फिरोज़ शाह तुगलक और खाप पंचायत
1352 ईशवी की घटना है जब दिल्ली के बादशाह फिरोजशाह तुगलक ने धार्मिक प्रतिबंध और जजिया जैसे कर आम जनता पर लगा दिए थे, साथ ही साथ बादशाह के बिगड़ैल सैनिकों और अधिकारियों ने चारों तरफ लूट मचा रखी थी। हरयाणा में सर्वखाप पंचायत का एलान हुआ। याद रखियेगा के हरयाणा में दिल्ली ग्रामीण, आज का पश्चिम उत्तरप्रदेश भी शामिल था। सर्वखाप पंचायत ने हरेक बिरादरी से ज्ञानी योद्धा चुने, जातिगत संख्या के अनुरूप।
इसमें ब्राह्मण (25), जाट (66), अहीर (15), गुज्जर (15), राजपूत (15), वैश्य बनिया (10), चमार (5), धानक (4), बढई (8), लुहार (6), सैनी (5), जुलाहे (5), तेली (5), कुम्हार (4), खटीक बाल्मीकि (4), रोड (4), रवे (3), धोबी (3), नाई (2), जोगी (2), गोसाई (2), कलाल (2)
कुल 210 वीरों को तैयार किया जुल्मी सत्ता से बात करने के लिए। सही समय पर वो लोग तुगलक के दरबार पहुंचे। पंचायत रिकॉर्ड के अनुसार 150 और आदमी तैयार करके भेजे ताकि दिल्ली की एक एक खबर पंचायत तक पहुंचे।
बादशाह की तरफ से आदेश हुआ के सिर्फ 5 आदमी ही बादशाह से बात करेंगे। किसी भी योद्धा को तलवार, भाला या अन्य हथ्यार ले कर जाने की अनुमति नहीं थी । खैर 5 वीर जाने को तैयार हुए।
हरभजन जाट, सदाराम बाह्मण, रुड़ामल बनिया, अंतराम गुज्जर और बाबरा बाल्मीकि।
बाकि 205 वीर बाहर जयकारे लगाने लगे।
हरभजन जाट ने बादशाह से कहा... जजिया हटाया जाए, मंदिर और धार्मिक कामों में कर और दखलंदाजी बन्द हो।
बादशाह के काज़ी मुइउदुदीन ने कहा ... इस्लाम कबूल करलो, तुम्हारी बातें मान ली जाएंगी।
हरभजन जाट ने अपने साथियों की तरफ देखा और काजी को कहा... धर्म का सम्बंध आत्मा से है। हरेक को अपने धर्म अपने पंथ को मानने की आज़ादी है। यही हमारे पूर्वजों और खाप पंचायतों का न्याय है। इसमें कोई ज़बरदस्ती नहीं हो सकती।।
काजी ने कहा ... क्या तुम अपने धर्म के लिए अपने प्राण दे सकते हो?
हरभजन के साथ साथ पांचों साथियों ने कहा... बिल्कुल दे सकते हैं।
बादशाह के काज़ी ने बादशाह के आदेश पर महल के बाहर एक बहुत बड़े खड्डे में आग लगवाई और कहा के... प्रमाण दो तुम सब के तुम्हे धर्म और आज़ादी प्राणों से प्यारे हैं।।
पांचों योद्धा एक एक करके अग्नि में कूद गए। उसके बाद काज़ी ने बाकियों से पूछा के ... क्या तुम लोग भी सबूत दोगे या इस्लाम कबूल करोगे?
वहीं मुसलमान फकीर बालूशाह ने काज़ी को रोकने का प्रयास किया और काजी को कहा के ये खुदा की तौहीन है। हर इंसान को अपने ईमान पर रहने का हक़ है। लेकिन काजी के साथ तकरीबन तकरीबन सारे मुल्ला मौलवियों ने इस काम को शरीयत अनुसार जायज़ ठहराया। बाकि 205 योद्धा भी अग्नि में कूद गए।
Source: सर्वखाप पंचायत रिकॉर्ड, श्री जगदेव शास्त्री जी का लेख, बलिदान विशेष अंक, पेज 151-152
(कितने किस्सों को हमसे छिपाया गया, क्यों नहीं ये इतिहास पढ़ाया गया)
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