Tuesday, 20 January 2026

मारवाड़ आँचल में जाट के बिना ब्राह्मण, राजपुरोहित और राजपूत लड़कियों का विवाह अधूरा हैं!

बहुत सारे लोगों को इस बात की शायद ही जानकारी हो कि मारवाड़ आँचल में जाट के बिना ब्राह्मण, राजपुरोहित और राजपूत लड़कियों का विवाह अधूरा हैं।

जब किसी ब्राह्मण, राजपुरोहित अथवा राजपूत लड़की का विवाह होता है, तब उसके मायके वाले उसको भोजन से भरा हुआ एक बर्तन देते है, जिसको "चरी" बोलते है।
विदाई के उपरान्त जब वो लड़की अपने ससुराल पहुँचती है, तब सबसे पहले आसपास के किसी जाट पुरुष को न्योता भेजा जाता है।
फिर जब वो जाट पुरुष उस लड़की के ससुराल पहुँचता है, तो वो लड़की उसके गोद में बैठती है और उसको वो भोजन से भरी चरी देती है। इस रस्म के साथ ही वो जाट उस लड़की का बाप बन जाता है।
फिर वो जाट अपनी ब्राह्मण, राजपुरोहित अथवा राजपूत "बेटी" को अपने घर ले जाता है, उसको भोजन करवाता है, उसको कपड़े देता है और फिर उसको पुनः उसके ससुराल छोड़ने जाता है।
इसी रस्म के साथ उस लड़की का विवाह संस्कार पूरा होता है। इसी रस्म के साथ उस लड़की के लिए उस जाट का परिवार अपना "निकटस्थ" मायका हो जाता हैं। वो जाट परिवार ही उस लड़की और उसके जैविक मायके के मध्य तथा उस लड़की और उसके ससुराल के मध्य एक कड़ी की भूमिका निभाता है।
पिछली पीढ़ी तक यह एक आवश्यक रस्म थी — आप चाहो, तो इसके बारे में मारवाड़ के किसी भी ग्रामीण ब्राह्मण, राजपुरोहित अथवा राजपूत परिवार से जानकारी ले सकते हो।

Shivatva Beniwal

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