The Sikhs
अपने कल्चर के मूल्यांकन का अधिकार दूसरों को मत लेने दो अर्थात अपने आईडिया, अपनी सभ्यता और अपने कल्चर के खसम बनो, जमाई नहीं!
Friday, 14 March 2025
Guru Nanak Dev Ji was a Jat - as "The Sikhs" Book by Sir John. J.H. Gordon written in 1902
Thursday, 13 March 2025
आखिरकार सातवीं सदी के चच-दाहिर के राज से ले के आज के बीजेपी-आरएसएस के राज तक, फंडियों ने अपनी दुर्गति देश के खाते में लिखने की परम्परा को कितनी सिद्द्त से निभाया है!
कुछ नहीं बदला फंडियों की थ्योरी-फिलोसॉफी व् 25% अक़्ली विजन में सातवीं सदी के चच-दाहिर के राज से ले के आज के बीजेपी-आरएसएस के राज तक! 4-5 पीढ़ियां लगा के 100-50 साल लगा के येन-केन-प्राकेण सत्ता पर काबिज होते हैं व् फिर वही ढाक के तीन पात; इनकी थ्योरी की यह जन्मजात 'गुलामी' की मानसिकता शायद ही रहती दुनिया तक भी कुत्ते की दुम सीधी नहीं होती की तर्ज पर कभी ही पीछा छोड़े! वह कैसे जरा नीचे पढ़िए व् वीडियो देखिए!
'मैं देश नहीं बिकने दूंगा' इसने जिस दिन से बोलना शुरू किया था; मेरे जैसों ने उसी दिन से मानना शुरू कर दिया था की देश को बेचेगा ही यह| और इस बेचने की पहले शुरुवात हुई अडानी-अम्बानी-टाटा आदि जैसों को सारा सरकारी तामझाम बेचने से; और अब स्टारलिंक की एंट्री के जरिए, देश को अमेरिका को बेचने से| अभी जो यह बिना invite के खुद अपॉइंटमेंट ले के भागा-भागा oval ऑफिस वाइट हाउस गया था; उस दिन किन-किन समझौतों पे साइन करके आया है व् स्टारलिंक की एंट्री को पुण्यप्रसून जैसे भारत की आर्थिक गुलामी की शुरुवात कहने लग गए हैं; देखें ऊपर वाली वीडियो में; अभी आगे और क्या-क्या बिकने वाला है अमेरिका के हाथों! जिस दिन से यह नारा लगाया था कि 'मैं देश नहीं बिकने दूंगा' उस दिन से शुरू हुई आंतरिक आर्थिक गुलामी का स्टारलिंक के जरिए, "बाह्य गुलामी" में बदलने की शुरुवात बता रहा है पुण्यप्रसून|
वर्णवाद थ्योरी 25% अक़्ली व् 75% बेअक्ली थ्योरी है; जब तक व् जब-जब इससे बचोगे, देश तरक्की करेगा; व् जब-तब इसके चंगुल में फंसोगे देश गर्त में जाएगा ही जाएगा; 100 साल लगा के, 4-5 पीढ़ियां खपा के 25% अक़्ली आरएसएस वालों ने अंतत: अपनी गति पा ही ली! क्योंकि चार वर्ण में खुद को बाँट के चलते हैं, तो खुद को व् बाकियों में भी 25% अक़्ल ही तो छोड़ते हैं; बाकी 75% जिसको यह स्वघोषित खट्टर ताऊ वाली 'कंधे से ऊपर की मजबूती कहते हैं'; वह तो manipulation-polarisation, इस बनाम-उस वाली बेअक्ली के कुछ है ही नहीं!
जय यौधेय! - फूल मलिक
सोर्स: https://www.youtube.com/watch?v=RxpzNbF43lg
Saturday, 8 March 2025
DSC में फैलाई जा रही फंडियों द्वारा जाट के नाम की दहशत:
*DSC में फैलाई जा रही फंडियों द्वारा जाट के नाम की दहशत:*
और इसमें वह पोलिटिकल पार्टीज भी खासा ध्यान देवें, जिनको कल को हरयाणा की सत्ता चाहिए!
बात ये है कि फंडियों के सबसे बड़े ग्रुप के प्रचारकों द्वारा आजकल ग्राउंड पर हरयाणा विधानसभा चुनाव से नए उपजे DSC वर्ग को जाटों के खिलाफ खड़ा करने हेतु, कुछ इस तरीके की बातें उनके कानों में फूंकी जा रही हैं:
1 - 29 मार्च के बाद से कलयुग के खत्म होने का आगाज हो रहा है, व् प्रलय आने वाला है; जो कि सनातन धर्म के विघटन व् संहार की तरफ इशारा कर रहा है; जिसमें कि हमको सबसे बड़ा खतरा जाट से ही है| अत: आपको जाटों से हमारी रक्षा करनी होगी| और वह रक्षा होगी, हमें वोट करते रहने से व् जाट के विरुद्ध हमारा कवच बनने से|
2 - किसान आंदोलन में देख लिया ना कैसे जाटों ने सनातन धर्म के उच्च कुलीन वर्ग को गालियां दी, राकेश टिकैत ने मंदिरों को डांट भी लगा दी थी कि जब गुरद्वारे-मस्जिद किसान आंदोलन में लंगर लगा रहे हैं तो मंदिर क्यों नहीं? तो इस बात के आक्रोश में जाटों में नीचे-नीचे अभी भी दर्द है व् यह दर्द किसी भी दिन फटेगा, तो आप DSC वाले वीरों को ही इन जाटों से हम निर्बलों की रक्षा करनी होगी|
3 - जाटों ने तुम्हें हमेशा तंग किया है, तुम्हारे साथ अन्याय किया है; कभी तुम्हें सम्मान नहीं दिया; इसलिए भी इनसे बदला लेना चाहते हो तो हमारे रक्षक बनो; हम तुम्हें शरण देंगे, उचित सम्मान देंगे|
व् ऐसी ही अन्य तमाम तरह की बेहूदगियों से DSC वर्ग को जाट से काट कर, उसके खिलाफ करने की ग्राउंड पे वर्कशॉप्स, गुप्त-मीटिंगे, बैठकें चल रही हैं| यह रिपोर्ट दो-तीन गांव से आई है व् इसका फैलाव जारी है|
जबकि सच्चाई यह है कि DSC एक ऐसा वर्ग है, जिसका जाट जितना मान-सम्मान-रोजगार का बंदोबस्त किसी ने नहीं करके दिया कभी से; फंडी तो इतने भी नहीं कि DSC वालों को मंदिरों में सम्मान से पूजा तक करने देवें| परन्तु अब यह इस बात का ढोंग भी कर रहे हैं कि देखो मंदिरों में तुमको उचित सम्मान व् समरसता हम दे रहे हैं|
ऐसे में हर वह जाट या जाट जैसी सोच वाला किसी भी अन्य वर्ग-जाति-धर्म का इंसान; इस बात को समझे कि यह कितना खतरनाक जहर है और इसकी काट के लिए सरजोड़ कर काम करना शुरू कीजिये; उसके लिए निम्नलिखित तरीके अपनावें:
1 - जितने भी व्हाट्सएप्प पर फंडियों के ग्रुप्स व् DSC ग्रुप्स जिनमें फंडी घुसे बैठे हैं; उनमें आप भी एंट्री लीजिये; वहां दो चीजें कीजिये; एक तो जाट के खिलाफ सीधे जाट का नाम ले कर, या कवरिंग वर्ड्स जैसे कि "हरयाणा के दबंग", "किसान आंदोलन वाले", "सबसे बड़े जमींदार" आदि शब्दों के प्रयोग हो कर ऎसी बातें हो रही हों, तो उनके स्क्रीनशॉट्स ले के सुरक्षित सेव कर लें, व् आप-हम जैसे समान विचारधारा वालों से उनको साझा करें| दूसरा यह पहचानें कि वहां उस ग्रुप में ऐसी बातों का विरोध करने वाला कौन है; उसको व्यक्तिगत रूप से कांटेक्ट करें व् इस पर विचार करवाएं कि उस ग्रुप में इन बातों को कैसे रोका जाए|
2 - आपके गाम में DSC ग्रुप्स में जितने भी ख़ास मित्र प्यारे हैं विश्वसनीय हैं; उनसे इस प्रोपगैंडा बारे प्राइवेट या विश्वस्त साथियों के समूह में चर्चा करें; पहले उनको ऊपर बताए तरीके से जाट बारे उनके प्रति ईमानदारी व् इंसानियत के पुरखों द्वारा बरते सिद्धांत बताएं व् फिर उनसे कहें कि आगे कोई ऐसी बात करने, व्यक्तिगत रूप से आवे, कॉल करे या ग्रुप्स में बात करे तो उनके स्क्रीनशॉट ले लेवें, रिकॉर्डिंग कर लेवें व् आप से साझी करें|
इसके अतिरिक्त आपको मौके के अनुसार जो जतन सही लगे उसको अपना के इन चीजों को रुकवाएं| और इसको करने के लिए आप गाम में हों, शहर में या विदेश में; जहाँ बैठे हो वहीँ से अपने सर्किल को एक्टिवेट करके यह कार्यवाही करें; परन्तु खुद का बचाव पहले जरूर बरतें|
और इसमें वह पोलिटिकल पार्टीज भी खासा ध्यान देवें, जिनको कल को हरयाणा की सत्ता चाहिए! पोलिटिकल पार्टी भी इस बारे इस तरह के कुछ हल कर सकती हैं; अब पांच साल हाथ पे हाथ धर के बैठे रहोगे व् इलेक्शन के 3 महीनों में सब आपके पक्ष का बन जाए, ऐसा नहीं होने वाला है! अभी से काम पर लगाइए अपने कैडर को|
Friday, 28 February 2025
Why Sir Chhoturam get Jats recruited in Jat Regiment for Britishers?
Fandi स्पोंसर्ड एक "बर्बादीकिसान" ग्रुप "खाप-खेड़ा-खेत कल्चर-किनशिप" के महापुरुषों को शौर्यहीन करने पर लगा हुआ है व् इसी कड़ी में उन्होंने निशाना बना रखा है सर छोटूराम को| फैलाते फिर रहे हैं कि क्यों सर छोटूराम ने अंग्रेजों के लिए जाटों को उनकी फ़ौज में भर्ती करवाया था? व् इसी बिंदु का ओहड्डा ले के वह सर छोटूराम को अंग्रेजों का पिट्ठू बरगलाते फिर रहे हैं|
इनको यह सलंगित वीडियो भेजें, इसमें प्रख्यात दार्शनिक डॉक्टर हिम्मत सिंह सिन्हा जी बता रहे हैं कि क्यों सर छोटूराम ने ऐसा किया था| डॉक्टर सिन्हा के अनुसार सर छोटूराम ने अगत भांप ली थी कि अगर अंग्रेजों की बजाए हिटलर का साथ दिया गया तो अंग्रेज जाएंगे व् नाजी यहाँ आ जाएंगे| जबकि अंग्रेजों की हालत वैसे ही पतली हुई पड़ी थी, उन दिनों|
वह तो शुक्र है कि हिटलर मारा गया, वरना इस बात से कौन इंकार कर देगा कि ऐसा नहीं हो सकता था अगर हिटलर जिन्दा रहता व् वह जीत भी जाता तो; इंडिया पर वह अपना कब्जा जमाता?
इस बात से नेता जी सुभाषचंद्र बोस के निर्णय पर बात करना बनता है कि क्या फिर नेता जी सही थे, जो हिटलर का साथ दे रहे थे; या वह हिटलर को सिर्फ इस्तेमाल कर रहे थे; अंग्रेजों व् नाजियों की लड़ाई का फायदा उठा कर? खैर, ना तो उस वक्त नेता जी ही बचे व् हिटलर भी आत्महत्या कर गया; अन्यथा दोनों जिन्दा होते तो संभावना थी कि सर छोटूराम वाली बात ज्यादा सच साबित होती|
Jai Yaudheya! - Phool Malik
और इस तरह ज़ेलेन्स्की, ट्रम्प व् वांस दोनों से दबा नहीं व् नहीं की मिनरल डील साइन!
यूक्रेन वाले ज़ेलेन्स्की के साथ ट्रम्प का पेंचा उसी मैटर पे फंसा है जिसपे अन्धभक्ताधिराज मोदी के साथ फंसा था| मोदी भी पहले इलेक्शन कैंपेन कर आया व् बाद में वहां गए-गवाए को ट्रम्प ने बुलाया लास्ट इलेक्शन के दौरान तो मिलने भी नहीं गया| यही ज़ेलेन्स्की ने किया, कमला हैरिस की इलेक्शन कैंपेन करके आया था पेंसिलवेनिया में सितंबर में|
परन्तु मोदी व् ज़ेलेन्स्की में दिन रात का फर्क है; मोदी जहाँ चुपचाप जहाँ कहा वहां साइन कर आया व् ना ही ट्रम्प उसको ओवल हाउस (वाइट हाउस) के गेट पर लेने आया था, बल्कि उसकी एक कर्मचारी मात्र आई थी; ना मोदी को बुलाया गया था, बल्कि मोदी खुद अपॉइंटमेंट ले के गया था|
जबकि ज़ेलेन्स्की को ट्रम्प ने बुलाया भी, गेट तक खुद लेने भी आया; भीतर अच्छी गर्मागर्म बहस हुई; खूब ज़ेलेन्स्की को दबाने की कोशिश की ट्रम्प व् वांस दोनों ने; परन्तु दबा नहीं ज़ेलेन्स्की व् ना ही मिनरल्स डील पे साइन किए| हार बेशक जाए बंदा, परन्तु दुनिया व् इतिहास उसको हार के भी जीता हुआ ही बताएगी; क्योंकि ट्रम्प व् वांस दोनों ने हाँगा लगा लिया वो भी अपने घर में बैठा के; परन्तु बंदा डील साइन नहीं करके आया!
शायद कल्चर का फर्क है यह; मोदी जहाँ एक फंडी-वर्णवादी कल्चर से आता है; जिसका अंत आप में दब्बूपन व् भीरुता का आना होता ही होता है; वहीँ उक्रेन का कल्चर एक दम विपरीत है| शायद उक्रेन के आसपास से ही खाप-खेड़ा-खेत कल्चर-किनशिप को मानने वाले समाजों जैसे की जाट का ओरिजिन बताया जाता है; इसके ऊपर ही तो है सीथियन रीजन; जहाँ से जाट का उदगम बताया जाता है; शायद उक्रेन भी इसका पार्ट ही हो|
यही वो एथिकल गट्स हैं जिनको फंडियों से बचा के आगे अगली पीढ़ियों में बढ़ाने की बातें हम करते हैं| पिछले दस-ग्यारह सालों से खापलैंड व् मिसललैंड पर वर्णवादी फंडी लॉबी और क्या कर रही है, कभी 35 बनाम 1 तो कभी अग्निवीर तो कभी किसान आंदोलनों को दबाने या तोड़ने की कोशिशों के जरिए; परन्तु शाबाशी है इन खापों व् खालसा वालों की, कि मंदा तुर रहे हैं; परन्तु टूर रहे हैं; लेकिन इन फंडियों के आगे सरेंडर नहीं कर रहे| उम्मीद है कि हम इस डेमोक्रेटिक व् रिपब्लिकन बेबाकपन को ऐसे ही कायम रख के अगली पीढ़ियों दे पाएंगे|
जय यौधेय! - फूल मलिक
https://www.youtube.com/watch?v=3YyaYuBsJQ0
Monday, 24 February 2025
'छावा' : हिंदुओं की 'हीनता बोध' पर नमक मलने की कहानी!
14 फरवरी को विकी कौशल अभिनीत फिल्म 'छावा' महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गोवा में टैक्स फ्री हो चुकी है। फिल्म की 'सफलता' और चर्चा के कारण लोग शिवाजी के बेटे संभा जी के बारे में और ज्यादा जानने के लिए उत्सुक हो रहे हैं। उनका पहला पड़ाव Wikipedia है।
Friday, 7 February 2025
सातवीं सदी से तो हम देखते-पढ़ते-सुनते आ रहे हैं कि अंतत: "इंडिया में पाई जाने वाली फंडी पॉलिटिक्स" का हश्र यही होता है जैसा "ट्रम्प ने मोदी व् बीजेपी पॉलिटिक्स" के साथ किया है!
Chronological आर्डर में समझिए:
1) चच-दाहिर ने धोखे से एक किसानी कौम से आने वाले राजा को सत्ता से हटाकर सत्ता हथियाई; तो मुहम्मद बिन कासिम चढ़ आया व् उस राजा को इतनी बुरी तरह से हराया कि उसकी बेटी तक को बंधी बना के ले गया| सुनते हैं कि मुस्लिम इतिहासकारों ने उस वक्त में किसी ने उनके इस हमले या कृत्य का विरोध कर मुस्लिम सेना के सिंध के मैदानों में 5 हजार सैनिक मारे तो वह खापों वाले जाट बताए जाते हैं| फंडी ही कहते हैं कि श्राप नाम की कोई बला होती है, लग जाए तो मलियामेट कर देती है, किसानी कौम को सताने का श्राप झेला; क्योंकि उस वक्त के इतिहासकार यह भी लिखते हैं कि चच व् दाहिर जाटों से इतने डरते थे कि उन्होंने जाटों का हथियार ले के चलना व् घोड़ों पर चलना दोनों बंद कर रखे थे|
2) सन 1025 में गज़नी गुजरातियों का सोमनाथ लूट के ले गया व् सभी फंडियों को ठीक ऐसे ही संताप लग गया था, जैसे अभी मोदी व् बीजेपी को ट्रम्प के कृत्यों से लगा हुआ है; काटो तो खून नहीं| जबकि जब तक हमला ना हुआ था तो घस्से इतने बड़े कि सेना सोमनाथ में घुसते ही अंधी हो जाएगी| इतिहासकार बताते हैं कि उस ग़ज़नी को सिंध-पंजाब के जाटों ने ही लूटा था; सर जयप्रकाश घुसकानी की लिखी "कौन कह था जाट लुटेरे" वाली रागणी में इस बात का जिक्र भी है| यानि फंडी सत्ता फिर चित्त हुई|
3) 1193 में आया मोहम्मद घोरी, फंडियों की व् उनकी सत्ता की क्या हालत करके गया; सभी को मालूम है| यहाँ भी खापों-जाटों के दादा रायसाल खोखर ने ही उसको मारा बताते हैं| कोई फंडियों को ऐसे ही संताप लगा हुआ था, जैसे आज ट्रम्प के आगे मोदी-बीजेपी को लगा हुआ है|
4) 1398 में तैमूर लंग चढ़ा आया था, बहुतेरे फंडी मोहम्मद बिन तुगलक के दरबारी बन उनके आगे अपनी कूटनीतियों की शेखियां बघार-बघार धन बटोरते थे; परन्तु जब असली तूफ़ान सर चढ़ा आया तो रोका उसको भी फिर से जाट राजा देवराज जी की बुलाई खाप पंचायत से गठित हुई सेना ने; जिससे कि उसके सेनापति दादा योगराज गुज्जर व् तैमूर को भाला मार घायल कर भागने को मजबूर करने वाले दादा हरवीर सिंह गुलिया जी जाने जाते हैं|
5) बीच में ऐसे ही पांच-दस और छोटे-बड़े किस्सों से आगे बढ़ते हुए अब आते हैं सीधा पानीपत के तीसरे युद्ध पर| दम्भ व् वर्णवादी अहंकार में चूर पेशवे चढ़ आए पानीपत में अहमद शाह अब्दाली को ललकारने| जाट महाराजा सूरजमल को जीतने पे 'दिल्ली देनी मंजूर नहीं थी इनको' अपितु उनका उपहास व् अट्टाहस उड़ा के पानीपत जीतने चढ़े थे; 8 घंटों में पेशवा सदाशिव राव भाऊ (इसी के अपभृंश से हरयाणवी औरतों ने हाऊ शब्द बनाया था) पानीपत में घुटनों बैठ रोया था; रोया था उस पल को जिस पल को जब जाट का अट्ठास किया था| इनकी यह सत्ता यहाँ दम तोड़ी| पछतावा कुछ यूँ उतारा था कि जाट सेना के सैनिक जो पेशवा सेना छोड़ने गए थे, उनसे अपनी बेटियां ब्याह उनको वहीँ बसाया व् इसी युद्ध से दो कहावते चली कि "जाट को सताया को ब्राह्मण भी पछताया" व् "बिन जाटों किसने पानीपत जीते"|
6) फिर से छोड़ दो बीच के कई फ़साने (ज्यादा लम्बा हो जाएगा लेख), सीधे आ जाओ किसान आंदोलन 2020-21 पर व् पहलवान आंदोलन 2023 पर| यहाँ भी इन्होनें उदारवादी किसानों की हर बेइज्जती व् तिरस्कार की हदें पार कर रखी हैं हुई हैं| क्योंकि इस किसान आंदोलन की सबसे बड़ी कौम जाट-जट्ट ही सेना में सबसे ज्यादा जाते हैं तो उसी चच-दाहिर की लाइन पे चलते हुए जनाब ने किसान आंदोलन का बदला "अग्निवीर" ला के लिया, कि इनको कम भर्ती करोगे तो सही रहेगा| अब ऐसे में ट्रम्प द्वारा इनके जबाड़े में हाथ फेर के देखना; सातवीं सदी से चली आ रही इनकी तथाकथित साम-दाम-दंड-भेद की दुर्गति ना तो और क्या है? श्राप-संताप तो नहीं लग रहा इनको अब फिर से?
कुछ नहीं बदला; वही पुनर्वृत हो रहा है, उदारवादी किसानी को दुर्गत कर, दम्भ में चढ़ते हैं व् होनी इनको फिर लपेटे लगा देती है| फंडी ही अक्सर श्राप-संताप आदि को मानते हैं तो यह कुत्ते की दुम की भांति और कितनी सदियां लगाएंगे खुद को सीधा करने में? कब समझेंगे कि तुम्हारी तथाकथित कूटनीति, राजनीति में जो यह manipulation व् polarisation का टेक्निकल लोचा है; इसको ठीक कर लो; वर्ण खुद को बर्बाद व् बदनाम रहोगे ही; साथ ही हम जैसों को भी लबेड़े रखोगे|
चले हैं अंग्रेजों से राजनीति के दांव-पेंच लड़ाने; तुम सर छोटूराम थोड़े ही हो कि अंग्रेजों से गेहूं के दाम 6 रुपए से दस रुपए भी करवा ले व् 25 साल तक निष्कंटक यूनाइटेड पंजाब पे राज भी कर जाए|
जय यौधेय! - फूल मलिक
Thursday, 30 January 2025
1960-1970 के दशक में रूस और अमेरिका में अंतरिक्ष में वर्चस्व को लेकर भयंकर जंग छिड़ी हुई थी!
1960-1970 के दशक में रूस और अमेरिका में अंतरिक्ष में वर्चस्व को लेकर भयंकर जंग छिड़ी हुई थी कि - कौन चांद पर पहले अपना ' राकेट ' उतारेगा और अंतरिक्ष में अपना वर्चस्व स्थापित करेगा . उस वक्त भविष्य की संभावनाएं अंतरिक्ष में ढूंढी जा रही थी .
उस
वक्त भी भारत का आदमी तो दूसरों के ' राकेट ' में लदकर अंतरिक्ष में गया था . हम अपना खुद का कुछ नहीं कर पाए थे . अब जब दूसरे देशों ने मंगल ग्रह तथा दूसरे ग्रहों की यात्राएं शुरू कर दी हैं तो हम अब ' चांद-चांद ' खेल रहे हैं .
लेकिन
अब लड़ाई अंतरिक्ष की बजाए भविष्य की Technology को लेकर जमीन पर छिड़ गई है . अब इसमें अमेरिका को चुनौती देने के लिए रूस की बजाए चीन ने वो जगह ले ली है . दोनों देशों को अच्छी तरह से पता है कि - भविष्य की Technology ( Artificial Intelligence ) है और उस पर जिसका भी कब्जा होगा तो भविष्य में पूरी दुनिया में दबदबा भी उसी देश का होगा .
इस
भविष्य की लड़ाई में खुद को खुद ही ' विश्व गुरु ' का तमगा देने वाला भारत आज ' नां तीन में है और नां तेरह ' में है . हमने 2014 के बाद भविष्य की यात्राएं करनी छोड़ दी हैं . अब हमनें Reverse ' पीछे ' की यात्राएं करनी शुरू कर दी हैं . जो लोग, जो समाज और जो देश कुछ नहीं कर पाते, आप ध्यान देना - वो ' अध्यात्म ' के नाम पर भूतकाल की बातें और यात्राएं करना शुरू कर देते हैं . ऐसे देशों की युवा पीढ़ियों का भविष्य अंधकारमय होता है .
आज
अभी ' गूगल ' पर एक खबर पढ़ रहा था तो उसके अनुसार भारत की 62 Universities इलाहाबाद जाकर ' कुंभ ' मेले पर Research कर रही हैं . अब आप लोग अपनी आगे आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को लेकर सोच सकते हैं कि - वो क्या बनेंगी - ? आपको अपने बच्चों को भविष्य बचाना होगा .
उसके
लिए आपको कठोर निर्णय लेने पड़ेंगे . अगर आपके बच्चे 10+2 में पढ़ रहे हैं या पढ़ चुके हैं तो आप उन्हें आगे की पढ़ाई बाहर से करवाना चाहते हैं लेकिन पश्चिमी के देशों में पढ़ाई मंहगी होने के कारण आप उन्हें वहां नहीं भेज पा रहे हैं तो आप Technical पढ़ाई के लिए चीन की किसी भी बढ़िया Engeneering University का चुनाव कर सकते हैं . जहां तक मुझे पता है, युरोपीयन देशों और अमेरिका से चीन में Engeneering की अंग्रेजी में भी पढ़ाई करना बहुत ज्यादा सस्ता है .
दूसरे
अगर आप का बच्चा या आप चीनी भाषा ' मन्दारिन ' सीख लेते हैं तो फिर वहां पढ़ाई का खर्चा नाममात्र का है बल्कि उसको चीन की सरकार एक अच्छी-खासी Scholarship भी देती है . ये देश की लकीरें नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए खींच रखी है ताकि आम आदमी को बेवकूफ बना कर और उसका देश के नाम पर भावनात्मक शोषण करके उस पर निर्बाध रूप से राज किया जा सके . बीजेपी के हर नेता का बच्चा अपने सुखद भविष्य के लिए इंग्लैंड और अमेरिका की युनिवर्सिटीओं में पढ़ रहा है . क्योंकि इनके पास पैसों की कमी नहीं है . भारत के विदेश मंत्री के बेटे ने तो अमेरिकी नागरिकता तक ले रखी है .
तो
आपको भी यह अधिकार है कि - आप भी अगर अपने बच्चे को या खुद मंहगी होने के चलते इंग्लैंड और अमेरिका की युनिवर्सिटीओं में नहीं पढ़ या पढ़ा सकते तो कम से कम खर्चे में अपने पड़ोसी देश चीन में उन्हें भेजकर सस्ते में उन्हें उच्च शिक्षा तो दिलवा ही सकते हैं . आगे जमाना उच्च शिक्षा का है और वो भी Technology के क्षेत्र का है . इसलिए अपने अच्छे भविष्य के लिए हमें कोई भी निर्णय लेने में हिचकिचाहट नहीं दिखानी चाहिए .
नाहर सिंह
*****
Tuesday, 21 January 2025
धर्मगुरु इसको बोलते हैं
कल ही ट्रम्प ने शरणार्थियों को अमेरिका से बाहर करने की बात कही व् आज ही इस ईसाई बिशप ने ट्रम्प को उसके आगे ही उसके इस निर्णय को गलत भी कह दिया व् इसको नहीं करने की भी कही| और एक तथाकथित ये हमारे यहाँ के धर्मगुरु हैं, दस-ग्यारह साल हो लिए मोदी-शाह-बीजेपी-आरएसएस ने देश में हिन्दू-मुस्लिम, इस बनाम उस आदि किए हुए; कहने की तो छोड़िये, बताईए ऐसे मोदी के सामने खड़ा हो के कौनसे ने उसको इन बातों पे फटकारा है जैसे यह लेडी बिशप फटकार रही है? बस इसीलिए यह देश विकसित हैं|
हमारे यहाँ तो यह काम एक हमारे खाप-चौधरी ही करते हैं जैसे जुलाई 2023 में मेवात कांड नहीं होने दिया, इसका सबसे बड़ा उदाहरण दादा चौधरी ओमप्रकाश जी धनखड़ हैं; दादा चौधरी राजपाल जी कलकल हैं; व् इन्हीं जैसे कई और; या उत्तर-पश्चिम भारत की किसान-यूनियनें ऐसा करती हैं जैसे उसी वक्त सुरेश कोथ जी ने हाँसी मसले में फंडियों को फटकार के हड़का दिया था कि कोई हाथ लगा के दिखाए मुस्लिम भाइयों को और यही लोग किसानी के साथ-साथ इन मसलों पर स्टेट-सेंटर सरकारों को खुला सुनाते हैं|
यानि इस वीडियो से एक अस्सेस्मेंट इस बात की ले लीजिये कि हमारे *खाप वाले* हों या *किसान यूनियन वाले* या फिर *उज़मा बैठक वाले*; वह इस नस्लीय मामले में अमेरिकन स्टैण्डर्ड की सोच के लोग हैं या कहिये कि ग्लोबल स्टैण्डर्ड के हैं|
जय यौधेय! - फूल मलिक
Tuesday, 31 December 2024
मुजफ्फरनगर जाट हाई स्कूल में चौ० छोटूराम का भाषण!
(जाट गजट, 29 जनवरी 1941, पृष्ठ 6)
.... मैं आर्य समाजी हूं। समाज में मैंने भी एक बात देखी कि उसके कार्यकर्ताओं ने जाटों की लीडरी उनके हाथ में नहीं दी। उनकी चोटी अपने हाथ में रखी। हम अपने हाथ में अपनी लीडरी चाहते हैं। चाहे अपना खद्दर खुरदाद है तो भी हमें जापान के रेशम से अच्छा है। हमने कह दिया कि चाहे अपना लीडर विद्वान भी कम हो लेकिन जाटों की अगुवाई की डोर हम अपने हाथों में चाहते हैं। अगर हम पंजाब में इस पर अमल न करते तो 90 लाख 92 हजार जाटों की आबादी में उनकी शान को किस तरह से बढ़ाते। यही उनकी शान बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण है कि हमने अपनी लीडरी की बागडोर दूसरों के हाथ में नहीं दी। जब हमारे पुराोहित और पढ़ाने वाले हमारे अपने होंगे उस समय हमारी उन्नति होगी, यही हमारी उन्नति का असली रहस्य है।
मुजफ्फरनगर जाट हाई स्कूल में चौ० छोटूराम का भाषण
(जाट गजट, 29 जनवरी 1941, पृष्ठ 6)
.... कांग्रेस का दावा केवल कागज पर है और हमारी पार्टी ने उस पर पंजाब में अमल करके दिखाया है। आप रावलपिंडी से मुजफ्फरगढ़ और गुड़गांव तक, जाकर देहात में पता करें तो आपको इसकी वास्तविकता मालूम हो जाएगी कि हम इस प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए कहां तक क्या कर रहें हैं? हमारे यहां जमींदार और किसान के बीच अंतर नहीं है। आपके यहां अंतर है, हमारे यहां एक बिसवां का भी जमींदार है और बीघे का मालिक भी जमींदार है। आप हमारे यहां किसी भी जमींदार कौम के व्यक्ति से मालूम करेंगे तो वह अपने आपको जमींदार कहेगा, और अगर किसी के यहां ब्याज में भी जमीन आ गई है और वह जमींदार कौम से नहीं है तो वह अपने आपको गैर जमींदार कहेगा चाहे उसके पास जमीन लिखत में भी हो। पंजाब में दो करोड़ 35 लाख की आबादी में चालीस लाख लोग जमीन के मालिक हैं, जबकि यू.पी में साढ़े चार करोड़ की आबादी में बारह लाख लोग जमीन के मालिक हैं। पंजाब में जमींदार कौम वाले को जमींदार कहेंगे। हमारे जमींदार शब्द कौमों के लिहाज से प्रयोग होता है, इसलिए मैं यहां जमींदार शब्द का प्रयोग करूं तो आप वही अर्थ निकालें जो मैने बताए हैं।
Thursday, 26 December 2024
डॉक्टर मनमोहन सिंह की नीतियां व् भारतीय किसान व् कारीगर की बदहाली!
कल तक जो किसानों के लिए लङ रहे थे वो भी मनमोहन सिंह की मृत्यु पर उनको नमन कर रहे हैं। यही होता है अधकचरी रिसर्च व् स्ट्रैटेजियों पर चलने वालों के साथ; कि अपने ही कातिल को कब सलाम कर जाएं, इनको आजीवन इसकी अक्ल नहीं आती। किसी आदमी का तुम्हारे समाज, कम्युनिटी पर क्या इमपेक्ट पङा उससे कोई मतलब नहीं ना उसको समझने-जानने की ललक या कूबत रखनी बनानी बरतनी होती? ऐसे मूर्ख आदमी मरते ही उसे शहीद का दर्जा दे कंधों पर उठा लेते हैं। जबकि मनमोहन सिंह का आर्थिक विकास गांवों खेतों के लिए तो सबसे काला अध्याय है, पढ़ें व् समझें नीचे कि क्यों व् कैसे:
पहला फैसला: IMF व World Bank के दबाव में इकोनॉमी का उदारीकरण: नतीजा यह रहा कि छोटे और मध्यम स्तर के किसान और उद्योग सस्ते आयात के कारण बाजार में टिक नहीं पाए। सरसों तेल की जगह सोयाबीन तेल का रिप्लेसमेंट हो या चाइना से आता सस्ता लहसुन या और कोई फसल सब इसी का परिणाम थे।
दूसरा फैसला: सो-काल्ड अर्थशास्त्री जी के आर्थिक सुधारों का मुख्य फोकस सेवा और उद्योग क्षेत्र पर रहा, लेकिन कृषि क्षेत्र (गांवों व देश की 70% जनसंख्या की इकोनॉमी) को तो एकदम साईड लाइन कर दिया ना ध्यान दिया। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के बजाय बाजार आधारित मॉडल पर जोर दिया गया। स्थानीय बीज कंपनियों और पारंपरिक कृषि तरीकों को नजरअंदाज किया गया, जिससे Monsanto और अन्य GM कंपनियों को बढ़ावा मिला। यूरिया और अन्य रासायनिक खादों को प्रोत्साहन दिया गया, जबकि गोबर खाद और जैविक कृषि को उतनी तवज्जो नहीं मिली। इससे मिट्टी की गुणवत्ता खराब हुई और लंबे समय में किसानों की लागत बढ़ गई।
तीसरा फैसला: मनमोहन सिंह के कार्यकाल में GM (Genetically Modified) बीज कंपनियों (Monsanto जैसी) को भारत में लाने का रास्ता साफ हुआ। किसानों पर GM बीजों और महंगे कीटनाशकों की निर्भरता बढ़ी, जिससे खेती की लागत बढ़ी और प्राकृतिक बीजों का इस्तेमाल घटा। नतीजा किसानों की आत्महत्या दर में इजाफा हुआ, खासकर कपास के किसानों में।
चौथा फैसला: FTA (Free Trade Agreements) और सस्ते आयात - मनमोहन सरकार ने कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए, जिससे विदेशी सस्ता गेहूं, दाल, और अन्य कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में आए। भारतीय किसानों को अपनी फसल के उचित दाम नहीं मिल पाए, जिससे वे आर्थिक रूप से कमजोर हुए। स्थानीय उत्पादन घटा, और भारत कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता खोने लगा। और इन्हीं नीतियों को मोदी ने तो अडानी के लिए ऐसा इस्तेमाल किया कि किसान आंदोलन पे आंदोलन कर रहा है 2020 से परन्तु राहत अभी तक नसीब नहीं।
पांचवां फैसला: WTO (World Trade Organization) के दबाव में फैसला लिया, WTO के नियमों के तहत भारतीय किसानों पर सब्सिडी घटाई गई, जबकि अमेरिका और यूरोप अपने किसानों को सब्सिडी देते रहे। आज भी इंडिया के मुकाबले यूरोप में 634 गुणा व् USA में करीब 850 गुणा सब्सिडी मिलती है।भारतीय किसान बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाए और कई फसलों का उत्पादन घाटे में चला गया।
छठा फैसला: MSP (Minimum Support Price) का असंतुलन - आज किसान सङकों पर MSP के लिए मारे फिर रहे हैं, तो इसका असल जिम्मेदार तो मोदी है परन्तु जड़ जा के जुड़ती है तो महमोहन सिंह के लिए तथाकथित उदारवादी फैसलों से। अपने दस साल के कार्यकाल में मामूली बढ़ोतरी कर जो असंतुलन किया था वो आज किसान के लिए सबसे बुरा साबित हो रहा है।
सातवां फैसला: मजदूरों और स्थानीय कारीगरों को खत्म किया, जिसको मोदी ने तो प्रलय-पार ही पहुंचा छोड़ा है, परन्तु जड़ें गड़ी मनमोहन सिंह के वक्त जब बड़े पैमाने पर आयातित सामान ने स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और हस्तशिल्प को प्रभावित किया।
आठवां फैसला: कृषि उत्पादों का निर्यात घटाना - WTO के दबाव में मनमोहन सरकार ने कई कृषि उत्पादों के निर्यात पर रोक लगाई। इससे भारतीय किसानों को वैश्विक बाजार में अपने उत्पादों को बेचने का मौका नहीं मिला।
हाँ, मनमोहन सिंह की आर्थिक नीतियों ने शहरी और उद्योग क्षेत्र को लाभ पहुंचाया क्योंकि यह बनी ही इनके उद्दार के लिए थी; लेकिन ग्रामीण भारत, किसान और स्थानीय कारीगरों के लिए ये सबसे नुकसानदेह साबित हुईं। कृषि क्षेत्र को नजरअंदाज करना और अडानी-अम्बानी कंपनियों का बढ़ता प्रभाव, ये ऐसे मुद्दे हैं, जिनकी वजह से आज भी किसान संघर्ष कर रहे हैं। मोदी ने मनमोहन ने 'आर्थिक उदारीकरण' के नाम पर जो खड़ा किया; उसको आधार बना; अब इसको ऐसा नासूर बना दिया है कि एक हरयाणा-पंजाब व् ऊपरी वेस्ट-यूपी के किसान ही लड़ने लायक बचे हैं बाकी भारत तो कब का हथियार डाल चुका खेती-किसानी के नाम के।
सिक्ख इतिहास प्रश्नोत्तरी!
1. दस गुरु साहिबानों के नाम तरतीब वार लिखें
गुरु नानक देव जी (1469-1539)
गुरु अंगद देव जी (1504-1552)
गुरु अमर दास जी (1479-1574)
गुरु राम दास जी (1534-1581)
गुरु अरजन देव जी (1563-1606)
गुरु हरगोबिंद जी (1595-1644)
गुरु हरिराय जी (1630-1661)
गुरु हरिकृष्ण जी (1656-1664)
गुरु तेगबहादुर जी (1621-1675)
गुरु गोबिंद सिंह जी (1666-1708)
2. उन दो साहिबजादों के नाम बताईये जिन्हें जिन्दा नीवों में चिनवा दिया गया था
बाबा फ़तेह सिंह जी
बाबा जोरावर सिंह जी
3. उन दो साहिबजादों के नाम बताईये जो चमकोर की लड़ाई में शहीद हुए थे
बाबा अजीत सिंह जी
बाबा जुझार सिंह जी
4. सिक्ख पंथ के पहले पांच प्यारों के नाम बताईये
भाई दया सिंह जी
भाई धरम सिंह जी
भाई हिम्मत सिंह जी
भाई मोहकम सिंह जी
भाई साहिब सिंह जी
5. सिक्ख धर्म के पांच ककारों के नाम बताईये
केस
कंघा
किरपान
कड़ा
कछिहरा
6. खालसे के धरम पिता कौन हैं
गुरु गोबिंद सिंह जी
7. खालसे की धरम माता कौन हैं
माता साहिब कौर जी
8. खालसा पंथ की नींव कहाँ रखी गयी थी
आनंदपुर साहिब
9. जब सिक्ख आपस में मिलते हैं तो क्या कह कर एक दुसरे को संबोधित करते हैं
वाहेगुरु जी का खालसा
वाहेगुरु जी की फ़तेह
10. जैकारा क्या है
बोले सो निहाल
सति श्री अकाल
11. ‘सिक्ख’ शब्द से आप क्या समझते हैं
शिष्य (सीखने वाला)
12. पांच तख्तों के नाम बताईये
श्री अकाल तख़्त साहिब, अंमृतसर, पंजाब
श्री हरिमंदिर साहिब, पटना, बिहार (पटना साहिब)
श्री केसगढ़ साहिब, आनंदपुर, पंजाब (आनंदपुर साहिब)
श्री हजूर साहिब, नांदेड़, महाराष्ट्र
श्री दमदमा साहिब, तलवंडी साबो, बठिंडा, पंजाब
13. गुरमुखी लिपि पड़ाना सबसे पहले किसने शुरू किया था
गुरु अंगद देव जी
14. ‘गुरु का लंगर’ की प्रथा सबसे पहले किस ने शुरू की थी
गुरु अमरदास जी
15. आदि श्री गुरु ग्रन्थ साहिब (पोथी साहिब) सबसे पहले किसने लिखी थी
गुरु अरजन देव जी
16. श्री हरिमंदिर साहिब अंमृतसर में श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी का प्रकाश सबसे पहले कब हुआ था
सन 1604 में
17. श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के पहले ग्रंथी कौन थे
बाबा बुड्डा जी
18. श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के कितने अंग (पन्ने) हैं
1430
19. श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी में कितने गुरुओं की बाणी दर्ज है
कुल 6 गुरुओं की : पहले पांच एवं नोवें गुरु जी की
20. किस गुरु को ‘शहीदों के सरताज’ भी कहा जाता है
गुरु अरजन देव जी
21. किस गुरु को ‘मीरी-पीरी के मालिक’ भी कहा जाता है
गुरु हरिगोबिंद जी
22. किस गुरु का सिर धड से अलग किया गया था
गुरु तेगबहादुर जी
23. किस गुरु को ‘हिन्द-दी-चादर’ भी कहा जाता है
गुरु तेगबहादुर जी
24. सिमरन कैसे होता है
सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक अकालपुरख नूं याद करना
25. सिक्ख धरम में शादी को क्या कहते हैं
आनन्द कारज
26. गुरु नानक देव जी की यात्राओं को क्या कहा जाता है
उदासी
27. गुरु नानक देव जी के साथ रबाब कौन बजाता था
भाई मरदाना जी
28. उस गुरुद्वारे का नाम बताईये जहाँ वली कंधारी का अहंकार टुटा था
पंजा साहिब
29. गुरु नानक देव जी कहाँ एवं कब ज्योति ज्योत समाये थे
1539, करतार पुर
30. गुरु अंगद देव जी का पहला नाम क्या था
भाई लहणा जी
31. गुरु अमरदास जी ने गुरु अंगद देव जी की सेवा कितने समय तक की
12 वर्ष
32. उस नदी का नाम बताईये जहाँ से गुरु अमरदास जी रोज पैदल जा कर गुरु अंगद देव जी के लिए पानी भर के लाया करते थे
ब्यास नदी
33. ‘मसंद’ प्रचारक किसने शुरू किये थे
गुरु अमरदास जी
34. गुरु अरजन देव जी के पुत्र का नाम बताईये
हरगोबिंद जी
35. गुरु रामदास जी का पहला नाम क्या था
भाई जेठा जी
36. वहां कौन सा गुरुदवारा है जहाँ गुरु अरजन देव जी को शहीद किया गया था
डेरा साहिब
37. गुरु हरिगोबिंद जी को कैदी की तरह क्या रखा गया था
ग्वालियर का किला
38. गुरु हरिगोबिंद जी को जब रिहा किया गया तब उनके साथ उनका चोला पकड़ के और कितने राजाओं को रिहा किया गया था
52 राजा
39. गुरु हरगोबिंद जी ने दो तलवारें धारण की थी, उनके नाम बताओ
मीरी पीरी
40. अकाल तख़्त की स्थापना किसने की थी
गुरु हरिगोबिंद जी
41. गुरु हरिगोबिंद जी को जपुजी साहिब के पाठ का शुद्ध उच्चारण किसने सुनाया था
भाई गोपाला जी
42. बाबा बुड्डा जी ने कितने गुरुओं की सेवा की
6
43. ओरंगजेब को गुरबाणी गलत पढ़ कर सुनाने के लिये किसे सजा मिली थी
राम राय, गुरु हरि राय जी के पुत्र
44. गुरु हरि कृष्ण जी की कितनी उम्र थी जब उनको गुरुगद्दी मिली थी
5 साल
45. मिर्जा राजा जय सिंह के बंगले पर अब कौन सा गुरुद्वारा है जहाँ गुरु हरि कृष्ण जी ठहरे थे जब वह दिल्ली आये थे
गुरुद्वारा बंगला साहिब
46. गुरु हरि कृष्ण जी की कितनी उम्र थी जब वह ज्योति ज्योत समाये थे
8 साल
47. जहाँ गुरु हरि कृष्ण जी का अंतिम संस्कार हुआ वहां अब कौन सा गुरुद्वारा है
गुरुद्वारा बाला साहिब
48. गुरु हरि कृष्ण जी के अंतिम शब्द क्या थे जब वह अगले गुरु जी के बारे में बता रहे थे
‘बाबा बकाले’ इसका मतलब है की अगले गुरु बकाला नाम के गावं में मिलेंगे
49. सोढ़ी परिवार के कितने लोग अपने आप को गुरु कहते हुए बकाला में मिले
22
50. बकाला में गुरु तेगबहादुर जी को ढूंड कर दुनिया के सामने लाने वाले व्यक्ति कौन थे
भाई मक्खन शाह लुबाना
51. गुरु तेगबहादुर जी की पत्नी का क्या नाम था
माता गुजरी जी
52. गुरु तेगबहादुर जी के साथ शहीद होने वाले तीन सिक्ख कौन थे
भाई मती दास जी
भाई सती दास जी
भाई दयाला जी
53. गुरु तेगबहादुर जी के साथ शहीद होने वाले तीन सिक्खों को कैसे शहीद किया गया था
भाई मती दास जी (आरी से काट के शहीद किया गया)
भाई सती दास जी (रुई में लपेट कर आग लगा दी गई)
भाई दयाला जी (गर्म पानी में उबाला गया)
54. किसके नेतृत्व में 500 कश्मीरी पंडित गुरु तेगबहादुर जी के पास मदद मांगने के लिये आये थे
पंडित कृपा राम (जो की बाद में गुरु गोबिंद सिंह जी के संस्कृत के गुरु भी बने एवं फिर खालसा सजे एवं अंत में चमकोर की लड़ाई में शहीद हो गए)
55. गोबिंद राय (गुरु गोबिंद सिंह जी की उस वक्त कितनी उम्र थी)
9 साल
56. जहाँ गुरु तेगबहादुर जी को शहीद किया गया वहां कौन सा गुरुद्वारा है
गुरुद्वारा सीस गंज, चांदनी चौंक दिल्ली
57. गुरु तेगबहादुर जी के शरीर का संस्कार किसने किया
भाई लक्खी शाह वणजारा
58. जहाँ गुरु तेगबहादुर जी के शरीर का संस्कार हुआ वहां कौन सा गुरुद्वारा है
गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब, दिल्ली
59. गुरु तेगबहादुर जी के सीस को आनंदपुर साहिब कौन ले के गया था
भाई जैता जी (भाई जीवन सिंह जी)
60. वहां कौन सा गुरुद्वारा है जहाँ श्री गुरु तेगबहादुर जी के सीस का संस्कार हुआ था
गुरुद्वारा सीस गंज साहिब, आनंदपुर
61. पीर बुद्धू शाह जी के कितने पुत्र थे और भंगानी के युद्ध में कितने शहीद हुए थे
4 पुत्र, भंगानी के युद्ध में 2 शहीद हुए
62. भंगानी के युद्ध में पीर बुद्धू शाह जी की सेवाओं के बदले में गुरु गोबिंद सिंह जी ने उन्हें क्या उपहार दिये थे
कंघा (कुछ टूटे हुए बालों सहित), किरपान एवं दस्तार
63. आनंदपुर की लड़ाई में शराब पिला कर मस्त किये हुए हाथी के साथ कौन से सिक्ख ने युद्ध किया था
भाई बच्चितर सिंह
64. आनंदपुर की लड़ाई के दौरान गंभीर रूप से घायल सिपाहियों को कौन पानी पिलाता था (इस बात की परवाह किये बिना की वो सिक्ख हैं या मुस्लिम)
भाई कन्हैया जी
65. माता गुजरी जी और दो छोटे साहिबजादों की खबर सिरहंद के नवाब को किसने दी थी
गंगू ब्राह्मण
66. चमकोर की लड़ाई के बाद गुरु गोबिंद सिंह जी नंगे पैर कौन से जंगलों में रहे
माछीवाड़ा
67. उन दो पठानों के नाम बताईये जिन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी को मुगलों से बचाया था
नबी खान और गनी खान
68. मुक्तसर की लड़ाई में शहीद होने वाले चालीस मुक्तों का नेतृत्व किसने किया था
भाई महा सिंह
69. अंमृतसर शहर के पांच सरोवरों के नाम बताईये
अंमृतसर
कौलसर
संतोखसर
बिबेकसर
रामसर
70. गुरु गोबिंद सिंह जी ने माधो दास को अमृत पान के बाद क्या नाम दिया
बंदा सिंह
71. बंदा सिंह ने पंजाब छोड़ने से पहले सिक्खों को क्या दिया
निशान साहिब एवं नगाड़ा
72. गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ का पहला जत्थेदार किसे बनाया था
बंदा सिंह
73. मिसल के समूह को क्या कहते थे
दल खालसा
74. पहले दल खालसा की स्थापना किसने की थी
नवाब कपूर सिंह
75. उस सिक्ख सिपाही का नाम बताईये जिसे सुल्तान उल कौम का ख़िताब मिला
जस्सा सिंह आहलूवालिया
76. दिल्ली की उस जगह का क्या नाम है जहाँ सरदार बघेल सिंह अपने 30,000 साथियों के साथ ठहरे थे
तीस हजारी
77. शेरे-ए-पंजाब का ख़िताब किसे प्राप्त है
महाराजा रणजीत सिंह
78. सरदार हरी सिंह नलवा ने कौन से प्रसिद्ध गुरुद्वारा की स्थापना की
गुरुद्वारा पंजा साहिब
79. मोदीखाना साखी कौन से गुरु जी से सम्बंधित है
गुरु नानक देव जी
80. सुखमनी साहिब के रचेता कौन है
गुरु अरजन देव जी
81. होला मोहल्ला का त्यौहार कौन से गुरु जी ने शुरू किया था
गुरु गोबिंद सिंह जी
82. गुरु गोबिंद सिंह जी के कौन से सिक्ख ने भंगानी की लड़ाई में अपना साथ दिया और अपने दो पुत्र भी शहीद करवाए
पीर बुद्धू शाह
83. सिक्खों के कैलेन्डर का क्या नाम है
नानकशाही कैलेन्डर
84. नानकशाही कैलेन्डर सूर्य या चन्द्र किसकी गति के हिसाब से चलता है
सूर्य
85. नानकशाही कैलेन्डर का पहला वर्ष कौन सा है
1469 (जब गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था)
86. भाई लालो जी के घर गुरु नानक देव जी ने किस का भिजवाया हुआ लंगर वापिस कर दिया था
मालिक भागो
87. गुरु नानक देव जी और सिद्धों के बीच मुलाकात (सिद्ध गोस्ट) कहाँ पर हुआ था
कैलाश पर्वत (सुमेर पर्वत)
88. माता खीवी जी कौन थी
माता खीवी जी गुरु अंगद देव जी की पत्नी थी और वह सिक्ख इतिहास में केवल एक स्त्री हैं जिनका नाम गुरु ग्रन्थ साहिब जी में दर्ज है
89. अकाल तख़्त का क्या मतलब होता है
सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापक, अकाल पुरख का सिंहासन
90. गुरु तेग बहादुर जी को गुरु नानक देव जी की याद में एक बड़ा टीला क्या स्थापित मिला
डुबरी, आसाम
91. किस मुग़ल बादशाह ने गुरु तेगबहादुर जी का सिर धड से अलग करने का हुक्म दिया था
औरंगजेब
92. गुरु गोबिंद सिंह जी को अपनी रक्षा के लिये पंज प्यारों ने किस किले को छोड़ने का आदेश दिया था
चमकोर का किला
93. सुखमनी साहिब में कितनी अष्टपदीयां हैं
24
94. ‘सिंह’ शब्द से आप क्या समझते हैं
शेर
95. कौर शब्द से आप क्या समझते हैं
राजकुमारी
96. गुरु नानक देव जी संगल दीप विच किसनू मिले सी
राजा शिव नाथ
97. गुरु अमरदास जी ने कौन सा शहर बसाया था, जहाँ वह गुरु बनने के बाद रुक गये थे
गोइंदवाल
98. गुरु अरजन देव जी की पत्नी का क्या नाम था
माता गंगा जी
99. श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी में गुरबाणी कितने रागों में लिखी गयी है
31
100. श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी में मूल मंत्र कितनी बार आया है
33
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
Friday, 20 December 2024
चौधरी ओमप्रकाश चौटाला, वह शेर जिसने नरेंद्र मोदी को चलती गाडी से उतार दिया था!
फंडियों की अक्ल ठिकाने लगाने का वही टशन व् अणख थी चौधरी ओमप्रकाश चौटाला में जो सर छोटूराम में थी!
2013 में रोहिणी कोर्ट में पेशी पे नहीं जाने का ऑप्शन था चौधरी ओमप्रकाश चौटाला जी के पास| पर पता नहीं किसने सलाह दी कि आगे इलेक्शन हैं जेल चले जाओगे तो वोटों की सिम्पथी मिलेगी| कहाँ 'ग्रीन-ब्रिगेड' वाला दबंग, अपनी इसी दबंगई पर कायम रहते हुए उस दिन कोर्ट न जाते तो सजा नहीं होनी थी व् 2014 में इलेक्शन जीत के या तो एकल दम पे सीएम बनते या अलायन्स में भी बनते तो सबसे बड़ी पार्टी के रूप में खुद ही सीएम बनते|
खैर, बात करते हैं उनकी सर छोटूराम जैसी अणख व् टशन की| जहाँ ताऊ देवीलाल को हरयाणा में बीजेपी की एंट्री करवाने बारे दोषी माना जाता है, जो कि सच भी है; वहीँ चौधरी ओमप्रकाश चौटाला को उसी बीजेपी को ठिकाने लगाने के लिए जाना जाएगा| ऐसा करके उन्होंने बीजेपी से 1990 में उनके पिता ताऊ देवीलाल जी के साथ बीजेपी द्वारा किए गए धोखे का बदला लिया था साल 1999 से ले 2005 तक जब उनकी सरकार रही तब|
ठिकाने भी लगाया दो तरीके से: एक तो 2000 में जब इनेलो ने बीजेपी के साथ अलायन्स में चुनाव लड़े तो 60-30 के फार्मूला पर चुनाव हुआ| चौटाला साहब ने जिन 30 सीट पर बीजेपी के कैंडिडेट थे, हर एक पर अपने डमी उतारे व् बीजेपी के 24 उम्मीदवारों को तो वहीँ इलेक्शन में ही धूल चटवाई| अभी बीजेपी जो सूत्र सबसे ज्यादा प्रयोग में ला के हरयाणा में तीसरी बार आई है, वह यही चौधरी ओमप्रकाश चौटाला से सीखा हुआ सूत्र था, डमी कहें या बागी उम्मीदवार खड़े करवाने का; जिसको कांग्रेस जानते-बूझते हुए भी अपनी आपसी कलह में फंसे होने के चलते टैकल ही नहीं कर पाई| और उसके बाद फिर जो रगड़ा एक-एक को पकड़ के वह अपने आप में इतिहास है; इसमें क्या रामबिलास शर्मा थे, क्या मनोहरलाल खट्टर व् क्या नरेंद्र मोदी; सबको ठिकाने लगाया हरयाणा में| नरेंद्र मोदी को तो दबड़का के चलती गाडी से ही नीचे उतार दिया था|
और इनकी भाषण देने की अविरल कला, भाषण की शैली व् भाषण में विषय की तीव्रता के तो विपक्षी भी इतने कायल थे कि आज भी इनकी भाषण शैली को देश के टॉप 1 प्रतिशत नेताओं की श्रेणी में रखा जाता है| 2014 के इलेक्शन में आप से तीन बार मुलाकात हुई, तीनो मुलकातें आजीवन जेहन में रहेंगी!
मेरा मानना है कि राजनीति में एक बार आपको जो छवि बन जाए, आप उससे हट कर दूसरा कोई एक्सपेरिमेंट करने चलते हैं तो फिर गाडी पटरी पर इतनी आसानी से नहीं आती: भले 'ग्रीन-ब्रिगेड' वाली, 'दबंगई' वाली छवि झूठी थी या सच्ची थी; उसको त्याग सहानुभूति वाली राजनीति की परिपाटी चढ़ने के चक्र में उस दिन रोहिणी कोर्ट ना गए होते तो; आज उनकी राजनीति कुछ और ही बुलंदी छू रही होती व् हरयाणा की यह दशा ना होती; जिससे हरयाणा आज गुजार रखा है बीजेपी ने| 'ग्रीन-ब्रिगेड' वाली, 'दबंगई' इन दोनों छवियों से खुद की छेड़छाड़ या इसमें बदलाव करना अपने मूल रूप को बदलने जैसा था; बदलाव जरूरी होते हैं, परन्तु आप बीज की सरंचना ही छेड़ बैठोगे तो भटकन बनेगी ही बनेगी|
आज उनके निधन की दुखद बेला पर प्रार्थना है कि दादे नगर खेड़े चौधरी ओमप्रकाश चौटाला जी को उनकी शरण में लेवें व् उनका यह टशन व् अणख रहती दुनिया तक याद की जाए!
जय यौधेय! - फूल मलिक


