Wednesday, 26 October 2022

हे जी कोए यौधेय सुणे भ्यर-भाण!

शीर्षक: " हे जी कोए यौधेय सुणे भ्यर-भाण"

 

खेड़्यां के जाए, भूमियां के साए, हे भईयाँ की यें पिछाण,

हे जी कोए यौधेय सुणे भ्यर-भाण!

 

भूरा-निंघाहिया जोड़ सर चाल्ले, जा चढ़ें परस लजवाण!

हे जी कोए चौधरी सुणे भ्यर-भाण!

 

हाकम तोड़े, गौरे फोड़े, भोळी नैं काटे सत्रहा रंगरूटाण!

हे जी कोए यौधेया सुणी भ्यर-भाण!

 

खेती-करां की राड़ छयड़ी, जय्ब थे औरंगजेब के राज!

हे जी कोए यौधेय सुणे भ्यर-भाण!

 

ताऊ माडू नैं ले गॉड गोकुला चढ़े, भंवरकौर खपा गई ज्यान!

हे जी कोए यौधेया सुणी भ्यर-भाण!

 

21 मौजिज गए सुलझेड़े नैं, लिए रोक काळ की आण!

हे जी कोए चौधरी सुणे भ्यर-भाण!

 

तैमूर आया, चढ़या हड़खाया; दोआब के जंगळ काहन!

हे जी कोए यौधेय सुणे भ्यर-भाण!

 

हरवीर गुळीया नैं लिया धर खुळीयां, लंगड़े का पाट्या पसाण!

हे जी कोए चौधरी सुणे भ्यर-भाण!

 

चुगताई आवैं, जींद तळै टकरावैं; भागो देवै पासणे पाड़!

हे जी कोए यौधेया सुणी भ्यर-भाण!

 

शाहमल बाबा, दिल्ली तैं दोआबा, गौरयां की भिचगी ज्यान!

हे जी कोए यौधेय सुणे भ्यर-भाण!

 

जाटवान दादा नैं कुतबु साध्या; दई आधी सेना पसार!

हे जी कोए चौधरी सुणे भ्यर-भाण!

 

रायसाल खोखर नैं गौरी सा होंतर; दिया मार म्हाल अफगान!

हे जी कोए यौधेय सुणे भ्यर-भाण!

 

खेड़्यां के जाए, भूमियां के साए, हे भईयाँ की यें पिछाण,

हे जी कोए चौधरी सुणे भ्यर-भाण!

 

फुल्ले जाट करै पुरख याद, बीच बैठक उज़मा उज्यात!

हे जी कोए यौधेय सुणे भ्यर-भाण!

 

जय यौधेय!

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