Monday, August 10, 2015

हरयाणा व् खापलैंड के दलित उन पर हिन्दुवाद के कसते सिकंजे को समझें!


आज आरएसएस जाट को बाकी हरयाणवी समाज और जातियों से काट के अलग-थलग करने का जो गेम चल रही है, यह कल को दलितों पर अत्याचार ढाने की भूमिका बन रही है|

आरएसएस जानती है कि वो कितनी ही ताकतवर क्यों ना हो जाए परन्तु ना ही तो जाट को धमका सकती है और ना ही उससे खुला मुकाबला कर सकती है| इसलिए जाट बनाम नॉन-जाट के षड्यंत्री रथ पे सवार है और जाट को उसी की जाटलैंड पे सबसे अलग-थलग करने हेतु दीमक की भांति लगी है| और अब तो आलम यह है कि उस दीमक का खोदा हुआ समाज को थोथा करने का वो घुण राजकुमार सैनी और अटाली-भगाना जैसे एपिसोड के माध्यम से दिखने भी लगा है| वरना ऐसी क्या वजह कि नॉन-जाट सरकार होते हुए भी दलितों को भगाना की जमीन नहीं मिली अभी तक|

मानता हूँ कि दलितों को मेरी बात अटपटी लगेगी क्योंकि जाट और दलित के बीच के वास्तविक अथवा प्रोपेगेटेड झगड़ों की वजह से पिछले कई वर्षों से दोनों में खाई बढ़ी हुई है| परन्तु दलित को साथ ही यह भी याद रखना होगा कि जाट, आरएसएस की शक्ल में छुपे शूद्र और अछूत की सोच रखने वाले हिंदूवादियों और दलित के बीच में एक कवच की भांति रहा है| अगर आपका यह कवच बीच से हट गया तो मुझे अंदेशा है कि दलित को जाटलैंड के बहार के भारत पे उसकी जो हालत है उस रास्ते पे डाल दिया जावे|

दलित चाहे लाख गुस्सा हों जाट से, परन्तु आप एक बार जाटलैंड के बाहर (जहां पर जाट का नहीं अपितु इन जैसी ही ताकतों और विचारधाराओं का एकमुश्त राज है) के भारत के दलित की हालत देख के आवें, अगर आ के अपने हरयाणा और जाटलैंड को चूमें ना तो|

हालाँकि मैं यह भी जानता हूँ कि आप बाबा साहेब आंबेडकर के शिष्य हैं और हिंदूवादियों की मंशाओं से बहुत हद तक वाकिफ हैं परन्तु ज्यों-ज्यों जाट रुपी यह कवच आप और हिंदूवादियों के बीच से हटता कहो या कमजोर पड़ता जा रहा है, मुझे आप पर किसी दूरगामी अनहोनी का अंदेशा बढ़ता/पड़ता दिख रहा है

जाट को भी अब यह ग्रन्थ-शास्त्रों के प्रोपेगैंडों में आ खुद को उच्च जाति का समझ दलित से अपने मन-मुटाव या उंच-नीच के भेद छोड़ अपनी शुद्ध खाप व् दादा खेड़ा परम्परा पर आना होगा| वरना इस चक्र में जो दुर्गति आपकी बनी हुई है वो वक्त के साथ और गहरी होने वाली है| क्योंकि जिनकी किताबों से उंच-नीच की शिक्षा ले आप दलितों से उंच-नीच का भेदभाव करते हैं फिर उन्हीं किताबों वाले आपको मीडिया में समाज का खलनायक बना के परोसते हैं|

जय यौद्धेय! - फूल मलिक

No comments: