Tuesday, 29 September 2026

हम गुलाम कैसे थे ?

 हम गुलाम कैसे थे ? मैं जानना चाहती हूँ कि क्या अँग्रेज हमें पढ़ने से मना करते थे ? व्यापार करने से मना करते थे? नौकरी करने से मना करते थे? खेती करने से मना करते थे? खेलने से मना करते थे? मिल-बैठकर बातें करने से मना करते थे? शादी करने,बच्चे करने से मना करते थे? पशु चराने से मना करते थे? गाँव नहीं बसाने देते थे? इनमें से क्या नहीं करने देते थे? जिससे हमें लगे कि हम गुलाम थे ? 


लोग कहेगे वो टैक्स लेते थे तो अंग्रेज तो 10-12 तरह का टैक्स लेते थे लेकिन आज 50 से ज्यादा तरह का टैक्स आपके ऊपर लगा हुआ है।


लोग कहेगे वो देश का पेसा लूटकर विदेश ले जाते थे 

तो वो तो आज भी लेकर जा रहे है विजय माल्या मेहुल चौकसी नीरव मोदी जैसे हिन्दू लोग और आज तो नेताओ के विदेशी बैंको मे काला धन भी हजार गुणा बढ चुका है । आये दिन अफसरो के नेताओ के घरो से हजारो करोड रूपये मिल रहे है फिर ये कौनसी लूट है ? 


आपके जल जंगल जमीन पहाड कट रहे है ये कौनसी लूट है ?

2 आदमी देश मे बिना किसी इनोवेशन के देश के सबसे अमीर आदमी बने हुए है ये कौनसी लूट है ?


हर 45 किलोमीटर के बाद हमे टोल टेक्स देना पड रहा है सडको पर चलने के लिए ये कौनसी लूट है ?


अच्छी पढाई के लिए बच्चो को विदेशो मे जाना पड रहा है 

नौकरी ना मिलने पर उन्ही अंग्रेजो के देशो मे काम करने जाना पड रहा है जिन्हे लोग पानी पी पीकर गालिया देते है ।


अंग्रेजो के बनाये पूल 200 साल बाद भी खडे है और यहाँ बने पुल हर दूसरे साल गिर रहे है ये कौनसी लूट है  ?


मद्रास यूनिवसिर्टी बौम्बे यूनिवर्सिटी देहरादून स्कुल कौलकाता यूनिवर्सिटी जेसे बडे बडे शिक्षा संस्थान जिन्होने खोले गरीबो के लिए जिनके साथ मिलकर स्वामी श्रद्धानंद जी ने एगंलो वैदिक स्कुल व कालेज खोले शिक्षा के लिए वो गुलामी थी तो ये आज क्या है जहाँ नर्सरी क्लास की किताबे भी 6 हजार मे मिल रही है और सालाना फीस 50 हजार से ज्यादा है ये कौनसी लूट है ?


ब्रिटिश पीरियड मेँ  किसी पॉलिटिशियन के दबाव मेँ इंजीनियरिंग वर्क्स, मैटेरियल की गुणवत्ता और निर्माण कार्य के SOP से कोई समझौता नहीं किया जाता था ।  स्ट्रक्चर का Safety फैक्टर  2.0  रखा जाता था। मैटेरियल और कार्य की गुणवत्ता तय मनको के अनुरुप होती थी और  निर्माण कार्य के SOP का पूरी सत्यनिष्ठा से अनुपालन किया जाता था । ब्रिटिश कालीन इंजीनियर नें जिस पुल की  useful life का 100 वर्ष आकलन किया  था  वो  पुल 200 वर्ष बीत जाने पर भी  सही सलामत खड़े हैं।


जो पावर उस समय अंग्रेज अधिकारियो को थी सेम वही पावर इंडियन पीनल कोड मे पुलिस को दी गयी है ।

Sunday, 27 September 2026

भूरा (या भूरा सिंह) और निगाहिया (निघांईया/निंगाहिया)

 भूरा (या भूरा सिंह) और निगाहिया (निघांईया/निंगाहिया) को जींद के राजा स्वरूप सिंह ने 1856 के अंत में फांसी दी थी। ये दोनों लजवाना कलां (अब हरियाणा के जींद जिले के जुलाना क्षेत्र में) गांव के दलाल गोत्र के जाट नंबरदार थे।​

घटना की पृष्ठभूमि

गांव में 13 नंबरदार थे। भूरा और तुलसीराम (निघांईया के बड़े भाई) मुख्य नंबरदार थे, लेकिन दोनों कुटुंबों में वैमनस्य था। कारण था—तुलसीराम ने भूरा की चाची से दूसरा विवाह कर लिया था (जाट रिवाज के अनुसार), जो भूरा को पसंद नहीं था।
एक दिन लगान भरने के बाद वापसी पर तुलसीराम ने अपनी नई पत्नी की तारीफ की, जिससे भूरा नाराज हो गया। भूरा के कुटुंबियों ने तुलसीराम की हत्या कर दी। बदले में निघांईया के लोगों ने भूरा के उन नौजवानों को मार दिया जो हत्या में शामिल थे। दोनों पक्षों में खून का बदला खून से लेने का सिलसिला चल पड़ा। दोनों ने राजा के पास शिकायत नहीं की, क्योंकि जाट परंपरा में अदालत जाना हार माना जाता था।​
तहसीलदार की हत्या और विद्रोह
उन्हीं दिनों राजा स्वरूप सिंह जमीन की चकबंदी करवा रहे थे। एक रौबीला वैश्य तहसीलदार (कंडेला गांव में) लगान वसूली के लिए सख्ती कर रहा था। किसी किसान ने ताना मारा कि “दम है तो लजवाना जाकर दिखाओ, जहां की धरती कटखानी है।” तहसीलदार इसे अपमान समझकर लजवाना पहुंचा, चौपाल में नंबरदारों को धमकाया और साफे उतरवाने का हुक्म दिया।
भूरा और निघांईया (जो एक-दूसरे के दुश्मन थे) ने जाकर आपसी दुश्मनी भुला दी और तहसीलदार के खिलाफ एकजुट हो गए। चौपाल में निघांईया ने तहसीलदार को ललकारा। तहसीलदार एक घर में छिप गया। वहां बालम कालिया की बेटी भोली ने बल्लम से तहसीलदार और उसके साथ आए 16 पुलिसकर्मियों को मार डाला। तभी से कहावत चल पड़ी—“सेर बाजरा झोली में 16 मारे भोली ने।”​
छह महीने का युद्ध
राजा को खबर मिली तो उन्होंने गांव को तोड़ने का आदेश दिया। भूरा-निघांईया ने स्त्री-बच्चों को सुरक्षित भेजकर मोर्चेबंदी की, खाई खोदी, तोपची तैनात किए और इलाके की मदद मांगी। राजा की फौज से छह महीने तक छापामार युद्ध चला। राजा ने नाभा और पटियाला रियासतों से मदद मांगी, लेकिन सफलता नहीं मिली। अंत में ब्रिटिश रेजिडेंट/फौज की मदद ली गई। ब्रिटिश दबाव और तोपों की मार से गांव धराशायी हो गया।​
फांसी का कारण
भूरा और निघांईया पकड़े गए। राजा उन्हें माफ करना चाहते थे (क्योंकि राजा ने खापों से भूरा और निघांईया के साथ अच्छे आचरण का वादा किया था), लेकिन ब्रिटिश रेजिडेंट अफसर के दबाव के कारण दोनों को 1856 के अंत में कालवा (जींद रियासत का गांव) में फांसी पर लटका दिया गया। गांव वालों को गांव छोड़ने का आदेश मिला। लोग चारों ओर फैल गए और सात छोटे गांव बसाए, जो आज भी “सात लजवाने” के नाम से जाने जाते हैं (जैसे चुडाली, मेहरड़ा आदि)।​
यह घटना हरियाणा के जाट इतिहास में वीरता और बलिदान की मिसाल मानी जाती है। पटियाला में भी लोकगीत बने—“लजवाने, तेरा नाश जाइयो, तैने बड़े पूत खपाए।” खूनी चौपाल आज भी गांव में मौजूद है।

Saturday, 5 September 2026

1919 से 1945: किसान राजनीति से भाखड़ा तक—चौधरी छोटूराम का सफर

1919 के चेम्सफोर्ड सुधारों के बाद भारत में संवैधानिक राजनीति का नया दौर शुरू हुआ और 1920 में पंजाब में पहला विधान परिषद चुनाव हुआ। इसके बाद ग्रामीण पंजाब के कृषक हितों को राजनीतिक शक्ति देने की प्रक्रिया तेज हुई।

1923 में यूनियनिस्ट पार्टी का उभार हुआ। मियां फ़ज़ल-ए-हुसैन और चौधरी छोटूराम इसके प्रमुख संस्थापक नेताओं में थे। 1923 के चुनाव में यूनियनिस्टों ने 71 में से 33 सीटें जीतीं। चौ० छोटूराम भी निर्वाचित हुए और 1924 में पंजाब सरकार में Agriculture Minister बने और कुछ महीनों बाद Education Department का भी दायित्व उनके पास आया। 1925 में फ़ज़ल-ए-हुसैन के वायसराय की कार्यकारिणी में जाने के बाद चौ० छोटूराम को पंजाब के Education Department का पोर्टफोलियो दिया गया था; वे लगभग दो वर्षों तक Agriculture, Industries और Education से जुड़े रहे। 1926 में यूनियनिस्ट पार्टी के MLC राव पोहप सिंह ने शिक्षा मंत्री चौ० छोटूराम को रेवाड़ी में ब्रेन अहीर स्कूल के जलसे में मुख्यातिथि आमंत्रित किया था। जहां चौ० छोटूराम ने इस स्कूल की कमेटी द्वारा स्कूल को अपग्रेड करने का प्रस्ताव स्वीकार किया।
चौ० छोटूराम की राजनीति का केंद्र केवल सत्ता नहीं, बल्कि किसान, खेती, सिंचाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था थी। वे समझते थे कि पंजाब के सूखे इलाकों की असली समस्या पानी है।
इसी सोच का बड़ा उदाहरण भाखड़ा परियोजना थी। भाखड़ा की योजना उनसे पहले के वर्षों में सरकारी स्तर पर विकसित हो चुकी थी, लेकिन चौ० छोटूराम ने इसे आगे बढ़ाने में निर्णायक राजनीतिक भूमिका निभाई। नवंबर 1944 में पंजाब सरकार और बिलासपुर के राजा के बीच समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ी और 8 जनवरी 1945 को चौ० छोटूराम ने पंजाब सरकार की ओर से भाखड़ा परियोजना की स्वीकृति संबंधी फाइल पर हस्ताक्षर किए। यह उनके जीवन का अंतिम हस्ताक्षर था—अगले ही दिन, 9 जनवरी 1945 को उनका निधन हो गया।
इसके बाद भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत 1937 में प्रांतीय चुनाव हुए। पंजाब में 5 अप्रैल 1937 को सर सिकंदर हयात खान की यूनियनिस्ट सरकार बनी। चौधरी छोटूराम को विकास मंत्री बनाया गया और फिर 1941 में राजस्व विभाग की जिम्मेदारी मिली—किसान हित में उनके ऐतिहासिक सुधारों का यही निर्णायक दौर था। इस दौर में चौधरी छोटूराम द्वारा बनाए गए कानून –
किसानों को कर्ज और साहूकारी के जाल से निकालने के लिए 1934 का ऋण मुक्ति कानून, 1936 का Debtors’ Protection Act, 1938 में साहूकार पंजीकरण और गिरवी जमीन वापसी कानून तथा 1939 का कृषि मंडी कानून—इनका लक्ष्य किसान की जमीन, मेहनत और उपज की रक्षा करना था। पंजाब के इतिहास में इन्हें चौधरी छोटूराम के ‘गोल्डन लॉ’ के नाम से भी जाना जाता है।
इसलिए चौ० छोटूराम को केवल एक राजनेता के रूप में देखना अधूरा है। किसान की जमीन से लेकर पानी की समस्या तक—उनकी राजनीति का केंद्र ग्रामीण पंजाब था। भाखड़ा उनकी इसी दूरदृष्टि की सबसे बड़ी विरासतों में से एक है।

By: Rakesh Sangwan



Wednesday, 2 September 2026

दलाल खाप पंचायत 84 - चबूतरा मांडोठी झज्जर

 दलाल खाप पंचायत 84         आर्य ज्ञान सिंह दलाल

               चबूतरा मांडोठी झज्जर

जाट इतिहास के अनुसार दलाल गोत्र का गढ़ गजनी में राज्य था। वहां पर  मुस्लिम आक्रमणकारियों का दबाव बढ़ने पर वे सिंध के रास्ते राजस्थान पहुंचे और जयपुर के पास गागोर बागौर में डेरा लगाया और कुछ दिन बाद यहां से प्रस्थान करके इनका पूर्वज " मौम " झज्जर हरियाणा में आ पहुंचा। यहां उसने अपने नौ बेटों के भरे पूरे परिवार सहित गांव मांडोठी में अपनी मोढ़ी स्थापित की। वर्तमान में यहां दलाल गोत्र के 12 गांव आबाद है जिन्हें दलाल बारह के नाम से जाना जाता है । ये गांव इस प्रकार हैं - 1.मांडोठी 2. सिलौटी.आसौदा 4. जाखौदा 5. टांडाहेडी 6. रेवाड़ी खेड़ा 7. मातन 8.छारा 9.डाबोदा कलां 10. डाबोदा खुर्द ( मेहंदीपुर ) 11. खरमैण 12.कसार आदि।

 कालांतर में यहीं से जाकर देश और प्रदेश में सैकड़ों गांव दलाल गोत्र के आबाद है । अतः मांडोठी गांव दलाल वंश का पितृ गांव है या यूं कहें दादा गांव है जहां से सभी दलालों का निकास है और दलाल गोत्र का पंचायती चबूतरा भी यहीं पर है। मांडोठी गांव में 84 गांव सम्मिलित होने से इसे दलाल खाप 84 के नाम से जाना जाता है, जिसके नेतृत्व का जिम्मा मांडोठी गांव पर है। यहां अनेकों बार दिल्ली के बादशाहों, नवाबों  व राजाओं ने मांडोठी की चौधर को नवाजा है, मत्था टेका है और समय-समय पर झुकना भी पड़ा है । वर्तमान समय में भी यह खाप " दिशोरी " कार्ज के अवसरों पर अपनी प्राचीन पहचान शानो- शौकत और शक्ति का परिचय देती रहती है । यह खाप उत्तर भारत की बड़ी खापों में शुमार है इसके फैसले और इसका मशविरा देशभर में प्रसिद्ध है ।    

                ‌‌ उपरोक्त दलाल खाप 84 के अंतर्गत अनेकों खाप तपों के 172 गांव आते हैं  जो इस प्रकार से हैं :-


1. दलाल बारह - - प्रधान चौ. भूप सिंह दलाल        

 कुल गांव - 12

1.मांडोठी 2.सिलौटी 3.आसौदा 4.जाखोदा 5.डाबोदा कलां 6.डाबोदा खुर्द 7. टांडा हेड़ी  8.रिवाड़ी खेड़ा 9.मातन 10.छारा 11.खरमैण 12.कसार

 

2. आसोदा नौ गामा - प्रधान-  चौ. हजारी लाल दलाल      

कुल गांव -11

1.बिराही 2. बामननौली 3.निजामपुर 4.गढ़ी रिण्डाला ( छिल्लर ) 5.लडरावण 6.कानोंदा 7.खैरपुर 8.मुकुंदपुर ( छिकारा) 9.जौंती 10. टटेसर 11.कुलासी ( खत्री )


3. दुल्हेड़ा बारह - - प्रधान  चौ. उमेद सिंह देशवाल

कुल गांव - 12

1. छुड़ानी 2.खेड़का 3.गौयला कलां 4.गंगडवा 5.जरदकपुर 6दूल्हेड. 7.गुभाना 8.माजरी 9.कबलाना 10.भधाना 11.भदानी 12.आश्रम


4. नुना माजरा नौ गामा लोवा - प्रधान चौ. भूप सिंह जून

कुल गांव - 17

1.लोवा 2.झाडोदा 3.मंडेला कला 4.मंडेला खुर्द 5.कैर 6.बाकरगढ़ 7.सुर्खपुर 8.सिद्धिपुर 9.सोल्दा 10.नयागांव 11.लोवा माजरा 12.सराय 13.किला मोहल्ला बहादुरगढ़ 14.ईश्वर हेडी 15.देशसलपुर 16.लुकसर 17.नुना माजरा


5.धनखड़ बारह -- प्रधान -    डॉ    ओमप्रकाश धनखड़, कोऑर्डिनेटर सर्व खाप पंचायत।

कुल गांव - 11+1(उज्जड़ खेड़ा)=12.

1.ढाकला, 2.समसपुर माजरा, 3.कासनी, 4.फतेहपुरी, 5.हसनपुर, 6.रईया, 7.डावला, 8.ग्वालिसन, 9.रणखंडा,  10.खेड़ी, 11. कुंजिया, 12.भीखनपुर वीरान।


6.मतानहैल नौ गामा - प्रधान -चौ.लायक राम सुहाग

कुल गांव - 9

1.मतानहैल 2.गोधड़ी 3.ठींठ सफीपुर 4.मलिकपुर 5..अच्छेज 6.पहाड़ीपुर 7.छुछकवास 8.खापडवास 9.भालगढ


7.खूड्डन अट्ठारह खाप झज्जर--प्रधान चौ. नवरत्न पुनिया

कुल गांव - 18

1.खुड्डन  2.सुरेहती 3.न्योला 4.तुंबाहेड़ी 5.जैतपुर 6.गादला 7.मारकपुर 8.रत्नथल 9.भैरवपुर 10.बॉस 11.कान्होरा 12.उस्मापुर 13.कोका 14.खेड़ा बामण 15.सरोला 16बाबरा 17गीजाखेड़ा 18.किरडोध


8.सिलानी 22 गामा प्रधान चौ. ऋषि पाल चाहर

कुल गांव - 17+5

1.सिलाना 2.सिलानी जालिम 3.सिलाना केसों 4.दादनपुर 5.मच्छरौली 6अहरी 7कान्होरी 8किन्हेंरा 9जहाजपुर  10.उटलौदा 11.घसौला 12. छबीली ब्राह्मण 13चांदपुर rc 14.रुड़ियावास 15.खखाना 16नौरंगपुर 17पटासनी


9.सुबाना पंचनामा प्रधानमंत्री चौधरी अनूप सिंह सुबाना

कुल गांव - 5

1सुबाना 2.बाबेपुर 3.छपार 4.जटवाड़ा 5गिरधरपुर


10. इस्माईला 14 -प्रधान - चौ. आजाद सिंह खत्री

कुल गांव - 19

1.इस्माईला 2.गांधरा 3.गीजी 4. अटायल 5.खरावड़ 6.कारोर 7.चुलियाना 8.नौनंद 9.दत्तावड़ 10.भैंसरु कलां 11.भैंसरु खुर्द  12.कसरेंटी 13.. पाकस्मा 14.समचाना 15.कंसाला 16.हुमायूंपुर 17.गोरड.18. बखेता  19.मोर खेड़ी


11.अंतिल खाप 24 गामा- प्रधान- चौ. हवासिंह अंतिल

कुल गांव - 30

1नांगल खुर्द 2.मुरथल 3.कुराड. 4.हसनपुर नांधनौर 6.कुमासपुर 7.बख्तावरपुर 8.असदपुर 9.बसोधी कलां 11.बसोधी खुर्द 12.पलड़ा 13.पलड़ी कलां 14.पलड़ी  खुर्द 

15.खेवड़ा 16.असावरपुर 17.मुकीमपुर .दीपालपुर 19.बडोली 20.मीरकपुर 21.इब्राहिमपुर 22.  मंचोला 23. गढ़ी मेहंदीपुर 24.जाजल 25.रेवली 26.शाहपुर तुर्क 27.रायपुर 28.शहजानपुर 29. गढ़ शहजानपुर 30.


12. छारा चौदह गामा - - प्रधान - जोगेन्दर दलाल (भूंडू)

कुल गांव --14.

1.छारा, 2.रेवाड़ी खेड़ा, 3.छुड़ानी, 4.भदानी, 5.भदाना 6.कबलाना 7.खेड़ी आसरा, 8.सुखपुर, 9.गिरावड, 10.जौंधी, 11.रामपुरा, 12.गुडा, 13.कैमलगढ़, 14.खेड़ी खातीवास - Source - Ch. O.P. Dhankhar - President Dhankhar Khap and Coordinator Sarvkhap