Wednesday, 12 August 2026

खूंटी पर टंगे खंडवे और डोगे

 खूंटी पर टंगे खंडवे और डोगे

पंडित जवाहर लाल नेहरू से झज्जर विधानसभा की सीट मांगकर लाए थे पंडित भगवत दयाल शर्मा जी। पंडित नेहरू ने कहा था कि पंडित जी वहां से प्रोफेसर शेर सिंह चुनाव लडते हैं, वहां तो मैं भी चुनाव लडूं तो हार जाऊंगा। पंडित जी ने कहा कि टिकट तो यहीं की चाहिए और पंडित भगवत दयाल शर्मा जी प्रोफेसर शेर सिंह कादियान के सामने चुनाव में आ डटे।

प्रोफेशर शेर सिंह अलग मिजाज के नेता थे लेकिन पंडित जी के मिजाज देखकर बात कर लेने के उस्ताद थे। मुकाबला कांटें का तब्दील होता गया और धीरे धीरे जातीय रंग लेने लगा। इस पर पंडित जी ने अंतिम चोट मारी और कहा मैं चौधरियों के खंडवे डोगे खूंटी पर टंगवा दूंगा और प्रोफेशर शेर सिंह चुनाव हार गए।

चुनाव के बाद समर्थकों में मार काट की स्थिति बनीं तो प्रोफेशर शेर सिंह बडी सी मुस्कान चेहरे पर लेकर मतगणना स्थल से बाहर निकले और कहा कि हम जीत गए। समर्थकों ने कंधे पर उठा लिया और वहां से चले गए और इस तरीके से जाति की कडवाहट पर समझदारी की जीत हो गई।

आजकल भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ अर्चना गुप्ता जी राजनीति के तवे पर 1967 वाली रोटी सेंकना चाहती हैं लेकिन वो ये बात भूल जाती हैं वो मुकाबला दो राजनीतिज्ञ लोगों में था। दोनों चुनाव के बाद गले मिले और बात खत्म। जीवन भर वो लोगों के बीच में रहे और कभी अपने सम्मान समारोह आयोजित नहीं करवाए। सम्मान दोनों को ही मिला लेकिन लोगों ने अपने दिल से किया। लोगों को बोलकर कंधों पर लोई नहीं डलवाते थे पहले नेता।

वक्त की बात है जब पंडित जी बुजुर्ग हुए तो दिल्ली में रहने लगे। एक दिन उनका बेटा पडोस के करियाणा स्टोर पर कुछ सामान लेने गया तो विवाद हो गया और उन्होंने पंडित जी के बेटे की पिटाई कर दी। स्वतंत्रतता सेनानी पंडित भगवत दयाल शर्मा जी भी वहां पहुंचे तो उनको भी धक्के मारे गए। पुलिस तो मुकदमा तक दर्ज नहीं कर रही थी लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जब ये मामला लोकसभा में उठाया तब जाकर पंडित जी ओर उनके बेटे को इंसाफ मिला। एक हरियाणा ये भी है।

हरियाणा में जाति एक कडवी सच्चाई है लेकिन फिर भी लोग अपने बाप को बाप ही कहते हैं मां का लोग नहीं। राजनीति में भी एक शिष्टाचार होता है, अपने से ज्यादा समाज की सोचनी होती है। जहर की बीज की फसल का कडवापन वो लोग भी लेते हैं जिनका उस फल से कोई सरोकार नहीं होता है।

हरियाणवी समाज को भी अब अब जात पात से आगे बढकर ये सोचना चाहिए कि हम अपने परिवार का उत्थान कैसे करें? कैसे हरियाणा आगे बढे? कैसे भ्रष्टाचार खत्म हो? कैसे अच्छे नेता चुनाव जीतें?

क्या आपने देश के किसी भी मंत्री के बेटे को कांवड लाते देखा है?

खैर भगवान उनको सद्बुद्धि दे - By Dharmendra Kanwari

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