Thursday, 8 January 2026

मात्र किसान शब्द सोच-समझ के इस्तेमाल किया करो!

 मात्र किसान शब्द सोच-समझ के इस्तेमाल किया करो: 


आज सर छोटूराम निर्वाण दिवस विशेष: 


*सर छोटूराम को भी 'किसान मसीहा' नहीं अपितु 'दीनबंधु' व् 'जमींदारी-उत्थानक' तरीके से शब्द ज्यादा सूट करेंगे; वह कैसे यह नीचे समझें:*


क्योंकि एक तो आप जो वेस्ट-यूपी-हरयाणा-पंजाब-उत्तरी राजस्थान में जो खेती-बाड़ी वाले हो; आप सिर्फ किसान नहीं अपितु उसके साथ साथ जमींदार भी हो! 


दूसरा इसलिए क्योंकि बिहार-बंगाल-उड़ीसा साइड 'किसान' उसको कहते हैं जो जमींदार के यहाँ हल चलाता है, उसकी बेगारी करता है| यानि वहां दोनों शब्द के अर्थ भिन्न हैं| 


इसलिए वहां के जो प्रवासी यहाँ आ रहे हैं वह आपकी पूरी व् सही तस्वीर ले ही नहीं पा रहे हैं व् आपको सिर्फ किसान मान के, उनके वहां के सिस्टम-कल्चर वाला किसान मानते हैं| 


और वहां ऐसा इसलिए है क्योंकि वहां है 'सामंती-जमींदारी' जो वर्णवाद पर आधारित होती है, जिसमें जमींदार सामंत होता है, जो अमूमन खुद खेत में काम नहीं करता अपितु उसके लिए किसान करता है व् वह डोळे/मैन्ड पे खड़ा हो के आदेश देता है बस| 


जबकि आपके यहाँ ऐसा सिस्टम रहा ही नहीं अपितु आपके यहाँ आपके खाप-खेड़े-खेत के दर्शनशास्त्र में "उदारवादी जमींदारी" कल्चर रहा है; इसलिए आप सिर्फ किसान नहीं हो, उसके साथ साथ आप खुद ही जमींदार भी रहे हो! 


अत: अपनी पहचान व् परिभाषा को सही-सही शब्द दीजिये!


वेस्ट-यूपी-हरयाणा-पंजाब-उत्तरी राजस्थान इस क्षेत्र को एकमुश्त शब्द में विनेश राणा भाई वाले शब्द सप्ताब से भी सम्बोधित कर सकते हो; यानि पांच आब पंजाब की व् दो आब गंगा-जमना यानि कुल सप्ताब!


जय यौधेय! - फूल मलिक

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