Saturday, 16 May 2026

साहसी जट्टी गुलाब कौर (बीबी गुलाब कौर/गदर की बेटी)

 


साहसी जट्टी गुलाब कौर (बीबी गुलाब कौर/गदर की बेटी)गदर आंदोलन की प्रमुख साहसी,पराक्रमी क्रांतिकारी इतिहास की बहादुर महिला थी।
गदर की धी/बेटी पंजाब की महाहड़/मदाहड़ गोत्र की जट्टी (जाटनी) थीं। इनका जन्म लगभग 1890 में पंजाब के संगरूर जिले के बख्शीवाला गांव (सुनाम क्षेत्र) में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। 
प्रारंभिक जीवन और विदेश यात्रा
•  गुलाब कौर का विवाह मान सिंह से हुआ।
•  बेहतर जीवन की तलाश में वे पति के साथ मनीला (फिलीपींस) चली गईं, जहाँ से आगे अमेरिका जाने की योजना थी।
•  मनीला में रहते हुए उनका संपर्क गदर पार्टी के नेताओं (बाबा हाफिज अब्दुल्ला फज्जा, बाबा बंता सिंह, बाबा हरनाम सिंह टुंडीलत आदि) से हुआ। गदर पार्टी 1913 में विदेश में बस गए भारतीयों (खासकर पंजाबी सिखों) द्वारा ब्रिटिश राज के खिलाफ सशस्त्र क्रांति के लिए बनाई गई थी। 
गदर आंदोलन में योगदान
गुलाब कौर ने गदर पार्टी जॉइन कर ली और जल्द ही मनीला ब्रांच की प्रमुख नेता बन गईं।
•  उन्होंने महिलाओं को भी क्रांति में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
•  पत्रकार का भेष बनाकर (प्रेस पास के साथ) गदर पार्टी के सदस्यों को हथियार वितरित किए।
•  गदर अखबार और क्रांतिकारी साहित्य की छपाई की निगरानी की तथा इसे फैलाया।
•  वे भर्ती (रंगरूट) करने और लोगों को ब्रिटिश विरोधी भाषण देने में भी सक्रिय रहीं।
1914 में जब गदर पार्टी ने भारत लौटकर सशस्त्र विद्रोह करने का आह्वान किया, तो गुलाब कौर ने पति को छोड़कर (जो अमेरिका जाने को तैयार थे) अपनी मातृभूमि चुन ली। वे लगभग 50 अन्य गदरियों के साथ S.S. Korea जहाज से भारत वापस आईं। 
भारत में क्रांतिकारी गतिविधियाँ
भारत पहुँचकर उन्होंने कपूरथला, होशियारपुर, जालंधर और आसपास के क्षेत्रों में:
•  जनता को जागृत किया।
•  सशस्त्र क्रांति के लिए संगठित किया।
•  गदर पार्टी का प्रचार-प्रसार और हथियारों का वितरण जारी रखा।
ब्रिटिश सरकार ने उन्हें सेडिशन (राजद्रोह) के आरोप में गिरफ्तार कर लाहौर जेल में 2 वर्ष की सजा दी।
बलिदान और विरासत
•  जेल से रिहा होने के बाद भी वे क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय रहीं।
•  उनका निधन 1941 में हुआ।
गुलाब कौर को “गदर की बेटी” (Ghadar Di Dhee) कहा जाता है। वे गदर आंदोलन में सक्रिय सबसे प्रमुख महिलाओं में से एक थीं। साहसी जट्टी(जटनी) का जीवन साहस, त्याग और देशभक्ति का बे मिशाल दर्शन है,जिन्होंने आरामदायक जीवन,पति और परिवार को त्यागकर मातृभूमि की आजादी के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया।
आज भी पंजाब में उनकी याद में गदरी मेला आदि कार्यक्रमों में सम्मान दिया जाता है।
उनकी पूरी कहानी केसर सिंह की किताब “गदर दी धी/बेटी गुलाब कौर” में विस्तार से मिलती है।
जय गदर! जय हिंद! 🇮🇳
जट्टी(जटनी)की गौरव कहानी जो भुलाई नहीं जा सकती।


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