Friday, 22 May 2026

1886 के अध्ययन ने जाटों को भारत की सर्वोच्च जाती माना गया है!

1886 के अध्ययन ने जाटों को भारत की सर्वोच्च जाती माना गया है किताब के पेज का स्क्रीनशॉट देखिए,

2014 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में जाटों का सर्वोच्च सामाजिक स्तर बताते हुए उन्हें भारत की इकलौती आर्य(इंडो आर्यन) जाती बताया गया है जिन्हें पिछड़ा वर्ग बिल्कुल नहीं माना जा सकता दूसरा स्क्रीनशॉट देखिए!

1999 में महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी ने अपने गैर जाट प्रोफेसर्स से एक सर्वे करवाया था जिसका तुलनात्मक अध्ययन ब्राह्मण,राजपूत,अहीर,गुज्जर,कुर्मी,यादव आदि जातियों से किया गया जिसमें यहां भी जाटों का सामाजिक स्तर सर्वोच्च पाया गया!

जाट देश का इकलौता आर्य समूह है जिन्हे आज के युग में भी जातीय गौरव हासिल है बस राजनीति में फंसे हुए लोग ही अपने आप को अछूत मानते है इन दस बारह लोगों को छोड़कर और बामसेफ और आदि किसान समूहों के तनख्वा धारी बीस तीस जाटों को छोड़कर पूरी जाट कौम अपने ऊपर गर्व करती है
रक्त और नस्ल पे गर्व करने वाली जातियां ही देश और धर्म की रक्षा कर पाती है








Sunday, 17 May 2026

प० रामकुमार गौतम अगर आप यही बात हमारे देश के CJI श्री सूर्यकांत जी से कहलवा दो

 प० रामकुमार गौतम अगर आप यही बात हमारे देश के CJI श्री सूर्यकांत जी से कहलवा दो कि चौटाला साहब एंटी ब्राह्मण थे तो मैं मान लूंगा कि आप सही कह रहें हैं।


चौटाला साहब किसी ब्राह्मण से खफा या खिलाफ जरूर रहे होंगे, पर पूरी ब्राह्मण बिरादरी के खिलाफ रहे होंगे यह बिल्कुल भी नहीं मान सकता। क्योंकि यदि ऐसा होता तो वो श्री सूर्यकांत जी को अपनी सरकार का एडवोकेट जनरल नहीं बनाते! यदि ऐसा होता तो अजय सिंह चौटाला का PA ब्राह्मण नहीं होता, जोकि शायद आजतक उनका PA है। क्योंकि PA बहुत बड़ा राजदार होता है, तो कोई ऐसे व्यक्ति को अपना राजदार क्यों ही बनाएगा जिसके समाज के वो खिलाफ हो?


चौटाला साहब ब्राह्मणों के खिलाफ थे या नहीं, इसका कोई कागजी प्रमाण तो नहीं है, परंतु पंडित जी आप जाटों के दिल से खिलाफ रहें हैं, इसके तो कागजी प्रमाण हैं। कागजी प्रमाण यह है कि जब सन् 1990–91 में जाटों को हरियाणा में BC आरक्षण दिया गया तो आप जाटों के आरक्षण के विरुद्ध सन् 1993 में सुप्रीम कोर्ट गए थे। आपने ये घाव किसी एक जाट को नहीं दिया था, बल्कि पूरे जाट समाज को दिया था। जिसको जाट समाज आजतक झेल रहा है। और जाटों ने फिर भी आपको दो बार विधायक बना दिया! - Rakesh Sangwan


Saturday, 16 May 2026

साहसी जट्टी गुलाब कौर (बीबी गुलाब कौर/गदर की बेटी)

 


साहसी जट्टी गुलाब कौर (बीबी गुलाब कौर/गदर की बेटी)गदर आंदोलन की प्रमुख साहसी,पराक्रमी क्रांतिकारी इतिहास की बहादुर महिला थी।
गदर की धी/बेटी पंजाब की महाहड़/मदाहड़ गोत्र की जट्टी (जाटनी) थीं। इनका जन्म लगभग 1890 में पंजाब के संगरूर जिले के बख्शीवाला गांव (सुनाम क्षेत्र) में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। 
प्रारंभिक जीवन और विदेश यात्रा
•  गुलाब कौर का विवाह मान सिंह से हुआ।
•  बेहतर जीवन की तलाश में वे पति के साथ मनीला (फिलीपींस) चली गईं, जहाँ से आगे अमेरिका जाने की योजना थी।
•  मनीला में रहते हुए उनका संपर्क गदर पार्टी के नेताओं (बाबा हाफिज अब्दुल्ला फज्जा, बाबा बंता सिंह, बाबा हरनाम सिंह टुंडीलत आदि) से हुआ। गदर पार्टी 1913 में विदेश में बस गए भारतीयों (खासकर पंजाबी सिखों) द्वारा ब्रिटिश राज के खिलाफ सशस्त्र क्रांति के लिए बनाई गई थी। 
गदर आंदोलन में योगदान
गुलाब कौर ने गदर पार्टी जॉइन कर ली और जल्द ही मनीला ब्रांच की प्रमुख नेता बन गईं।
•  उन्होंने महिलाओं को भी क्रांति में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
•  पत्रकार का भेष बनाकर (प्रेस पास के साथ) गदर पार्टी के सदस्यों को हथियार वितरित किए।
•  गदर अखबार और क्रांतिकारी साहित्य की छपाई की निगरानी की तथा इसे फैलाया।
•  वे भर्ती (रंगरूट) करने और लोगों को ब्रिटिश विरोधी भाषण देने में भी सक्रिय रहीं।
1914 में जब गदर पार्टी ने भारत लौटकर सशस्त्र विद्रोह करने का आह्वान किया, तो गुलाब कौर ने पति को छोड़कर (जो अमेरिका जाने को तैयार थे) अपनी मातृभूमि चुन ली। वे लगभग 50 अन्य गदरियों के साथ S.S. Korea जहाज से भारत वापस आईं। 
भारत में क्रांतिकारी गतिविधियाँ
भारत पहुँचकर उन्होंने कपूरथला, होशियारपुर, जालंधर और आसपास के क्षेत्रों में:
•  जनता को जागृत किया।
•  सशस्त्र क्रांति के लिए संगठित किया।
•  गदर पार्टी का प्रचार-प्रसार और हथियारों का वितरण जारी रखा।
ब्रिटिश सरकार ने उन्हें सेडिशन (राजद्रोह) के आरोप में गिरफ्तार कर लाहौर जेल में 2 वर्ष की सजा दी।
बलिदान और विरासत
•  जेल से रिहा होने के बाद भी वे क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय रहीं।
•  उनका निधन 1941 में हुआ।
गुलाब कौर को “गदर की बेटी” (Ghadar Di Dhee) कहा जाता है। वे गदर आंदोलन में सक्रिय सबसे प्रमुख महिलाओं में से एक थीं। साहसी जट्टी(जटनी) का जीवन साहस, त्याग और देशभक्ति का बे मिशाल दर्शन है,जिन्होंने आरामदायक जीवन,पति और परिवार को त्यागकर मातृभूमि की आजादी के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया।
आज भी पंजाब में उनकी याद में गदरी मेला आदि कार्यक्रमों में सम्मान दिया जाता है।
उनकी पूरी कहानी केसर सिंह की किताब “गदर दी धी/बेटी गुलाब कौर” में विस्तार से मिलती है।
जय गदर! जय हिंद! 🇮🇳
जट्टी(जटनी)की गौरव कहानी जो भुलाई नहीं जा सकती।


Wednesday, 13 May 2026

ओशो ध्यान वाले इधर ध्यान दें!

 ओशो ध्यान वाले इधर ध्यान दें

☺️
पिछले दिनों मेरे पास एक महिला का फोन आता है व वह पहले खूब हंसती है हींहींहींहीं और फोन पर कहती है कि वो कितनी सौभाग्यशाली है कि मेरे से बात कर पा रही है। मैंने तो सोचा था कि आपका कोई सहयोगी फोन उठायेगा व आपसे बात एप्वाइंटमेंट लेकर करनी होगी। मैंने उससे फोन करने का कारण पूछा तो वो कहने लगी कि उनके वहां कोई ओशो का आश्रम बना रहा था तथा वो इसे प्राकृतिक भवन निर्माण सामग्री से बनाना चाहते हैं। मैंने कहा कि हमारे यहां हर महीने प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। आप अपना नाम व पता लिख कर 098120 54982 पर वाट्सएप करदे। आपको हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी मिल जाएगी। उसने वाट्सएप कर दिया व मैंने संदेश भेज दिया।
दो दिन बाद उसी आश्रम से किसी आदमी का फोन आता है और वह कहता है कि मलिक साहब मैंने भिवानी बैंक में नौकरी कर रखी है। हम दोनों हरियाणा से ही हैं। आप एक काम करो हमें प्राकृतिक भवन निर्माण सामग्री के फार्मूले बता दो। मैंने कहा कि श्रीमान यह प्रेक्टिकल विषय है, आपको प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहिए। वो बंदा तो भड़क गया कि हम लोगों से पैसे लेते हैं हम आपको पैसे कहां से दें❓
मैंने उस सज्जन को कहा कि चलो हम आपको निशुल्क सिखा देते हैं, आप ओशो आश्रम वाले मेरी गायों कि एक महीने सेवा कर दें व इनका एक महीने का खर्च उठा लें। इतनी सी बात सुन कर तो उस बंद का रूप ही बदल गया और वो कहने लगा कि यह काम हम क्यों करें❓ मुझे भी गुस्सा आ गया व ......
दो दिन बाद फिर उसी बंदे का फोन आया व वह कहने लगा कि मैं नोट गिन रहा हूं क्या❓ मैंने कहा कि हां मैंने नोट गिनने की मशीन लगा रखी हैं वो दिन रात नोट ही गिनती रहती हैं। तू फोन रख।
अब कल शाम को वाट्सएप पर एक वृद्ध व्यक्ति ओशो की व ओशो के विचारों को पंजाबी में लिख कर भेजने लगा जिसमें वहीं बातें लिखी हैं जो हर कोई आश्रम वाला लिखता जैसे कि हमें नशामुक्त जीवन जीना चाहिये व ध्यान करना चाहिए।
मैं समझ गया कि इनकी खुजली अभी मिटी नहीं है। मैंने कहा कि आम आदमी से हम प्रशिक्षण फीस 21000/- लेते हैं क्योंकि वो घर बनाना सीखते हैं, आपसे मैं 31000/- लूंगा क्योंकि आप आश्रम बनाना सीखना चाहते हो।
इतना सुनते ही उस महाराज जी को तत्व ज्ञान हो गया व वह कहने लगा कि यह कौन-सा बड़ा काम है, मिट्टी ली व आश्रम बना लिया। हम कल से लोकल मिस्त्री से आश्रम बनवा लेंगे।
मैं बोला सुण भाई तुम ओशो वाले किसी को फ्री में पाणी भी नहीं पिलाते व एक दिन का कम से कम 850/- लेते हो। हम सबको फ्री खाना खिलाते हैं व यहां रहने का भी कुछ नहीं लेते। हमारे यहां पांच दिन ओफलाइन व 180 दिन ओनलाइन प्रशिक्षण के हम मात्र 21000/- लेते हैं यानी कि हर दिन के लगभग सौ रूपए।
अगली बार अगर किसी आश्रम वाले का फोन आयेगा तो उनके लिए फीस 41000/- होगी। मई महीने का प्रशिक्षण कार्यक्रम 27 मई से 31 मई तक आयोजित किया जाएगा। अगर आप को प्रशिक्षण प्राप्त करना है तो सीट बुक करा लें।
ठीक करया नै रै⁉️
सबको भारतीय ज्ञान मुफ्त में ही क्यों चाहिए यह बात मैं आज तक नहीं समझ पाया। थारै समझ आई हो तै कमेंट करके अवश्य बतायें ☺️☺️
APJ=√अणपढ़ जाट - Dr. Shivdarshan Malik

muस्लिमों में अपने रिश्तेदारों में निकाह करना हलाल (जायज़) है, यह सच है। - लेकिन

muस्लिमों में अपने रिश्तेदारों में निकाह करना हलाल (जायज़) है, यह सच है।

लेकिन हिंदुओं के धार्मिक ग्रन्थ मत्स्य पुराण के अध्याय 3 और 4 में ब्रह्मा और सरस्वती का प्रसंग आता है।

उसमें बताया गया है कि ब्रह्मा अपनी ही पुत्री सरस्वती के सौंदर्य को देखकर मोहित हो गए।

चूंकि ब्रह्मा अपनी ही पुत्री को भोगना चाहते थे इसलिए उन्होंने अपने पुत्रों–पुत्रियों को भी आपस में वैवाहिक संबंध स्थापित करने के लिए बोल दिया।

सभी के जाने के बाद ब्रह्मा ने अपनी पुत्री के साथ सम्बन्ध बनाए और मनु नामक पुत्र को जन्म दिया।

मुस्लिमों को दिन रात गोबर और मूत्र का सेवन कर करके कोसने वाले हिंदुओं इसपर आपका क्या कहना है?

यहां तो अपनी पुत्री को भी नहीं बख्शा जा रहा और सगे भाई–बहन भी परस्पर वैवाहिक सम्बन्ध बना रहे हैं।

ज्योतिबा फुले ने अपनी पुस्तक गुलामगिरी में इसीलिए ब्रह्मा को "........*" बोला था। - Sunil Deswal