विवेचना: क्या अब मुस्लिम "जय श्री राम" वालों की बजाए, "हे राम" या "हर-हर महादेव + अल्लाह-हू-अकबर" वाले अपने पुराने समीकरणों की तरफ तो नहीं मुड़ेगा?
अपने कल्चर के मूल्यांकन का अधिकार दूसरों को मत लेने दो अर्थात अपने आईडिया, अपनी सभ्यता और अपने कल्चर के खसम बनो, जमाई नहीं!
Monday, 17 April 2023
अतीक अहमद के कत्ल ने मोदी की "पसमांदा मुस्लिम्स" को लुभाने की पॉलिटिक्स तहस-नहस कर दी है; साथ ही अखिलेश यादव से भी मुसलमानों का मोह भंग होता दिख रहा है!
Thursday, 6 April 2023
लंगर व् भंडारे में फर्क!
लंगर: गुरु नानक देव जी के जमाने से चल रहा है| दाता का नाम, पता, ओहदा गुप्त होता है| शुद्ध मानवता की सेवा की सही वाली निस्वार्थ नियत से लगाया जाता है| आसपास जो कोई किसी भी धर्म-जात से भूखा हो, वह खा सकता है|
भंडारा: नाम की भूख, पाप धोने का लालच, बोल रखा था इसलिए खिलाना, तथाकथित मन्नत पूरी हुई तो खिलाना या किसी बात का भय दूर भगाने हेतु खिलाना आदि-आदि| भंडारा स्थल पर सबको पता होगा कि कौन खिला रहा है, अथवा अगला स्वत: ही बड़ा बैनर लगाए मिलता है कि मैं खिला रहा/रही हूँ| इसके साथ एक और अवधारणा जुडी है कि इसको जरूर इलेक्शन लड़ने होंगे, बड़ा समाजसेवक दिखाना चाहता/चाहती है खुद को आदि-आदि| निस्वार्थ शब्द झलका कहीं इसके उद्देश्यों में? बल्कि इसमें तमाम वो वजहें हैं जो लोगों को कम्पटीशन की भावना में डाल के जो इसको नहीं भी करना चाहते हों, उनको भी इसको करने को मजबूर करती हैं| अन्यथा तान्ने एक्स्ट्रा तैयार मिलते हैं कि "के धरती म्ह हाथ टिक रे सें", "कीमें धर्म-कर्म भी कर लिया करो", "धर्म नैं मानदे ए कोन्या के" आदि-आदि|
भंडारों से अच्छा तो म्हारे पुरखों का सदियों पुराना यह सिद्धांत रहा है कि "गाम-नगर खेड़े में कोई भूखा-नंगा नहीं सोना चाहिए" - इसके तहत मैंने मेरी दादी समेत गाम की बहुत औरतों-मर्दों को गाम के किसी भी लाचार व्यक्ति को खाना-कपड़ा देते बालकपन से देखा| गाम की परस में कोई राह चलता रैन-बसेरे रुका तो उसको खाना पहुंचाते/पहुंचवाते देखा (परन्तु वाकई में राहगीर हुआ तो, वरना कोई फंडी-फलहरी इस बात का फायदा उठाने हेतु आया तो वह लठ भी खूब खा के जाता देखा)| और यह लाचार व्यक्ति चाहे जिस किसी जाति-धर्म का रहा हो गाम से, सबके बारे हमारे दादे/दादी यही कहते थे कि "खेड़ों की सदियों पुरानी बसावट से नगर-खेड़ों (भैयों-भूमियों) का यह सिद्धांत रहता आया है| इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता था कि अगर गाम-की-गाम में कोई बेऔलादा, निर्धन या बेवारसा बूढा/बुढ़िया/मंदबुद्धि आदि भूखा होता तो वह हक से भी गाम के किसी भी घर में जा के खा सकता था या कोई-कोई घर ऐसे किसी भी जरूरतमंद को स्थाई तौर पर खाना देते रहते थे| घर के आगे से या गली से निकलते वक्त मुलाकात होती तो आगे से पूछ लेते थे कि आज खाना खाया तो सामने वाला बता देता था व् पूछने वाला उसको अपने घर से आदरसहित बिना दिखावे के खाना दे देता था| और यही वह सिद्धांत रहा है "गाम-नगर खेड़े में कोई भूखा-नंगा नहीं सोना चाहिए" जिसके चलते खापलैंड बारे यह कहावत मशहूर हुई कि, "यहाँ के गाम-नगर खेड़ों में कोई भिखारी नहीं मिलता/होता"| अगले की हालत देख, आगे से खुद ही हाथ बढ़ा के बिना तंज-ताने के उसको खाना दे देना; ताकि अगले की सेल्फ-एस्टीम व् सेल्फ-रेस्पेक्ट भी कायम रहे|
आज हम इसको कितना पाल रहे हैं, पता नहीं| आज तो खाना खिलाना भी प्रदर्शन का विषय जो हो चला है या कहो कि फंडियों के फैलाए इस भंडारे के कांसेप्ट ने इससे मानवता निकाल कोरी प्रसिद्धि व् स्वार्थसिद्धि की लालसा का सौदा बना छोड़ा है; जो पूरी हुई कि नहीं यह खुद इसको लगाने वाले अधिकतर को नहीं पता चल पाता|
विशेष: आशा है कि मैंने भंडारे की तमाम सम्भव परिभाषा देने की कोशिश करी है, फिर भी कोई अन्यत्र पक्ष रह गया हो तो इसमें बिना तू-तू मैं-मैं के शांति से बता दीजिएगा; मैं सीखने को हर वक्त तैयार रहता हूँ| हाँ, भंडारे में इतनी ईमानदारी तो है कि सामने वाला घोषित करके बता चुका होता है कि मैं यह इस स्वार्थसिद्धि के लिए कर रहा हूँ; यही इसका पॉजिटिव एंगल है; बाकी धर्म-कर्म का इसमें कोई बीज तब तक आ ही नहीं सकता, जब तक इसमें "निस्वार्थ" का कांसेप्ट नहीं डलेगा; वह डला तो यह लंगर या खेड़ों वाला ऊपर बताया कांसेप्ट हो जाएगा| धर्म किसी भी कम्पटीशन से बाहर रहने का नाम है; वह धर्म कैसे हो जाता है जहाँ कम्पटीशन-जलनवश या लोगों के तानों से बचने हेतु चीजें की जाती हों? भंडारा वही तो है या कहीं धर्म का भी कुछ है इसमें? अच्छी बात है स्वार्थ के लिए भंडारे लगाओ परन्तु फिर इसको धर्म का चोला क्यों पहनाते हो; यह पहनाते हो इसीलिए तुम्हारे आंतरिक भय-क्लेश-द्वेष-लोभ-लालसा कट नहीं पाते व् आजीवन भरमते फिरते हो|
जय यौधेय! - फूल मलिक
Saturday, 25 March 2023
खालिस्तान किसी जाट या जट्ट का कांसेप्ट कभी था ही नहीं और ना हो सकता!
यह कांसेप्ट जगजीत सिंह चौहान का है व् उसी का यह मूवमेंट रहता है; फंडियों के इशारे पे|
फंडी की फिलॉसोफी है कि इसको लोकतंत्र व् गणतंत्र से खासी चिढ है यह इसके जेनेटिक रूप से अपोजिट है| संत भिंडरावाला की मांग हमेशा स्टेटस को ज्यादा राइट्स देने की रही (अमेरिका की तर्ज पर), जिससे कि लोकतंत्र व् गणतंत्र जिन्दा होता है| इससे बचने के लिए फंडी इस मुद्दे को एक काल्पनिक सोच तक ले जाता है जो इसकी एक्सट्रीम फंडी लोग मानते हैं| कि आज स्टेटस को राइट्स दे दिए तो कल को हमारे को कौन पूछेगा| यह पेंशन स्कीम बंद करने जैसा मामला है कि लोगों को आर्थिक तौर पर इतने संबल होने ही मत दो कि वह अपनी रोजी-रोटी को छोड़ लोकतंत्र बारे सोचने का वक्त भी पा सकें, बुद्धि चलाने तक तो पहुंचना ही नहीं चाहिए|
इनको चिढ़ है जब कोई सामाजिक तौर पर समाज में इनसे ज्यादा रेपुटेशन रखता हो या रखने लग जाए| किसान आंदोलन 2020-21 ने इसमें जो भी अग्रणी जातियां या संस्थाएं रही जैसे कि जाट-जट्ट व् खाप और गुरूद्वारे; इन चारों का विश्व स्तर पर रुतबा बढ़ा है| और इसको बढ़ाने में सहायक किसान आंदोलन के क्योंकि सूत्रधार सिख थे तो अब यह खालिस्तान का फिर से मुद्दा इनका हवा दिलवाया हुआ है देश व् विदेश दोनों जगह| ताकि जट्टों की रेपुटेशन डाउन की जाए व् इनसे जाट हतोत्साहित हो जट्टों से अलग हो जाए| इससे ज्यादा कुछ भी नहीं है यह मामला|
संत भिंडरावाला हो या कोई और जट्ट उसने हमेशा खालसराज की बात करी; इसको एक स्टेप आगे के पंख फंडी लगवाते हैं लोगों को पैसे फेंक कर| फिर भी किसी खालसा वाले को कहना ही है तो वह यह लाईन ले कि हम पूरे देश को ही खालिस्तान बनाएंगे जैसे यह हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहते हैं| और जो वाकई में फंडियों से लड़ने की सोच रखता होगा वह इस लाइन पे चल के ही काम करेगा और ऐसे संत भिंडरावाला जी ने किया था|
दूसरा पार्ट यह भी देखो कि यह किसी जाट या जट्ट का कांसेप्ट क्यों नहीं है? क्योंकि खालिस्तान में पाकिस्तानी पंजाब का भी आधा पार्ट आता है, क्या उधर कोई हलचल दिखती है? नहीं, hence proved, it has been a purely fandi agenda!
जय यौधेय! - फूल मलिक
Friday, 24 March 2023
इस पर अब शायद ही कोई शंका हैं कि बिश्नोई पंथ के संस्थापक जांभोजी का जन्म जाट जनजाति में हुआ!
इस पर अब शायद ही कोई शंका हैं कि बिश्नोई पंथ के संस्थापक जांभोजी का जन्म जाट जनजाति में हुआ।
नमन प्रणाम आसन, शशांक आसन और नमाज; तीनों को करने की पोजीशन व् उद्देश्यों में समानता देखिए!
फंडियों का बचकानापन देखिये:
नमन प्रणाम आसन व् शशांक आसन, हिन्दू करे तो योगा;
और इन्हीं दोनों आसनों में मुस्लिम नमाज अदा करते वक्त होता है|
परन्तु स्वमहिमा में अंधे फंडी क्या बर्गलाएँगे, उसका क्या-क्या कह के मजाक बनाया जाता है कहने की जरूरत नहीं|
बर्गलाएँगे कि हम जो करते हैं वह योग है, तप है; परन्तु उसी को मुस्लिम करे तो उपहास उड़ाएंगे; जबकि मुस्लिम वाले में वह एक नहीं बल्कि दो कार्य सिद्धि एक साथ कर रहा होता है; एक तो अल्लाह को प्रार्थना व् दूसरा जो योग वाले के साथ कॉमन है यानि दिमाग में ब्लड-सर्कुलेशन बढ़ाना|
और जब इसको करने की बात आती है तो देखें कि किस धर्म वाले इसको करने में सबसे अधिक नियमित हैं? हर कोई कहेगा मुस्लिम| यह लोग रोज दिमाग में ब्लड-सर्कुलेशन कर लेते हैं व् योग वाले कितने % करते हैं; शायद कुल के 10% भी नहीं|
आज के मुस्लिम इसके पीछे क्या तर्क देते हैं, एक तर्क देते हैं या दोनों तर्क देते हैं; परन्तु यह माइंड में ब्लड-सर्कुलेशन सबसे नियमित करते हैं| इनके जिस भी पैगंबर ने यह तरीका इनको दिया, जब भी दिया कमाल का दिया है|
ऐसे ही इनका खतने का सिद्धांत है, इस पर फिर कभी लिखूंगा| और खतना भी सिर्फ मर्द का नहीं, औरत का भी| इसका भी खूब मजाक उड़ाते हैं लोग, परन्तु यह प्रैक्टिस कितने मानसिक-शारीरक-मनोवैज्ञानिक बल बढ़ाने के फायदे देती है; जानोगे तो हैरान रह जाओगे|
फ़िलहाल बात यह है कि कोई किसी का मजाक तभी उड़ाता है जब उसको सामने वाले से इन्फेरियरिटी काम्प्लेक्स हो; अब फंडी जब खुद योगा में यही करते हैं जो मुस्लिम नमाज में करते हैं तो फंडी ही क्यों नमाज की पोजीशन का मजाक करते पाए जाते हैं? मुस्लिम तो नहीं देखे कभी नमन योगा व् शशांक योगा पर उपहास करते। बस यही गंभीरता इनको विश्व में एज देती है|
बाकी कोई रोता-पीटता इस पोस्ट तक पे भी कुछ भी बकता रहे!
जय यौधेय! - फूल मलिक
Wednesday, 22 March 2023
कैसे तोड़ा तथाकथित 35 बनाम 1 करके सरपंची का चुनाव जीतने की चाह रखने वाले फंडियों का सपना!
फरवरी 2016 में नया ईजाद हुआ 35 बनाम 1 का प्रपंच, कईयों में आखिरी तीर व् आश की तरह आज भी बचा हुआ पाया गया है| ऐसे में हमने भी 2-4 गांव में इन प्रपंचियों के सपनों को कुछ निम्नलिखित तरीके से पानी पिलाया| 35 बनाम 1 बार-बार लिखूंगा तो लम्बा शब्द हो जाएगा, इसलिए इससे आगे इसको "फंडी" पढ़ें!
Wednesday, 15 March 2023
15 मार्च 1206 यानि आज का दिन!
15 मार्च 1206 यानि आज का दिन - वह ऐतिहासिक दिन जब खोखर खाप चौधरी दादावीर रायसाल खोखर जी व् उनकी खाप-आर्मी ने 1192 में मारे किंग पृथ्वीराज चौहान के कातिल मोहम्मद ग़ोरी को मारा था!
त्यौहार-उत्सव मनाने हैं तो इन तारीखों के मनाया करो; इन वास्तव में हो के गए पुरख-यौधेय सकल भगवानों के मनाया करो; उस खाप-मिल्ट्री कल्चर के मनाया करो, जिससे यह बनते आये| बाकी भी मना लो, जो मनाना हो परन्तु इनको मनाने व् भगवान मानने से कौन रोकता है या रोक सकता है?
बताओ जिन कामों के लिए तथाकथित बड़े-बड़ों के हांगे लाग लिया करते; इहसे-इहसे काम म्हारे चौधरी चालते-फिरते कर दिया करते| बाकी चौधरियों ने जब-जब राजे-रजवाड़े भी बनाये तो ऐसे ही बेमिसाल बनाये, चाहे वो पंजाब की मिसलों के बनाये हों या थानेसर-भरतपुर-बल्लबगढ़-मुरसन आदि वाले खाप-चौधरियों के हों!
जय यौधेय! - फूल मलिक
Saturday, 11 March 2023
Jat People Chronology
- राजा पोरस (सिकन्दर को हराया)
- राजा यशोधर्मन विर्क (हूणों को हराया)
- राजा स्कंद्रगुप्त (यूरोप में जाकर राज किया)
- राजा कनिष्क (पहली सर्वखाप मीटिंग सौंख)
- राजा विक्रम पंवार (21 देशों को जीता)
- राजा समुद्रगुप्त (जाट राज विस्तार)
- रानी तोमिरिस (साइरस को मारा)
- हर्षवर्धन (जाट सर्वखाप पुनर्गठन)
- अनंगपाल सिंह 1st (इंद्रप्रस्थ बनाया)
- सलक्षपाल (चौधराहट प्रणाली लागू की)
- अनंगपाल 2nd (8 खेरे और दिल्ली बसाई)
- जाटवान मलिक (ऐबक हराया)
- रायसाल खोखर (गौरी मारा)
- नाहरपाल (खिलजी हराया)
- बच्छराज(मेरा खेरा बाबा)
- सुरत सिंह (राणा कुब्बा हराया)
- गोकुल जाट (औरंगजेब हराया)
- सुखपाल सिंह (औरंगजेब हराया)
- राजाराम(सिकंदरा खोदा)
- रामकी चाहर (औरंगजेब हराया)
- हठी सिंह (जयपुर मेवात हाड़ौती बलूच मुगल हराए)
- चूरामन (फर्रुख्धियर हराया)
- सूरजमल जाट (जो भिड़ा वही हराया)
- जवाहर सिंह (जो भिड़ा वही हराया)
- फौंदा सिंह (अब्दाली भगाया, राजपूत हराए)
- बनारसी सिंह (दौसा, करौली, अलवर जीते)
- अनूप सिंह (मुगल राजपूत पठान हराए)
- तोफा सिंह (70 हज़ार पठान हराए)
- शीशराम (सआदत खां हराया)
- बच्चू सिंह (फिरंगी भगाए)
- रणजीत सिंह (जो भिड़ा वही कूटा)
- नलवा (जो भिड़ा वही कूटा)
Thursday, 9 March 2023
प्रोटैस्टेंट (Protestants) ईसाईयों व् खाप यौधेयों में समानताएं!
1 - दोनों में मर्द-पुजारी रहित धोक-ज्योत की परम्परा है| जैसे खापलैंड के दादा नगर खेड़ों-भैयों-भूमियों के मूल-सिद्धांत में मर्द-पुजारी कांसेप्ट नहीं है, ऐसे ही प्रोटेस्टेंट्स की चर्च में पादरी नहीं होते|
2 - दोनों के मूल सिद्धांतों में माइथोलॉजी नहीं मानी जाती|
3 - दोनों साइंटिफिक व् तार्किक रहे हैं|
4 - दोनों मूर्ती-पूजा को मिथ्या कहते हैं|
5 - दोनों जहाँ-जहाँ बसते हैं अथवा बसते आये हैं; वो उस देश-जगह के सबसे खुशहाल, वर्णवाद टाइप की बीमारी से न्यूतम ग्रस्त व् साधन-सम्पन्न इलाके हैं; जैसे इंडिया में खापलैंड व् मिसललैंड और यूरोप में नार्डिक देश (डेनमार्क, नॉर्वे, आइसलैंड, फिनलैंड), आयरलैंड, स्वीडन, इंग्लैंड, नीदरलैंड| वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स की लिस्ट में यही देश टॉप लिस्ट में हैं|
विशेष: इस पोस्ट से कोई यह बेसिरपैर मत मारना कि अब तुम हमें ईसाई बनाओगे क्या? मैंने सिर्फ एक रिसर्चर के तौर पर एक सकारात्मक पहलुओं की तुलनात्मक बात रखी है| इंडिया से इस पहलु पर कुछ वर्ल्ड स्टैण्डर्ड का है तो इन पैमानों से जीने वाले समाजों की यह थ्योरी उनमें से एक है|
सावधान: खापलैंड जो इन पहलुओं पर सदियों से जागरूक रही है व् इनसे मुक्त रही है; उसको अब फंडी पुरजोर लगा के इसी गर्त में खींच रहे हैं| प्रोटेस्टेंट्स ने इस गर्त से 1500वीं सदी में लगभग दो सदी के खून-खराबे के बाद छुटकारा पाया था; जबकि खापलैंड वालो आप कभी से इनसे मुक्त रहे हो| परन्तु अब इन्हीं में घेरे जा रहे हो; इसलिए सचेत-सतर्क-सावधान हो जाओ| वरना कोई फायदा नहीं, कि इन फंड-पाखंडों से मुक्त समाज-धरती को पहले ऐसी गर्त में डलवाने का व् बाद में अगली पीढ़ियां इसी से मुक्ति पाने को संघर्ष करने में अपनी जिंदगी खोवें; ऐसी स्थितियां उनको दे के मत जाओ|
जय यौधेय! - फूल मलिक
Sunday, 5 March 2023
चुगली करने बारे औरतों को तो खामखा बदनाम किया, "ढोल-गंवार-शूद्र-पशु-नारी, सब ताड़ना के अधिकारी" लिखने की मानसिकता वालों ने; असली व् सबसे बड़े चुगलबाज तो यह खुद हैं!
यकीं ना हो तो देख लो आजकल हरयाणे म्ह|
Thursday, 23 February 2023
10 Points formula to keep you happy and satisfied with your life-journey!
- How to stop over thinking - by Journaliing (Write down you thoughts, take them out of your head).
- How to think clearly - by meditation (It removes clutter out of your mind)
- How to improve your mood - by exercising (Physical activities release your mental and physical stress)
- How to expand your mind - by reading (Read psychological books in leisure times for your instinct strengthening and make you more rational)
- How to understand something better - by teaching others and surveying (It reinforeces your understanding and keeps you rational)
- How to overcome self-doubts - by self-talk (Practice affirmation, be your own cheerleader first then to world)
- How to feel good - by expressing gratitude (It shall put you on positivity and more enthusiastic)
- How to recharge mind - by praying to purakh-parmatma-prakriti (Connecting to greater than you from your kinship brings the purpose to your life)
- How to recharge body - by sleeping (7-8 hrs sound sleep, discharge the tiredness and reshape your internal ecosystem)
- How to improve your focus - make phone use and social media time-bound; switch off them whenever you can (specially when you are doing something put them completely off)
Wednesday, 22 February 2023
Andy Haryanvi Learning Course - 173 Vocabs:
- Single----राण्डा
- Boy-------छोरा
- Desi boy---मोल्लड़
- Girl-------छोरी
- Dirty girl-सुगली
- Child----बाळक
- Young----गाबरु/मलंग
- Rope---जेवङी
- Friend ----ढब्बी
- Girlfriend-ढब्बण
- Beautiful---सुथरी
- Women---बिरबान्नी
- Handsome--सुथरा
- Biceps---कब्जे
- Shoulders--खोवा
- Bone---हाड
- Enemy---बैरी
- Noise---खुड़का/रोळा
- Gussa ----छो
- Majak----मखोल
- Bakwas--अळबाद
- Love---लाड
- Brother---बीर
- Sister---भाण/बेब्बे
- Back---पाछै
- Thread---ताग्गा
- Winter---जाड्डा
- Cold air---शीळी बाळ
- Fever---ताप
- Blue-लील्ला
- White---चिट्टा/धौळा
- We----आप्पा
- Waiting---बाँट देखणा
- Please wait--थम जा / थ्यावस कर
- Deny--नाटणा
- Different---न्यारा
- Drama--खड़दू करना
- Near---नेड़े / लौवै सी
- Money---पीसे
- Complain--उलहाणा
- To remove---काढ़णा
- With--गैल/गैल्ला
- Strong---ठाड्डा
- Bad----भुंडा
- Weak-----माड़ा
- Rutba/hisab-टोहरा
- Excuse me - हाड्डे सुण
- Stair case---पैड़काळा
- Eraser---मिटा दे
- Hair----लटूर
- Garbage---अड़ंगा
- Cloth---लत्ते
- Jewellery---टूम ठेकरी
- Dung cake--गोस्से/थेपड़ी
- Rain---मीहं
- Milk---डोक्का
- Tea---चा
- Boild gram(चने)--बाकळी
- Butter milk---छा/शीत/लास्सी
- Onion---गंठा
- Garlic--लसण
- Soap---साब्बण
- Hot-------तात्ता
- what-------के
- Wall----भीत
- Blanket/रजाई--श्यौड
- why--------क्या त/क्यूं
- Naughty-----ऊत
- Very naughty-अल्बादी/खपित्तर/कुब्बादी
- How---क्यूक्कर
- really - -----अरे हम्बै
- Station------टेशन
- Village-----गाम
- Footwear---खौंसड़ा/छित्तर
- whats up- --के होग्या
- Fast fast-सैड सैड
- Amazing---कसूत्ता//आखर/एंडी
- Fast----तावली/तग्गाजे त
- Front----शाहम्मी
- Allmost done - कत्ती होग्या
- Landlord----लम्बरदार/नम्बरदार
- Bilkul---निरोळ/जमा
- Copy_/रीस
- Round ---गेड़ा
- Let him go - जान्न दै उसनै
- i dont know--बेरा नी
- More- -घणा
- Smooth ---- चीकणा
- Tight---कैड़ा/करड़ा
- Lady ------ लुगाई
- कसूर----खोट
- Ladai---रौला/खाड़े/राड़
- Shout loud---रुक्के/किलकी
- Pain----भड़क
- Father----- बाब्बू/बाप्पू
- Drunked---भंड
- To see---लखाना
- Less---घाट
- Mad---बावळा
- mother ---- माँ री
- Slapping --- जड़ दिया
- Use less --गाड्डण जोग्गा
- run away --- भाज जा
- stay here --- याहडे/ थमजा
- now -------- इभे
- Meet/milna---फेटणा
- not now-----इभी नी
- Down---तलै
- Body---गात
- Ball---गिंड्डूं
- Street----गॉल
- Pond---जोहड़
- never------- कधे भी नी
- Morning---तड़की/तड़के
- AfterNoon---दपैेहरी
- Wife -------- बहू
- Fullfill demand-माँग पुगाणा
- Husband----- बटेऊ/लोग/भर्तार/खसम
- Sunlight ------ घाम/चौंधा
- salt --------- नूण
- very--------- भतेरा/घणा
- gate-------- कुवाड
- Corner---कुण
- Knee-------- गोड्डा
- Please Stop--थम जा /डट जा
- Bat(चमगादड़)----चामचड़ी
- मुधुमखी-----भिरड्ड
- Finger ------ अंगली
- animal- ------डांगर
- ox- ----------बळद
- Crow---काग
- Buffalo son----कटड़ा/काटडा
- Human being---मानष
- Happy----राज्जी
- Hide----लुकणा
- Return something---उल्टा मोड़ देना
- Key---ताली
- rat----------मूसा
- Throw------बगाणा
- Put-------टेक / धर
- Like that ---उसके बरगा
- Hard work--खुभैेत
- Type (तरह)----जु/ढाल
- Time---टेम/बखत
- Somethimg went wrong---साक्का होगा
- Inside----भीत्तर
- Skin---बक्कल
- Tail---पुंजड़
- जैसा------कैसा
- Kasam--सूं
- बात मान लेना---हम्बी भरना
- रास्ता---राह
- स्टाइल मारना-गिरकाणा
- ज्यादा बनना -एंडी पाकना/माचणा
- कीचड़----चोड़ा
- घूंघट---ओल्हा
- कुछ---किम्मे
- Stone---टोरड़ा
- कितना---कतेक
- रोटी----टिक्कड़
- जैसे--जणू/जुक्कर
- किस टाइम---कोड़ बर
- पिल्ला--कुतरु
- Pagal है क्या---बावळी बूच है के
- कम---घाट
- ज्यादा--घणा
- परेशान---बिराण
- To cover face with cloth--- ढाट्टा मारना
- Dont be over smart---घणा चौधरी ना बण
- Pareshan kar dena---बिराणमाट्टी
- Person not doing according you---झकोई
- Gazab kar diya----चाले पाड़ दिए
- To enjoy -------काच्चे काटणा
Monday, 20 February 2023
The cruel customs of Manuwad, which Britishers banned!
>-1819 से पहले तक शूद्र पुरुष की शादी के बाद उसकी दुल्हन पहले तीन दिन तक ब्राह्मण शुद्धीकरण के नाम पर अपने पास रखता था,अंग्रेजों ने इस निर्लज्जता को 1819 में समाप्त किया,
>- कुछ सनातनी समुदायों(ब्राह्मण, राजपूत आदि)में पति के मरने पर उसकी चिता पर उसकी पत्नी को सती होने के नाम पर स्वमेव ही आत्महत्या करनी पड़ती थी।अंग्रेजों ने इस क्रूरता को1829 में बंध कराया,
>- धार्मिक आयोजनों पर सवर्ण नर बली के नाम पर शूद्रों की नर बलि दी जाती थी, इस क्रूरता को अंग्रेजों ने 1830 में प्रतिबंध कराया,
>- शूद्रों(दलित, पिछड़ों) को सवर्णों के सामने कुर्सी पर बैठने का अधिकार नही था, अंग्रेजों ने 1835 में ये अधिकार दिया।
>- सार्वजनिक भवन और पुल बनाने पर चरक प्रथा के नाम पर शूद्रों की नर बलि दी जाती थी, यह नीचता अंग्रेजों ने 1863 में बंद कराई,
>- त्रावणकोर(केरल)के ब्राह्मण राजा ने दलित महिलाओं को सार्वजनिक क्षेत्र में खुले स्तन जाना अनिवार्य था, यदि कोई दलित महिला स्तन ढकती थी तो टैक्स देने पड़ता था।
दलित महिला नागेली टैक्स देने के बदले में राजा के लठैतों को अपने दोनों स्तन काटकर दिये,इस कारण अधिक खून रिसाव से मृत्यु होने के दर्दनाक हादसे के बाद अंग्रेजों ने 26 जुलाई 1859 को दलित औरतों को स्तन ढकने का अधिकार दिया।
>- ब्राह्मण जजों की न्यायप्रियता पर प्रश्न खड़े होने पर अंग्रेजों ने 1919 में ब्राह्मणों को जज बनने पर रोक लगा दी थी,
>- ब्राह्मणों का प्रशासनिक सेवाओं में 100% आरक्षण/कब्ज़ा देखकर अंग्रेजों ने इनका 2.5% आरक्षण कर दिया था।
>- शूद्र समाज की जवान लड़कियों को मंदिर देव दासी के रूप रखी जाती थी,मंदिर के मठाधीश इनके साथ अय्याशी करते थे,इनकी अय्याशी से जो बच्चे पैदा होते थे,उन्हें हरि(ईश्वर) के भोग से उत्पन्न संतान बता उन्हें हरि के जन कहते थे,इसी शब्द से हरिजन जाति बनाई गई। इस नारि अपमान को भी अंग्रेजों बंद कराया था।
अंग्रेजों के अलावा मेरी क़ौम के महान पुरखों के साथ अन्य क़ौमों के महा पुरूषों ने धार्मिक,आर्थिक और राजसिक व्यवस्था के मालिकों की नीचताओं पर अंकुश लगवाया था।
सनातन/वैदिक/हिंदू आदि के लंबरदारी करने वालों पर घमंड करने वालों मैंने ये बहुत थोड़ा सा ही लिखा है।इनकी ऐसी नीचताओं के हज़ारों क्रूर से क्रूर प्रसंगों से अतीत और वर्तमान भरा पड़ा है।
इनकी इन्हीं नीचताओं के कारण भारत भूमि, धर्म,नारि, सभ्यता और सम्पदा को आक्रांताओं ने लूटा भी और हज़ार वर्षों से अधिक समय तक ग़ुलाम भी रखा था।
इन आक्रांताओं से संघर्ष अगर किसी ने किया तो उनमें सर्वाधिक मेरी नस्ल के पुरखों ने किया था और इनसे मुक्ति में बलिदान भी 94%मेरी नस्ल ने दिया है।
🙏जितेंद्र सहरावत🙏