासी, गुर्जर,जाट 

89.फरीदाबाद विधानसभा:- अरोड़ा खत्री, बनिया, ब्राह्मण, जाट व जट सिख, मुस्लिम

90.तिगांव विधानसभा:- गुर्जर,ब्राह्मण,राजपूत, मुस्लिम, चमार,जाट ।  

                       दूसरा हरियाणा की कौन सी जाति कौन से विधानसभा क्षेत्र में संख्यात्मक रूप में पहले तथा दूसरे नंबर पर है जिसका वर्णन निम्नलिखित है:-

    1.जाट 41 विधानसभा क्षेत्रों में पहले नंबर पर और 9 विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे नंबर पर हैं|

2.जट सिख 5 विधानसभा क्षेत्रों में पहले नंबर पर और 8 विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे नंबर पर हैं|

3.अरोड़ा खत्री 13 विधानसभा क्षेत्रों में पहले नंबर पर और 6 विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे नंबर पर हैं|

4.यादव 9 विधानसभा क्षेत्रों में पहले नंबर पर और एक विधानसभा क्षेत्र में दूसरे नंबर पर हैं|

5.मेव मुस्लिम 5 विधानसभा क्षेत्रों में पहले नंबर पर हैं|

6.रोड़ 5 विधानसभा क्षेत्रों में पहले नंबर पर और एक विधानसभा क्षेत्र में दूसरे नंबर पर हैं|

7.हिंदू गुर्जर 4 विधानसभा क्षेत्रों में पहले नंबर पर और 7 विधानसभा क्षेत्र में दूसरे नंबर पर हैं|

8.मुस्लिम गुर्जर 1 विधानसभा क्षेत्र में पहले नंबर पर और एक विधानसभा क्षेत्र में दूसरे नंबर पर हैं|

9.चमार 4 विधानसभा क्षेत्रों में पहले नंबर पर और 17 विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे नंबर पर हैं|

10.ब्राह्मण 1 विधानसभा क्षेत्र में पहले नंबर पर और 10 विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे नंबर पर हैं|

11.कंबोज 1 विधानसभा क्षेत्र में पहले नंबर पर और 1 विधानसभा क्षेत्र में दूसरे नंबर पर हैं|

12.बनिया 1 विधानसभा क्षेत्र में पहले नंबर पर और 9 विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे नंबर पर हैं|

13.राजपूत 10 विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे नंबर पर हैं|

14.बिश्नोई और सैनी 3-3 विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे नंबर पर हैं|

15.त्यागी, झींमर(कश्यप), कुम्हार व प्रवासी 1-1 विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे नंबर पर हैं|

                तीसरा हर विधानसभा क्षेत्र में संख्यात्मक रूप से पहले तथा दूसरे नंबर पर आने वाली जातियां का अधिकतम प्रतिशत कितना और कौन से विधानसभा क्षेत्र में है का वर्णन निम्नलिखित है:-

1.मेव मुस्लिमों की अधिकतम संख्या 70% के आसपास फिरोजपुर झिरका और पुन्हाना में है|

2.यादवों की अधिकतम अधिकतम संख्या 60% के आसपास कोसली विधानसभा क्षेत्र में है|

3.जाटों की अधिकतम संख्या 55 से 60% के आसपास बेरी, गढ़ी- सांपला किलोई, बरोदा,उचाना आदि विधानसभा क्षेत्रों में है|

4.जट सिखों की अधिकतम आबादी 30% के आसपास कांलावाली में है|

4.अरोड़ा खत्री की अधिकतम संख्या 30 से 35% के आसपास रोहतक और पानीपत शहरी विधानसभा क्षेत्रों में है| 5.हिंदू गुर्जरों की अधिकतम संख्या 25 से 30% के आसपास समालखा और सोहना विधानसभा में है|

6. मुस्लिम गुर्जरों की अधिकतम आबादी जगाधरी में है जो 17% के आसपास है |

7.रोड बिरादरी की अधिकतम आबादी पुंडरी विधानसभा क्षेत्र में है जो 25 से 30% के आसपास है|

8.ब्राह्मणों की अधिकतम संख्या 17% के आसपास भिवानी विधानसभा क्षेत्र में है |

9.चमारों की अधिकतम संख्या 20% के आसपास साढौरा और मुलाना विधानसभा क्षेत्रों में है |

10.कंबोज जाति की अधिकतम संख्या इंद्री विधानसभा क्षेत्र में 15-16% के आसपास है |

10.बनिया जाति की अधिकतम संख्या 20 से 25% के आसपास पंचकूला और सिरसा विधानसभा क्षेत्रों में है| 11.बिश्नोईयों की अधिकतम संख्या 18 से 20% के आसपास आदमपुर विधानसभा क्षेत्र में है |

12.सैनियों की अधिकतम संख्या 15 से 20% के आसपास लाडवा विधानसभा क्षेत्र में है |

13.त्यागियों का अधिकतम प्रतिशत गन्नौर विधानसभा क्षेत्र में है| 

14.कश्यप (झींमर) की अधिकतम संख्या इंद्री विधानसभा क्षेत्र में 15% के आसपास है |

15.सबसे ज्यादा संख्या में कुम्हार 12 -15% के आसपास बरवाला विधानसभा क्षेत्र में पाए जाते हैं |

16.राजपूत बिरादरी की अधिकतम संख्या 15% के आसपास बवानीखेड़ा विधानसभा क्षेत्र में है |

17.फरीदाबाद एनआईटी क्षेत्र में सबसे ज्यादा प्रवासी 18- 20% की संख्या में है |

                       मैंने अपनी तरफ से सही सूचना देने का पूरा प्रयास किया है| केवल उन जातियों के क्रम में थोड़ा बहुत परिवर्तन हो सकता है जिनकी संख्या में 1 या 2% का ही अंतर है | आप कमेंट करके अपनी राय दे सकते हैं या कोई भी सवाल पूछ सकते हैं |  

                            लेखक :- प्रवीन कुमार

                                   तहसील - बादली 

                                     जिला -झज्जर|

                                         धन्यवाद!

                                        🙏🙏