1886 के अध्ययन ने जाटों को भारत की सर्वोच्च जाती माना गया है किताब के पेज का स्क्रीनशॉट देखिए,
2014 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में जाटों का सर्वोच्च सामाजिक स्तर बताते हुए उन्हें भारत की इकलौती आर्य(इंडो आर्यन) जाती बताया गया है जिन्हें पिछड़ा वर्ग बिल्कुल नहीं माना जा सकता दूसरा स्क्रीनशॉट देखिए!
1999 में महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी ने अपने गैर जाट प्रोफेसर्स से एक सर्वे करवाया था जिसका तुलनात्मक अध्ययन ब्राह्मण,राजपूत,अहीर,गुज्जर,कुर्मी,यादव आदि जातियों से किया गया जिसमें यहां भी जाटों का सामाजिक स्तर सर्वोच्च पाया गया!
जाट देश का इकलौता आर्य समूह है जिन्हे आज के युग में भी जातीय गौरव हासिल है बस राजनीति में फंसे हुए लोग ही अपने आप को अछूत मानते है इन दस बारह लोगों को छोड़कर और बामसेफ और आदि किसान समूहों के तनख्वा धारी बीस तीस जाटों को छोड़कर पूरी जाट कौम अपने ऊपर गर्व करती है
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