Note--जाटो अगर ये पोस्ट मिस करदी तो सब कुछ मिस कर दोगे, फेसबुक के इतिहास में सबसे बड़ी सच्चाई खोज कर लाया हूँ सबूत समेत,
अपने कल्चर के मूल्यांकन का अधिकार दूसरों को मत लेने दो अर्थात अपने आईडिया, अपनी सभ्यता और अपने कल्चर के खसम बनो, जमाई नहीं!
Sunday, 19 April 2026
जाटो का इतिहास राजपूतो ने कैसे अपना बनाया!
Wednesday, 15 April 2026
गीता प्रेस गोरखपुर के द्वारा छापी गई रामचरित मानस के दोहे
गीता प्रेस गोरखपुर के द्वारा छापी गई रामचरित मानस के दोहे
"शुद्र ग्वार ढोल और नारी
ये सब ताड़ना के अधिकारी "
के ताड़ना शब्द का अर्थ 1925 में 'दण्ड" व 2025 में "शिक्षा " क्यों और कैसे हो गया?
Monday, 13 April 2026
यहूदी कयामत तक भटकते ही रहेंगे!
यहूदी कयामत तक भटकते ही रहेंगे इनको कोई अपनी जमीन में रहने नही देगा ये इतने नाशुर हे जहा भी रहे हे इन्होंने उत्पात ही मचाया है!!
"चलीये देखते है यहूदियों ने 1000 वर्षों कितनी जंग जीती है ?? "
1080 में फ्रांस से भाग गए
1098 में चेक रिपब्लिक से भाग गए
1113 में क्यूवान रूस से बाग निकले ,
1113 ही में इनका कतले आम हुआ ,
1147 में एक बार फिर फ्रांस से निकल दिया गया ,
1171 में इटली से भाग गए ,
1188 में इंग्लैंड से निकल दिया गया
1198 में इंग्लैंड से भाग निकले ,
1290 इंग्लैंड से भाग निकले ,
1298 में स्विट्जरलैंड से भाग निकले जब 100 यहूदियों को फांसी दी गई ,
1306 में एक बार फिर फ्रांस से दे दखल किए गए ,300 यहूदियों को जिंदा जलाया गया ,
1360 में हंगरी से भाग निकले ,
1391 में स्पेन से निकाला गया 3000को फांसी 5000 को जिंदा जलाया गया ,
1394 में फ्रांस से एक बार फिर भाग निकले ,
1407 पोलैंड से भाग निकले ,
1492 में एक बार फिर स्पेन से भगाया गए इनके लिए हमेशा की पाबंदी लगाई गई ,
1492 में सिसली से बे दखल किया गया ,
1495 में लिथुआनिया से निकाले गए
1496 पुर्तगाल से भाग निकले ,
1510 में इंग्लैंड से भाग निकले ,
1516 में दुबारा पुर्तगाल सै निकल गए ,
1516 में सिसली में कानून बनाया गया यहूदी केवल यहूदी बस्तियों में ही रहेंगे ,
1524 में ऑस्ट्रिया से भाग निकले ,
1555 में फिर पुर्तगाल से भगाया गया ,
155 में रोम में कानून बना जिसमें इनको अपनी ही बस्तीयों में रहने की इजाजत मिली ,
1556 में इटली से निकले गए ,
1570 में जर्मनी से निकाल दिया गया ,
1629 में स्पेन और पुर्तगाल से भगाया गया ,
1634 में स्विट्जरलैंड से फिर भगाया गया ,
1655 में एक बार फिर स्विट्जरलैंड से भगाया ,1660 में कीफ से निकाला गया ,
1701 में स्विट्जरलैंड हमेशा के लिए निकाल दिया गया,
1806 में नेपोलियन का अल्टिमेटम,
1828 में कीफ से भाग निकले ,
1933 में जर्मनी से निकले वहां नस्ल कसी की गई इनकी ,
14 मई 1948 को फिलिस्तीन ने अपने मुल्क में यहूदियों को पनाह दी ,
इसके अलावा सबसे पहले रसूल अल्लाह ने खुद यहूदियों को शहर से निकाल दिया ,ये यहूदी की तारीख है जिसे आप खुद भी पढ़िए और दूसरों को भी शेयर कीजिए ,,ये दुनिया की अकेली ऐसी कौम है जो जमीन पर आलम ए इन्सानियत के नाम पर कलंक है !
Sunday, 12 April 2026
कणकां दी मुक गई वाखी, के ओ जट्टा आई वैसाखी!
इस कहावत में 'जट्ट' शब्द ही क्यों है, जानने हेतु अंत तक पढ़ें!
हरयाणी भाषा में 'मेख' व् पंजाबी भाषा में 'वैसाखी' की आप सभी को लख-लख बधाईयाँ!
जलियांवाला बाग़ शहीदी दिवस भी आज ही है - प्रणाम शहीदां नूं!
खालसा पंथ स्थापना दिवस आज भी ही है, अंतर्राष्ट्रीय जाट दिवस भी आज ही है - बधाई हो दोनों की!
और यही वजह है कि इस शीर्षक की कहावत में 'जट्ट' शब्द है; क्योंकि आपके मिसललैंड व् खापलैंड से बाहर जाते ही उदारवादी जमींदारा नहीं है; व् क्योंकि आपके पुरखे इस कांसेप्ट के संस्थापक-पोषक रहे; इससे उनकी 'आर्गेनिक-मार्केटिंग' हुई व् उससे उनकी यह आर्गेनिक ब्रांड बनी व् वह ऐसी कहावतों में ऑर्गेनिक्ली स्वीकृत हुए! आर्गेनिक यानि स्वत: गुण से सर्व द्वारा स्वीकार्य; कृत्रिम यानि manipulated नहीं कि जिसको खड़ा करने को propagandas लगें!
जय यौधेय! - फूल मलिक
जो अन्तर्जातीय विवाह को ये कहकर बेहतर बताते है कि ये diversity बढ़ा कर better genes देता है वो facts को manipulate कर रहे है
जो अन्तर्जातीय विवाह को ये कहकर बेहतर बताते है कि ये diversity बढ़ा कर better genes देता है वो facts को manipulate कर रहे है। genetic depression 2 तरह के होते है 1. ज्यादा नजदीक शादी करने से होने वाला inbreeding depression जिस से बचने के लिए हम गोत छोड़कर शादी करने की
Wednesday, 1 April 2026
नख-वख कुछ नहीं होता है; राजपूत राजाओं के इशारों पर, भाटों ने तुम्हारे अनपढ़ पुरखों का faddu काट दिया।
नख-वख कुछ नहीं होता है; राजपूत राजाओं के इशारों पर, भाटों ने तुम्हारे अनपढ़ पुरखों का faddu काट दिया।
वैसे तुम तो तुम्हारे अनपढ़ पुरखों से भी अधिक अनपढ़ हो, इसीलिए तुमने नखों की कहानियों के आधार पर अपनी झूठी कुलदेवियाँ खोजनी शुरू कर दी।
वैसे “नख” क्या होता है?
राजपूत जाति की सामाजिक सरंचना सात पदानुक्रमों में बंटी हुई है:
१) *जाति* : राजपूत
२) *वंश* : सूर्यवंश, चंद्रवंश, ऋषिवंश, अग्निवंश, नागवंश
३) *कुल* : छत्तीस कुल, जिनकी वास्तविक संख्या अठतरह से ऊपर है (बिंगले)
४) *साख* : प्रत्येक राजपूत कुल कई साखों में बँटा हुआ है
५) *गोत्र* : प्रत्येक राजपूत साख का एक ऋषिगोत्र होता है
६) *खाँप* : प्रत्येक राजपूत साख कई खाँपों में बँटा हुआ है
७) *नख* : प्रत्येक राजपूत खाँप कई नखों में बँटी हुई है
अब आपको एक उदाहरण देता हूँ:
जयमल मेड़तिया का पूरा नाम इस प्रकार लिखा गया: जयमल, राजपूत (जाति), सूर्यवंशी (वंश), राठौड़ (कुल), कामधज (साख), गोतम (गोत्र), मेड़तिया (खाँप), विरमदेवोत (नख)।
तो फिर अन्य जातियों के नख कैसे हुए? - भाट की बही में कहानी इस प्रकार के टेम्पलेट में लिखी हुई है: एक बार एक राजपूत था, उसने किसी पराई जाति की महिला का डोला लूट लिया। उस महिला से होने वाली संतानें अपनी माता की जाति में शामिल हो गए। माता की जाति में क्यों? क्योंकि हिन्दू शास्त्रों में प्रतिलोम विवाह अमान्य है, इसीलिए वो राजपूत उस महिला को पत्नी का दर्ज़ा नहीं दे सकता था, इसीलिए वो महिला उसकी रखैल मात्र थी। रखैल की संतानें अपनी माता की जाति में ही शामिल हो सकती हैं।
कभी नॉर्मन ज़िगलर, रिचर्ड सरन इत्यादि को पढ़ो। कभी नैणसी की ख्यात और विगत पढ़ो। कुञ्जियों को पढ़ने से कुछ नहीं समझ आएगा। - Shivatva Beniwal








