Sunday, 7 June 2026

जाटों में लड़की और बहु में फर्क होता था!

यह सच है कि शरणार्थियों ने ही आकर हमें रहना सिखाया है। आज हरियाणा के जाटों में लड़कियां इंस्टाग्राम पर कुल्ले मटकाती हैं और बाप पैसे चुग रहा है । बाप को इंस्टाग्राम की तरफ से आया कोई मोमेंटो टाइप दिखा रही हैं कि देखो मैंने नाच नाच कर बगड़ फोड़ दिया , इंस्टा ने मुझे फर्स्ट क्लास टैक्सी घोषित कर दिया है और बाप प्राउड फील कर रहा है । किसने सिखाया यह जाटों को ? क्या यह जाटों का सामाजिक व्यवहार था ? किस जाति में बेटी की उम्र की लड़की की बॉडी को कॉम्प्लीमेंट दिये जाते हैं ? यह इतना खुलापन जाटों में कौन लेकर आया ? कोई बोहर गाम का पैसे वाला नांदल है , कोई डीघल का अहलावत है , कोई हिसार का दुहन है , लड़कियां मुंह मारती घूम रही हैं और इंस्टा पर खुलेआम प्राउड फील कर रहे हैं उनपर । बड़ी बात है कि कौम के बड़े चिंतक और लिखाड़ उनका विरोध नहीं कर रहे क्योंकि सरकारी आदेश है कि जबतक जाटों के आखिरी घर में मलाइका अरोड़ा पैदा न हो जाए, यह सिलसिला चलते रहना चाहिए । अगर विरोध किया तो नेता नहीं बनने दिए जाओगे ।

जाटों में लड़की और बहु में फर्क होता था, दूर से देखने पर ही पता लग जाता था कि गाम की छोरी है या गाम की बहु है । लेकिन आज जाटों की लड़कियां अपने ही गांव में खुद को एक चीज की तरह पेश करने वाली ड्रेस पहनती हैं। बहुएं थोड़ा बहुत लाली सुर्खी लगा लिया करतीं , अब लड़कियों ने हद कर रखी है । पंद्रह साल की होते ही इनमें जाट की जाटनी बनने की इच्छा किस कौम ने पैदा की ? खुले बाल किस कौम में लड़कियां रखतीं थी ? शरणार्थियों में तो रखतीं थीं , अब जाटों वालियों में होड़ लगी है , किसने सिखाया इन्हें ? 

सबसे बड़ी बात हरियाणा के जाट अरोड़ा खत्रियों का मजाक बना रहे हैं कि ये मामा बुआ की लड़की से शादी करते हैं , यह हमारा कल्चर नहीं । अरे भाई तुमने तो अपने घर की लड़कियों तक को नहीं छोड़ा। सगी बहन के साथ जिम में तंग कपड़ों के साथ व्लोग बना रहे हो , यह किसने सिखाया तुम्हें ? 


यह सच है शरणार्थियों  ने तुम्हें अपना रहना सहना  सिखा दिया जबकि  मेजॉरिटी होते हुए तुम उन्हें अपना रहन सहन और तौर तरीके नहीं सिखा पाए ।


इससे साबित होता है बेहद हल्के और बड़बोले लोग हो तुम । और यह जो भाईचारा भाईचारा शब्द बोल रहे हो , भाईचारा भी उन्हीं शरणार्थियों  ने निभाया है कि सरकार उनके साथ थी फिर भी तुम्हारी तसल्ली बख्श गुल्लक नहीं तोड़ी और इस बिकाऊ और सेंटर की गुलाम लीडरशिप की गुलामी से बाहर नहीं आए तो क्या पता ये लोग भाईचारा भी तोड़ दें ।


Ashish Rana

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