Monday, July 6, 2015

इसे कहते हैं, "उत्तां के नाम बदनाम अर घुण्यां नैं खो दिए गाम!"



का हो ससुर का नाती, ई छड़ों (मलंग-रंडवे-कुवांरे-बिन ब्याहे) की संख्या में तो ई पंजाब-हरयाणा देश में क्रमश पच्चीसवें और छब्बीसवें नंबर पर है। ई कैसे हुई गवा ससुरा हम तो हरयाणा को सेक्स रैस्वा की सबसे ढुलमुल हालत में टॉप दिखाई रही, तो फिर सबसे ज्यादा कुंवारा-स्टाफ भी तो इधर ही होना चाहिए था ना?

ओ तेरी इह्मा तो साहेब का गुजरात भी हरयाणा से आगे है, का हो साहेब ई प्योर बिना बयाहे का संख्या है या अइसन का भी जो ब्याह के बीवी छोड़ दिए हूँ?

कोन्हों ठो तो है जुई हरयाणा का फिरकी लेवत रही!


हम ऊत तो अळबाद (शरारत) करने में ही रह लिए, असली बदनामी के खड्डे तो यें घुन्ने खोद्गे!


जय यौद्धेय! - फूल मलिक




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