हम गुलाम कैसे थे ? मैं जानना चाहती हूँ कि क्या अँग्रेज हमें पढ़ने से मना करते थे ? व्यापार करने से मना करते थे? नौकरी करने से मना करते थे? खेती करने से मना करते थे? खेलने से मना करते थे? मिल-बैठकर बातें करने से मना करते थे? शादी करने,बच्चे करने से मना करते थे? पशु चराने से मना करते थे? गाँव नहीं बसाने देते थे? इनमें से क्या नहीं करने देते थे? जिससे हमें लगे कि हम गुलाम थे ?
लोग कहेगे वो टैक्स लेते थे तो अंग्रेज तो 10-12 तरह का टैक्स लेते थे लेकिन आज 50 से ज्यादा तरह का टैक्स आपके ऊपर लगा हुआ है।
लोग कहेगे वो देश का पेसा लूटकर विदेश ले जाते थे
तो वो तो आज भी लेकर जा रहे है विजय माल्या मेहुल चौकसी नीरव मोदी जैसे हिन्दू लोग और आज तो नेताओ के विदेशी बैंको मे काला धन भी हजार गुणा बढ चुका है । आये दिन अफसरो के नेताओ के घरो से हजारो करोड रूपये मिल रहे है फिर ये कौनसी लूट है ?
आपके जल जंगल जमीन पहाड कट रहे है ये कौनसी लूट है ?
2 आदमी देश मे बिना किसी इनोवेशन के देश के सबसे अमीर आदमी बने हुए है ये कौनसी लूट है ?
हर 45 किलोमीटर के बाद हमे टोल टेक्स देना पड रहा है सडको पर चलने के लिए ये कौनसी लूट है ?
अच्छी पढाई के लिए बच्चो को विदेशो मे जाना पड रहा है
नौकरी ना मिलने पर उन्ही अंग्रेजो के देशो मे काम करने जाना पड रहा है जिन्हे लोग पानी पी पीकर गालिया देते है ।
अंग्रेजो के बनाये पूल 200 साल बाद भी खडे है और यहाँ बने पुल हर दूसरे साल गिर रहे है ये कौनसी लूट है ?
मद्रास यूनिवसिर्टी बौम्बे यूनिवर्सिटी देहरादून स्कुल कौलकाता यूनिवर्सिटी जेसे बडे बडे शिक्षा संस्थान जिन्होने खोले गरीबो के लिए जिनके साथ मिलकर स्वामी श्रद्धानंद जी ने एगंलो वैदिक स्कुल व कालेज खोले शिक्षा के लिए वो गुलामी थी तो ये आज क्या है जहाँ नर्सरी क्लास की किताबे भी 6 हजार मे मिल रही है और सालाना फीस 50 हजार से ज्यादा है ये कौनसी लूट है ?
ब्रिटिश पीरियड मेँ किसी पॉलिटिशियन के दबाव मेँ इंजीनियरिंग वर्क्स, मैटेरियल की गुणवत्ता और निर्माण कार्य के SOP से कोई समझौता नहीं किया जाता था । स्ट्रक्चर का Safety फैक्टर 2.0 रखा जाता था। मैटेरियल और कार्य की गुणवत्ता तय मनको के अनुरुप होती थी और निर्माण कार्य के SOP का पूरी सत्यनिष्ठा से अनुपालन किया जाता था । ब्रिटिश कालीन इंजीनियर नें जिस पुल की useful life का 100 वर्ष आकलन किया था वो पुल 200 वर्ष बीत जाने पर भी सही सलामत खड़े हैं।
जो पावर उस समय अंग्रेज अधिकारियो को थी सेम वही पावर इंडियन पीनल कोड मे पुलिस को दी गयी है ।
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