प० रामकुमार गौतम अगर आप यही बात हमारे देश के CJI श्री सूर्यकांत जी से कहलवा दो कि चौटाला साहब एंटी ब्राह्मण थे तो मैं मान लूंगा कि आप सही कह रहें हैं।
चौटाला साहब किसी ब्राह्मण से खफा या खिलाफ जरूर रहे होंगे, पर पूरी ब्राह्मण बिरादरी के खिलाफ रहे होंगे यह बिल्कुल भी नहीं मान सकता। क्योंकि यदि ऐसा होता तो वो श्री सूर्यकांत जी को अपनी सरकार का एडवोकेट जनरल नहीं बनाते! यदि ऐसा होता तो अजय सिंह चौटाला का PA ब्राह्मण नहीं होता, जोकि शायद आजतक उनका PA है। क्योंकि PA बहुत बड़ा राजदार होता है, तो कोई ऐसे व्यक्ति को अपना राजदार क्यों ही बनाएगा जिसके समाज के वो खिलाफ हो?
चौटाला साहब ब्राह्मणों के खिलाफ थे या नहीं, इसका कोई कागजी प्रमाण तो नहीं है, परंतु पंडित जी आप जाटों के दिल से खिलाफ रहें हैं, इसके तो कागजी प्रमाण हैं। कागजी प्रमाण यह है कि जब सन् 1990–91 में जाटों को हरियाणा में BC आरक्षण दिया गया तो आप जाटों के आरक्षण के विरुद्ध सन् 1993 में सुप्रीम कोर्ट गए थे। आपने ये घाव किसी एक जाट को नहीं दिया था, बल्कि पूरे जाट समाज को दिया था। जिसको जाट समाज आजतक झेल रहा है। और जाटों ने फिर भी आपको दो बार विधायक बना दिया! - Rakesh Sangwan
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