Friday, 20 March 2026

हरियाणा की पहली विदेशी बहू महारानी ओलिव!

हरियाणा की पहली विदेशी बहू महारानी ओलिव


साल 1900 की साल थी। नाभा रेलवे स्टेशन पर स्कर्ट में एक विदेशी लडकी अपनी मां के साथ चहलकदमी कर रही थी और देखने वाले हर आंख उस पर टिक जाती थी। उस दौर में स्कर्ट पहने विदेश लडकी का यूं घुमना कम हैरानी वाला नहीं था और ऊपर से वो बला की खूबसूरती वाली विदेशी लडकी जो ठहरी।
उस लडकी का नाम था ओलिव और रेलवे स्टेशन पर वह अपनी मां मिसेज हॉर्डिंग और भाई ह्यूगेन मोनलिस्कय के साथ घूम रही थी। वो एक सर्कस कंपनी में काम करती थी जो देश दर देश अपना खेल दिखाते चले आ रहे थे।

उसी समय स्टेशन पर एक गाडी पहुंची और उसी गाडी में जींद स्पेशल के डिब्बे भी जुडे हुए थे। जींद स्पेशल मसूरी से आ रही थी और उसमें बैठे थे जींद के राजा रणबीर सिंह जो अपनी विशेष गाडी में राजधानी संगरूर लौट रहे थे।

राजा की नजर ओलिव पर पडी तो उन्होंने अपने कर्मचारियों को उनकी मौजूदगी के बारे में जानकारी लेने को कहा। सर्कस की जानकारी मिलने पर राजा ने सर्कस को संगरूर आकर अपने करतब दिखाने का मौका दिया।

जल्द ही सर्कस पार्टी संगरूर पहुंची और सर्कस ने एक अनोखा करतब दिखाया जो उस समय किसी ने ना देखा था और ना सुना था। आजकल को हॉट एयर बैलून सबने देखे हैं लेकिन 1900 में ऐसे करतब भला किसने देखे होंगे। गुब्बारा आसान में उठा और उसमें खडी ओलिव को हाथ हिलाते देख न केवल पूरे संगरूर की जनता बल्कि राजा रणबीर सिंह का मन भी हवा भी उड चला।

पांच छह मील दूर जंगल में वह गुब्बारा गिरा तो महाराजा के घुडसवारों ने जमीन पर गिरने से पहले ही ओलिव को थाम लिया। राजा ने बहुत सारे इनाम दिए और इसके साथ ही ओलिव की मां को एक पेशकश भी कर दी कि उस लडकी का विवाह उनसे कर दिया जाए। एक इकरारनामा लिखा गया और वो ओलिव के पास ही रखा गया।

शादी की रस्म अदा की जा रही थी जब मुख्यमंत्री मिर्जा उमराव बेग और सरदार शमशेर सिंह जैसे अधिकारियों ने इससे दूर रहना ही उचित समझा। रात को सिक्ख रीति रिवाजों से विवाह संपन्न हुआ और रानी का नाम रखा गया ओलिव जसवंत कौर। शादी तोपों ने दुनिया को बता दिया कि राजा रणवीर सिंह ने शादी कर ली है।

ओलिव की मां और भाई ने सर्कस की नौकरी छोड दी ओर राजमहल की ऐशोआराम की जिंदगी जीना शुरू कर दी। ओलिव के भाई को राजा ने अपना निजी सचिव बना लिया। ओलिव से 5 सितंबर 1901 को एक बेटा भी हुआ था जो छह महीने का होकर चल बसा। एक फरवरी 1904 को रानी ओलिव ने एक पुत्री को जन्म दिया और उसका नाम रखा गया डौरोथी। इसी के नाम पर दादरी में एक राजकीय इमारत का नाम डौरोथी विला रखा गया जो आजकल शायद गेस्ट हाउस है दादरी में।

राजा ओलिव को दिलोजान से चाहते थे और इस दौरान अंग्रेस सरकार ने 1918 में युद्ध में राजा के योगदान को देखते हुए उनको राजेंद्र बहादुर का खिताब दिया दो तोप निजी और दो तोप पुश्तैनी में बढोतरी की गई। राजा रणबीर सिंह अब महाराजा बन चुके थे ओर औलिव महारानी।

हर दरबार के षडयंत्र महाराजा जींद के दरबार में भी चल रहे थे लेकिन किसी ने महाराजा को यह खबर पहुंचा दी कि महाराजा से विवाह होने से पहले ओलिव एक बार गर्भवती हुई थी और एक नाजायज बच्चे को भी जन्म दिया था। ये खबर जांच पडताल में सच निकली तो महाराजा का दिल टूट गया। वो इसको अपने अंदर पी गए लेकिन खिन्न रहने लगे और महारानी से जी उचाट हो गया।

इसी बीच उनकी मुलाकात कुमाऊं की एक पंद्रह साल की बाला से करवाई गई जो बहुत बुद्धिमान और व्यवहारकुशल थी। पांच फरवरी 1917 को महाराजा रणबीर सिंह ने उससे विवाह कर लिया और उसे नाम दिया गुरचरण कौर। शादी की रस्म रात को दादरी में नवाब बहादुरजंग खां के किले के दीवानखाने में हुई। उस समय महारानी ओलिव अपनी पुत्री डौरोथी के संग डौरोथी विले के ड्राइंगरू में बैठी थी और अपने बेटी को बता रही थी आज एक नई महारानी आ रही है। इसी के साथ दोनों के दिलों में दूरियां भी बठती रही।

1921 की गर्मियों में महाराजा दोनों महारानियों व बच्चों के साथ विदेश में छुट्टियां मनाने गए। छोटी महारानी तब तब दो राजकुमारियों और एक राजकुमार को जन्म दे चुकी थी। कुछ अंग्रेज महाराजा से मिलने आए तो उन्होंने ओलिव से दूसरी महारानी के बारे में पूछा तो ओलिव ने कहा कि वह महाराजा की रखैल है। बस ये लडाई इतनी बढी कि महाराजा और महारानी को हमेशा के लिए विदा होना पडा।
ओलिव इंग्लैंड में ही रही उसके खर्च (प्रिवी पर्स) का हिस्से उसे इंग्लैंड के एक बैंक में हर महीने मिलता रहा। जब तक वह जीवित रही वह उसे निकलवाती रही और बहुत आराम की जिंदगी 1954 में आखिरी सांस तक उसने जी।

डारौथी को महाराज अपने साथ भारत ले आए थे। समय आने पर उसका विवाह कर दिया लेकिन डारौथी ने जो गुल खिलाए उनका जिक्र करेंगे राजा रणबीर सिंह की रूह को भी अशांति प्राप्त होगी।

खैर ये थी महाराजा रणबीर सिंह और महारानी ओलिव की प्रेम और अलगाव की कहानी। चूंकि जींद रियासत की बहू थी महारानी ओलिव तो उनको पहली विदेशी बहू का दर्जा भी दिया जा सकता है, आजकल एक सीरियल भी चल रहा है विदेशी बहू।

अप्रैल 1997 के हरियाणा संवाद में यह लेख राव विजय प्रकाश सिंह ने प्रकाशि करवाया था

Dharmendra Kanwari!



Tuesday, 3 March 2026

Feb 2016 Haryana Riots: इस केस के कुछ तथ्य है जिन्हें आज तक छुपाया जा रहा है। कुछ तथ्य इस प्रकार है

  1. ये कोई नहीं बताता 35+1 का नारा किसने दिया। ये किसकी दिमाग़ की पैदावार है। 35 कौन थे और 1 कौन?
  2. धारा 144 लगी होने के बावजूद भिवानी स्टैंड पर सैंकड़ों प्रदशनकारियों को जिन के हाथों में 35+1 ki तख्ती थी और एक रेहड़ी जिसमे पत्थर थे क्यों इकट्ठे होने दिए।
  3. वो प्रदर्शनकारी पुलिस के संरक्षण जिसमे DSP भी था कोर्ट तक आए। किसलिए।
  4. बाहर JNU की माँग पर वकील धरने पर बैठे थे उन पर पुलिस की हाज़री के हमला किया। पुलिस चुप क्यों रही।
  5. NRS कॉलेज और जाट कॉलेज के हॉस्टल से बच्चों को निकाल कर क्यों पूता गया और उनको इलाज देने से भी मना कर दिया।
  6. सबसे पहली गोली आईजी की कोठी पर चली और बच्चे की मौत हुई। उसको क्यों छुपाया गया।
  7. कैप्टन अभिमन्यु की कोठी पर 22 पुलिस कर्मियों की सशस्त्र टुकड़ी भेजी गई थी उसको कोठी पर हमले से एन पहले किसके आदेश पर वापिस बुलाया गया और आग लगाने वालों को सुविधा और संरक्षण किसने दिलवाया।
  8. सुदीप कलकल को इस केस में अभियुक्त बनाया गया जबकि वो कैप्टेन अभिमन्यु की कोठी को बचाने में था और उसके साथ वहाँ मार पिटाई भी हुई। सुदीप ने इस वक्त के DC को लगातार फ़ोन करके पुलिस और फायर ब्रिगेड भेजने की गुहार लगायी लेकिन डीसी बहेरा ने कहा तो क्या “गोली मरवा दे क्या” ये कॉल रिकॉर्डेड है। ऐसा एक DC ने क्यों कहा?
  9. हरियाणा में सरकारी तौर पर कॉल रिकॉर्डिंग की एक कंपनी है जो तीन साल तक की कॉल रिकॉर्डिंग्स रख सकती है। उस समय के IG CID Rao ने January 2016 से June 2016 तक की रिकॉर्डिंग्स क्यों नष्ट करवायी जबकि हाई कोर्ट तक में केस चल रहे थे। ये झा कमीशन की गवाही में दर्ज है और Rao इस का उत्तर नही दे पाये।
  10. पुलिस ने तथाकथित संदिग्धों की कॉल रिकॉर्डिंग फ़रवरी में करनी शुरू कर दी थी। हर रिकॉर्डिंग के लिए ग्रह मंत्रालय भारत से अनुमति लेनी होती है।हरियाणा में रिकॉर्डिंग तो हुई जनवरी में और अनुमति आई मार्च में। ये धांधली किस लिए।
  11. भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर जब एक उंगली उठती है तो तीन उंगली के साथ अंगूठा सरकार की तरफ़ उठता है।
  12. झा कमीशन की कार्यवाही समाप्त हुए पाँच साल से ज़्यादा हो चुके। क्यों अपना फ़ैसला नहीं सुना रहा। कुछ सवाल उठे है वहाँ जिनका जवाब नहीं है और इसीलिए उस रिपोर्ट पर बैठे हैं और सरकारी पैसे पर ऐश कर रहे हैं।
  13. पुर्व डीजीपी प्रकाश सिंह आयोग कि रिपोर्ट सार्वजनिक करने से क्यों डर रहीं हैं भाजपा सरकार, जबकि ये आयोग खुद सरकार ने बनाया था ।।
Rakesh Arya Sinhmar